#Kavyotsav
लोग अब मुझे दुआएँ भी कम देने लगे हैं,
शायद इसलिए अब मैं बीमार रहने लगा हूँ ।
अब ज़्यादा वक़्त नहीं हैं मेरे पास,
सांसे भी बची-कूची रह गई हैं,
शायद इसलिए अब मैं उदास रहने लगा हूँ ।।
ना जाने कौन से गुनाह कर दिये मैंने,
जो अब तन्हा वक़्त बिताने लगा हूँ ।
देने को ज्यादा कुछ नहीं हैं अब मेरे पास,
अब तो लोग दुआएँ भी लेने आते नहीं हैं मेरे पास ।।
मरने पर मेरे आयेंगें सब लोग,
शायद ज़िन्दा हूँ तो मिलने आते भी नहीं हैं ।।
©लेखक और शायर
आकिल अहमद सैफ़ी