#Kavyotsav
मैं हु जैसी वैसे कोई मुझे चाहे ,
हवा का झोका छुके चला जाऐ,
पर ..यु तो मै हवा नही ,
दिल को छुकर रूह में ऊतर जाऊं ,
हु मैं ऐसी,
लब्जो की जरुरत क्या ,
आँखे बया करती है दिल का फसाना ,
कोई आँखे पढले तो मानु ,
यु तो मैं ईत्र हुं रब का ,
एहसास हो तो कोई जाने ,
इत्र मेरा कोई खुशबू नहीं ,
फुलों के मुरझाने से चला जाए.
हु मैं ऐसी,
मैं हु जैसी वैसे कोई मुझे चाहे ,
©दिपाली प्रल्हाद