#kavyotsav
गज़ल(रहने दो)
तुम्हे हर्ज़ है गर.....मुझे पिलाने मे तो फ़िर रहने दो,
रहने दो बची शराब मेरे पयमाने मे तो फ़िर रहने दो,
एक निगाह-ए-यार ही तो है मेरे......बादा-ओ-जाम,
नशा और भी है कहीं जमाने मे...तो फ़िर रहने दो,
हम तो आते है हनोज़.....जिसके दीदार की ख़ातिर,
साक़ी है नहीं मौजूद मयख़ाने मे....तो फ़िर रहने दो,
कुछ आधे अधूरे ख़्वाब हैं बहोत है बेहिसाब है,
अब सोएंगे वो साथ मेरे सिरहाने मे तो फ़िर रहने दो,
चिंगारी मैंने ही जलाई.......आशियां अपना ही जला,
हांथ जलता है मेरा आग बुझाने मे...तो फ़िर रहने दो,
तुम्हारे नाम-ओ-शौहरत तुम्हें मुबारक ऐ अहल-ए-जहां,
जो होना हो बदनाम नाम कमाने मे...तो फ़िर रहने दो,
पानी मे आग जलाना यूं तो कोई कमाल नहीं,
नाकाम हो गर पानी से आग जालाने मे तो फ़िर रहने दो,
वक्त लगता है....वक्त लगेगा मौत को आने मे 'सादिक़',
वक्त लगता है अब और इसे आने मे तो फ़िर रहने दो।
©Sadique