ट्रेनिंग
ट्रेनिंग के अंत में रूपेश को बेस्ट पर्फार्मर का खिताब मिला। उसे लेते हुए उसने मन ही मन ईश्वर को धन्यवाद दिया।
जब उसे ट्रेनिंग के लिए चुना गया था तब वह बहुत परेशान था। उसे लग रहा था कि कंपनी ने उसे ये किस बवाल में फंसा दिया। इस उम्र में यह कठिन ट्रेनिंग वह कैसे करेगा। पर कंपनी की बात तो माननी ही थी। इसलिए उसने मन पक्का कर ट्रेनिंग शुरू की। उसके धैर्य और परिश्रम ने हवाओं का रुख मोड़ दिया। आरंभ में कठिन लगने वाली ट्रेनिंग में उसने सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया।