दोस्ती
आधी सी रात को कोई आया मेरे घर पे...
और बोला ...
साले दरवाज़ा तो खोल में हु तेरे दर पे ...
लेके बैठे हम coffee cup
और याद आये वो cutting chay cup ...
और याद आयी वो चुलबुली सी हसी...
पहोंच गए उस ऊंचाई पर...
जिसके सपने कभी देखे थे मेने...
पर...
आज भी याद है वो मेरे Assignment और Practical जो पुरे किये थे तूने...
हसी तो आज भी है इन् होठो पे...
पर वो मस्ती इस दिल में आती नहीं दोस्त...
ज़माने की बाते दिमाग में रहे न रहे...
पर तेरी याद दिल से जाती नहीं...
मेरे दोस्त....