Hindi Quote in Shayri by Harsha Sri

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#KAVYOTSAV

आओ न मां


आओ न मां,

दो घड़ी साथ सुस्ताते हैं,

गले में बाहें डाल कर लेटते हैं।


वक़्त के समंदर में,

बीते हुए जाने कितने नन्हें-नन्हें लम्हे बिखरे हैं,

कुछ मुस्कानें, कुछ आँसू,

कुछ तसल्ली, चंद उम्मीदें,


आओ न मां, इन लम्हों के मोती,

फुर्सत की माला में सहेजते हैं।


तुम्हारे हाथों के तेल बिना,

मेरे बाल बहुत उदास हैं,

ढूंढते हैं उन हाथों का स्पर्श,

उन आँखों का दुलार,


आओ न मां,

फिर वैसे ही तेल लगवाने को,

हम भाई-बहन कतार में बैठते हैं।


मुझे अब भी आदत है,

गरमा गरम रोटियों की,

सीधे तवे से उतारी हुई,

तुम्हारे प्यार की भाप की भाप में फूली हुई।


आओ न मां,

एक दूसरे के लिए,

फिर से गरम रोटियाँ सेंकते हैं।


तुम्हें याद है न मां,

मेरी हंसी, हंसते-हंसते फर्श पर गिर जाने वाली,

मुद्दत हुई उस तरह बिना बात हंसे हुए,


आओ न मां,

आँखों से आँसू आने तक,

और बिस्तर से फर्श पर गिर जाने तक,

खिलखिलाते हुए हंस कर देखते हैं।


अक्सर याद किया करती हूँ मैं अपना बचपन,

बाँट लेती हूँ तुमसे जाने कितनी बातें,

आज बन जाती हूँ मैं मां, और तुम बेटी,

तुम भी कुछ-कुछ याद करो, बांटो मुझसे,

आओ न मां,

मेरे सपने, मेरा बचपन नहीं,

आज तुम्हारे सपने, तुम्हारा बचपन बांटते हैं।


जानती हूँ, तुम्हारे बच्चे अब बड़े हो गए हैं,

पर आश्वस्ति की वह गोद,

जो सहेज लेगी हमें, संभाल लेगी हमें,

सिर्फ तुम्हारे पास है,

उस गोद मे दुबकने का सुकून अनमोल है।


आओ न मां, तुम्हारी गोद में लेटने के लिए हम एक दूसरे को

फिर पीछे धकेलते हैं।


जानती हूँ, हमारी ज़िंदगियों में परेशानियाँ हैं बहुत सारी,

डर हैं, उलझनें हैं,

पर फिर भी मां, तुम हो तो,

ज़िंदगी उम्मीदों से भरी है।


आओ न मां,

सिर्फ एक दिन के लिए,

सब कुछ दरकिनार कर के,

बेफिक्र ज़िंदगी में लौटते हैं।


मुझे पता है,

इसे पढ़कर तुम्हारी आँखों से,

गंगा जमुना बह रही है,

रोकने की कोशिश क्यों करती हो,


आओ न मां,

इस गंगा-जमुना के मोतियों को,

डायरी के पन्नों में सहेजते हैं।

आओ न मां।

Hindi Shayri by Harsha Sri : 111034910
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