मनुष्य के जन्म के साथ ही
शुरू हो जाता है बढ़ना
रिश्तो का मायाजाल
कुछ महीने तक बच्चा सिर्फ
माँ को जानता है
बाद में जुड़ते चले जाते हैं रिश्ते
पापा ,भाई -बहिन ,चाचा ताऊ
बुआ मौसी मामी। ......
और जैसे -जैसे होता है बड़ा
छूटने लगते हैं रिश्ते
एक उम्र आती है ऐसी
जब पति -पत्नी को अपने सिवा
सब रिश्ते बेमानी लगते हैं
क्या स्वार्थ पर टिका होता है हर रिश्ता
बस माँ -बाप का प्यार निस्वार्थ होता है ?
वक़्त के साथ सभी रिश्ते
लगते हैं छूटने
रह जाता है बस एक सहारा
पति पत्नी बन जाते हैं
जब एक -दूजे सहारा
सोचते है तब ज़िंदगी में
क्या जीता क्या हारा
अजीब होते हैं रिश्ते ???
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#kavyotsav