#kavyotsav
यत्र नारी पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवा:|
रास्ते निकलते गए,कदम चलते गए,
राहों की पगडंडियों पर हम कहीं खो से गए ....
क्या यही वह जगह है,जहां कभी सूकून था,
न दर्द की चीख थी न दुखों का अम्बार था ....
क्या यही वह जगह है,जहां कभी आनंद था,
न ग़मों की कगार थी न बीमारियों का ढेर था ....
क्या यही वोह जगह है जहां सुखों का अम्बार था ,
न दुखों की छाया थी, न अशांति का खूमार था...
क्या यही वोह जगह है क्या वोही यह देश है जिसे ,
सोने की चिड़िया कहा जाता था,
क्या वोही यह जगह है जहां देवियों को पूजा जाता था,
क्या वही यह जगह हैं जहां स्त्री को सिर्फ स्त्री रूप में नहीं ,
बल्कि देवी,बेटी माता,पत्नी,बहू के रूप में देखा और माना जाता था,
क्या यही वोह जगह है जहां नारी को पूजा जाता था ,
दिल बस इसी बात से घायल है और रो रहा है कि,
हाँ अब तो यही वोह जगह है ,यही वोह देश हैं ,
जहां नारी का सिर्फ अनादर ही अनादर होता है ,
याद रखे सभी जो इंसान होते हुए हैवान बन गए हैं,
जब जब नारी का निरादर होगा ,
वहाँ सिर्फ पतन ही पतन होगा .......
अभी भी वक़्त है संभल जाओ,प्रलय से पहले
प्रलय मत लाओ,
प्रभा पांडे
२३/०९/२०१८