#kavyotsava
ये मेरी ग़लती नहीं है
जो उम्र की ढ़लती साँझ पर हम मिले है
शायद ....अब ये हमारा मिलना
सही या गलत जैसे सवालों को
जन्म देता हैं ......
सोचती हूँ अक्सर. ....
ये कैसा समीकरण है रिश्ते का जो
हल ही नहीं हो पाता
मुझे पता नहीं था कि
मिलने की भी कोई उम्र होती है
कौन कब मिला
कब बिछड़ा......
और अगर मिल भी जाए तो
कोई कही किसी के
प्यार के बंधन में न जुड जाए
सच बताना. ..
क्या जानबूझकर रिश्तों में बंधा जाता है कभी
जो बंध पाये कालचक्र में....?
कौन कब , किसको कैसे मिलेगा
कब किस घड़ी...
ये तो समय तय करता है...ना
रिश्ते कोई गणित के सवाल नहीं होते हैं
जो जब जी चाहे घटा दिया, जब जितना चाहा जोड दिया. ....
ये कोई दर्शन शास्त्र का तर्क नहीं
न ही मन कभी शुभ मुहूर्त देखकर
मिलता हैं.........किसी का किसी से
बस मिल जाता है...
तो फिर......
ये मेरी गलती नहीं, जो मिल गया है
मन इस उम्र में तुमसे......आराधना जोशी