#Kavyotsav
प्रतिद्वंद
मैं हूँ इस जहाँ का बेताज बादशाह,
बोला मानव एक दिन..!
जल, नभ, धरा पर,
राज करूँगा एक दिन..!!
तोड़े पहाड़, राह बनाई,
जोड़ी नदियां, नहर बनाई..!
चंद्र, मंगल, राहु-केतु तक,
सैर करूँगा एक दिन..!!
जंगल काटे, खेत बनायें,
धन-धान्य के अम्बर लगाये..!
समुद्र की गहराई नापकर,
मोती लाऊंगा एक दिन..!!
सुनकर धरती, माटी बोली,
लाख कमाले सोना-चांदी..!
लाख जमाले हिरे-मोती,
जिस दिन सब भर जायेगा...
आना होगा सब छोड़, झाड़ के,
मुझसे मिलने एक दिन..!
मुझमें मिलने एक दिन..!!!