#kavyotsav
मैके की नजर से मैं जे गिर गई
बिरन से कर के रार!
अब लोग बाग चलावे मुझपर
जबान की तेज धार!
किसे कहू री अपनी सखियाँ
सभी की सब होसियार!
माई बाप भी दरद न जाने
कौन दिखाए प्यार!
सौतन ले पिया भी चल दिए
सात समंदर पार!
मैं विमूढ़ ही रह गई
ढोए दुख का भार!
ओ रे विधाता कहाँ गया तू
गढ़ के एक लाचार!
क्यों न छिने गति हृदय की
क्यों न बुलाए पार!!
Sadhana Pandey