#kavyotsava
जानती हूँ .....
मैं कोई भी नहीं तुम्हारी
फिर भी देखना .....
कभी अपनी हाथों की लकीरों में
छोटी सी इक रेखा खिंची होगी
जीवन रेखा के संग...
जो जीवन रेखा के संग संग चलती रहती हैं
देखों ....इस रेखा ने खूबसूरत
जादूई अदृश्य डोर से बांध दिया हमें ...
जिसका कोई ओर न छोर ...।
कच्ची पक्की इस रेखा ने
देखो कैसे उलझा रखा है
पिरो कर स्नेह बंधन में हमें.....सुनों,
स्नेह बंधन का रंग,इतना गाढ़ा है
इतना गहरा है ,न रंग पायेगा कोई रंग
हमारे जीवन को......
मन की इस अलगनी पर
सदैव मोगरे की महक लिए महकता रहेगा
ये अबोला सा...हमारा रिश्ता
जिसे नाम की झूठी नींव की जरूरत नहीं .....
प्रगाढ स्नेह की समान्तर रेखा बन चलती रहूँगी
तुम्हारे हाँथ की जीवन रेखा संग ....आराधना जोशी
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