मेरे शब्द-शब्द में तू है, मेरी चाह-राह में तू है,
मुश्केलियो की घडी में भी, होशलो की उम्मीद तू है ।
तू ही है मेरे मन की आवाज, गूँजती सितार तू है,
चलते रहते इन कदमो की, सपनो की उड़ान तू है ।
दौड़ती-कभी लड़खड़ाती ज़िन्दगी में, शुकून की छांव तू है,
हँसते-रोते कभी गुनगुनाते जजबातो का शैलाब भी तू है ।
मेरे भीतर समाई रोशनी है, अनंत आकाश तू है,
तू मेरी अंतर आत्मा है, या कहु की परमात्मा भी तू है।
-Bharat Pansuriya