For Milan Lad's...two poems..." Dil ki lagi koi kya jane......." and 'દીવાનો કા મહોલ્લા'
'प्यार' में दरअसल 'पाने की' ख़्वाहिश नहीं होती
'प्यार' में कुछ गंवाने की रंजीश नहीं होती
'प्यार' में सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार ही होता है
'प्यार'* की ख़ुशी पे कोई बंदिश नहीं होती ....
('प्यार'*- का यहॉ 'जिसे हम प्यार करते है' वो मतलब है )
Devanshu Patel
Chicago