लघुकथा
सदियों से चीख ….
यार! कितनी लम्बी हो! तुम्हारे साथ मेरी जोड़ी नहीं जमती। तुमने कहा और मैंने अपनी फेवरिट हार्इ हिल सैंडल निकाल फेंकी। छोटी बच्ची-सी तुम्हारी अंगुली पकड़ पीछे-पीछे चलने लगी। तुमने कहा कि मैं तुम्हारी दादी मां लगती हूं और मैं अपनी पसंदीदा साडि़यां छोड़ जींस-कुर्ती पहनने लगी। तुमने मुझे ओल्ड -माडल कहा और मैंने माडर्न फैशन वाले सारे वेब-सार्इटस खंगाल डाले। इस तरह तुम्हारे पसंद जीते-जीते मैं अपना आप भूल गर्इ। अपने लम्बे पांव समेट कर सोते-सोते तुम्हारी पसंद की नन्ही चिडि़या बन गर्इ। एक दिन मैंने तुमसे कहा 'आओ उड़ चलें। चांद-सितारों को छू आयें।' और तुम चीख पड़े। तुम्हारी चीख सदियों तक मेरे कानो में गूंजती रही। मुझे दहलाती रही। तुम क्यों चीखे???