भावनाएं(बेटी) #
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पहली बारिश का एहसास हो तुम।
माटी की सौंधी सुवास हो तुम।
जिंदगी गुम थी कहीं तुम्हारे बगैर,
प्यार की प्राणदायी सांस हो तुम।
पंछियों की चहक, कोयल की कूक।
फूलों से झांकता मधुमास हो तुम।
तितली सी सुंदर कोमलता लिए हो,
गोद में भर लेने की आस हो तुम।
उछलती लहरों की चंचलता भरी है,
नदी की शांत गति का हास हो तुम।
मंदिर की घंटियां, शंख की ध्वनि हो,
भोर में गूंजता हुआ अरदास हो तुम।
छिटकी चांदनी की सी शीतल हो,
अंधेरे में रोशनी सी साथ हो तुम।
कुछ आंख की किरकिरी समझते,
मेरे लिए तो समसे खास हो तुम।
बेटी सब तरह से खास हो तुम।
प्रेषिका
डॉ अमृता शुक्ला