#काव्योत्सव
बना सितारा वो जब मेरे देशका,
मिला उसे सम्मान दो दिन के नसीब का,
दीखा दीखा के टी.वी पर सबने सबकुछ दिखलाया,
हालत उसकी खस्ता थी फिर भी उसने कर दिखाया,
रूतबे से उसके अपनो को धूमधाम करवाया,
बड़े बड़े ईनामो की बातों से फिर उनको भरमाया,
उसके मा-बाप की गरीबी को भी समाचार बनवाया,
जनता वोट के खाते के लिए,प्रोत्साहन दीलवाया,
वो जानते हे कल फिर से सब वैसा होने वाला है,
जीते थे पहले जेसे वेसे ही तो खो जाना है,
फिर भी हस के उसने सबकुछ ये चलन चलवाया,
देश हे मेरा, मेरा रूतबा कह के गर्व हे पाया।
-परहेज