जिन्दगी में सब रास्ते सीधे नहीं होते हैं। सीधे मार्ग पर चलकर हर बार विजय प्राप्त नहीं की जा सकती है। जब विरोधी भारी हों तो कूट नीति को प्रयोग में लायें। इस जीवन में कूटनीति का अर्थ है
साम, दाम, दण्ड और भेद। श्रीकृष्ण ने यही चारों क्रियाएं सम्पन्न कीं। पहले समझाया, फिर लालच दिया, फिर कौरवों में आपस में भेद डाला, फिर भी नहीं माने तो दण्ड दिया।