प्रेम#
जब तक ओझल न हो जाते हो
आंखें तुम्हें देखती ही रहती हैं।
इसी वक्त लौट कर आ जाओ
बार - बार ये कहती रहतीं हैं।
बहुत जरूरी होता जाना, काम बड़ा है मैने माना।
मेरे मन की है मजबूरी चाहे बस तुमको ही पाना।
संग बिताने की खातिर इंतजार करती रहती हैं।
कितने सपने तुमसे जुड़कर, तुम तक पहुंचू उड़कर
जरा तसल्ली हो जाएगी अगर देख लो पीछे मुड़कर।
सांसों का हर तार नाम पुकारा करती रहती हैं।
डॉ अमृता शुक्ला