#Kavyotsav
*वो दोस्त*
Aaj Chand lines un dosto k nam..
Jinhone sath milkar soche the mukam..!
सोचा ना था ऐसा किस्सा होंगे तुम,
ज़िन्दगी का यूँ हिस्सा होंगे तुम,
तुमसे मिलकर मैंने जाना था,
गेहराइओ मे अब बस डूब सा जाना था।
शहर की उस भीड़ मे तन्हा से थे हम,
अनजान से थे, तब तुमसे जो हम..!
शायद चाहते थे कुछ कहेना हम,
पर सुनने को कहाँ राजी थे तुम?
समंदर सा एक किनारा था,
रिश्ता जो फिर हमारा था।
राज़ी हो या नाराज़गी,
उसपे हक़ तो पहेला तुम्हारा था!
जब आये थे तुम पास यूँ एक दिन,
दुनिया बदल गयी थी जैसे उस दिन।
फिर तो रात हो या दिन...
हम साथ थे हर दिन।।
क्या बाते करू अब मे वो गिन गिन?
जैसे कोई बारिश थी वो रिम जिम..!
राह मे निकले तो अकेले थे,
पर साथ तुम जो यूँ मिल गए थे!
एक नया रिश्ता सा था,
अंजानो से वो अपनासा था.
फिर क्यूँ है ये अब इतना गुम-सुम?
कहाँ खोगये है वो हम-तुम?
उस दोस्ती का कहाँ कोई मोल था?
तु ही तो रतन मेरा अनमोल था!
अंधेरों से भरी रात मे,
चंदा जो तु मेरा बनता था.
मेरे हिस्से के हर दर्द मे,
खुशियों का तु ही तो एक कोना था!
कैसे बताऊ तुझे मे
ऐसे ना तुजे खोना था...!!!
ऐसे ना तुजे खोना था...!