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Manish Gode

Manish Gode

@manishgode
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#LoveYouMummy

ढूँढा तुम्हे सुबह फुलों में, ओस से लिपटे पत्तों में, झाँक लिया एक बार चिडीया के घोंसले में भी..!
फेर कर देखा ऊँगलीयों से, उगी नर्म घास में, पुछना चाहा पता तुम्हारा किट पतंगे से भी..!!
सुँघना चाहा बंद कर आँखें, सर्द हवा के झोंको में,
गंध तुम्हारी पा सकु तो पकड लुँगा आँचल भी..!
छत पर उकडू बैठा ढूँढा तुमको शाम को नभ में, पुछ बैठा पता तुम्हारा लौट रहे पँछीओं से भी..!!
न जाने क्यों लगी है, एक ही आस मेरे मन में,
जाना खोकर भी तुमको ढूँढ ही लुँगा अम्मी..!
लव यू मम्मी, लव यू मम्मी..!!

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#Kavyotsav
ऋणानुबंध

देवा... वावराकड़े जाशील,
तर माझा एक निरोप देशील..?
सांगशील त्या धरणी मातेला,
तुझ्या कृपेने, तुझे हे पोरं...
पोट भरत आहे,
आनंदाने नांदत आहे..!
कृपा आहे तुझी,
कशे फेडू हे ऋण..?
सांगशील त्या अन्नदाते ला,
आमच्यावर तुझी कृपा,
अशीच राहू दे..!
विहिरी, तलाव, नदया,
तुझ्या मायेनी भरू दे..!!
आलेले संकट, आपल्या
सावलित असू दे..!!!
देवा... तू भिऊ नकोस,
खचू ही नकोस..!
कारण तू जर खचलास,
तर सारे जग उपाशी राहील..!!
मातेचं ममत्व,
मुलांसाठी कधीच
कमी पडत नाही..!
मुलांकडून झालेल्या चुका,
आपल्या पदरी घे..!!
पुन्हा एकदा, कृषीक्रांती घडू दे,
पुन्हा एकदा, कोठया गोदमं भरू दे,
या वेळेस, मात्र झालेल्या चुका,
पुन्हा होणार नाही,
याची खंत असू दे..!
देवा... वावराकड़े जाशील,
तर माझा, हाच निरोप देशील,
माझा, हाच निरोप देशील..!!

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#Kavyotsav
प्रतिद्वंद

मैं हूँ इस जहाँ का बेताज बादशाह,
बोला मानव एक दिन..!
जल, नभ, धरा पर,
राज करूँगा एक दिन..!!

तोड़े पहाड़, राह बनाई,
जोड़ी नदियां, नहर बनाई..!
चंद्र, मंगल, राहु-केतु तक,
सैर करूँगा एक दिन..!!

जंगल काटे, खेत बनायें,
धन-धान्य के अम्बर लगाये..!
समुद्र की गहराई नापकर,
मोती लाऊंगा एक दिन..!!

सुनकर धरती, माटी बोली,
लाख कमाले सोना-चांदी..!
लाख जमाले हिरे-मोती,
जिस दिन सब भर जायेगा...
आना होगा सब छोड़, झाड़ के,
मुझसे मिलने एक दिन..!
मुझमें मिलने एक दिन..!!!

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#Kavyotsav
ताना-बाना

कुछ बुना, कुछ बुनते, बुनता गया,
जिंदगी का ताना-बाना..!
कुछ रंगा, कुछ रंगते, रंगता गया,
जिंदगी का ताना-बाना..!!

कुछ छुआ, कुछ छूते, छूता गया,
जिंदगी का ताना-बाना..!
कुछ पिघला, कुछ पिघलते, पिघलता गया,
जिंदगी का ताना-बाना..!!

पिघला मेरा अहंकार, छुआ तेरा मन..!
रंगा मेरा कैनवास, बुना तेरा सपन..!!

बस यूँ ही चलता चला...
जिंदगी का ताना-बाना...
मेरी जिंदगी का ताना-बाना...!!!

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#Kavyotsav
मिलना - बिछड़ना

वह मिलना, मिलना भी क्या...
जिसमे बिछड़ने का दुःख ना हो..!
वह बिछड़ना, बिछड़ना भी क्या...
जिसमे मिलने का सुख ना हो..!!
वह चलना, चलना भी क्या...
जिसमे रुकने का भास ना हो..!
वह रुकना, रुकना भी क्या...
जिसमे चलने का आभास ना हो..!!
वह अंधकार, अंधकार भी क्या...
जिसमे प्रकाश का आवेश ना हो..!
वह प्रकाश, प्रकाश भी क्या...
जिसमे अंधकार का समावेश ना हो..!!
वह रूह, रूह भी क्या...
जिसपे बदन का आवरण ना हो..!
वह बदन, बदन भी क्या...
जिससे रूह का निरावरण ना हो..!!

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#Kavyotsav
दिप

दिप, तुम हो पथ प्रदर्शक मेरे मन के,
तुम ही तो हो, रक्षक मेरे तन के..!
दिप, तुम हो मार्गदर्शक इस उपवन के,
तुम ही तो हो, शासक इस जीवन के..!!

दिप, तुम हो भाग्य विधाता इस चितवन के,
तुम ही तो हो, नायक अन्तर्मन के..!
दिप, तुम हो शाश्वत सत्य सबरे जगत के,
तुम ही तो हो, शिव, शंकर सगले भगत के..!!

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मैंने देखा...
दुसरो के सुख दुःख में,
सबसे आगे रहने वाला,
अपनो के विरह में..,
खड़ा रह जाता है,
ठगा सा, निस्तेज, निरंकार..!

मैंने देखा...
परिधी पे जो,
होता है सबसे तेज,
केंद्र पर आते ही..,
सब कुछ भूल सा जाता है,
अपनी गती खो देता है,
और बना रह जाता है,
मूकदर्शक... एक मूकदृष्टा..!!

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नदी किनारे इस पार,
खड़ा वो सामने मेरे...
बता रहा मुझको खबर,
नदी के उस पार की..!!

कि जबकी हमें भी पता है,
न देखा, न सुना कभी..!
ना लौट के आया कोई..,
ले खबर उस पार की..!!

कैसे कर लूँ यकीं,
क्योंकर कर लूँ यकीं..!
खबर उस पार की..,
खबर उस पार की..!!
--- मनीष गोडे

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काश कि मै...
पढ़ पाता मैं उन आँखों को,
या फिर उतर के उनमे...
ढूंढ पाता जवाबों को..!

काश कि मै...
बुन पाता मैं उन सपनों को,
या फिर पिरो के क्रोशिये में...
भर पाता रंगो को...!!

काश कि मै...
बटोर पाता मैं उन लहरों को,
या फिर बांध के अंजुली में...
समेट पाता सागर को..!

काश कि मै...
छू पाता मैं उस चंदा को,
या फिर आँख के बुलबुल में...
देख पाता परछाई को..!!
--- मनीष ग़ोडे

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बारिश का मौसम करता,
देखो कैसी ठिठोली..!
आसमां में मने दीवाली,
और जमीं पे होली..!!
-मनीष गोड़े