नदी की तो किस्मत ही है सागर में मिलना...
अपने अस्तित्व को मिटाकर एक नयी ज़िन्दगी जीना...
लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है, उसके दिल का हाल...?
अपनी मीठी हस्ती को मिटाकर यूं सागर की खराश अपनाना...
तो उसके लिए भी आसान न रहा होगा शायद...!!!
फिर भी ऐसा क्या है...?
जो वो सागर से मिलने को इतना
तड़पती है...!!!
क्या, इसे ही प्यार कहते है...?
जो नदी अपने सागर से करती है...!!!