कुछ ना था सबकुछ बनाया आपने
आज जो कुछ हूं वो भी आपका आशिर्वाद है
अगर आप ना होते ना जाने हम कहा होते
चलना माता-पिता ने सिखाया तो आपने हमारे नन्हे कदमो का साथ निभाया
जितना भी काबिल हूं वो भी आपका आशिर्वाद है
आपकी डांट, फटकार और प्यार है
माता पिता ने तो संस्कार दिए थे
आपने उन संस्कारो को पाला पोसा है
निष्काम भाव से पढ़ाया लिखाया है
जीवन को जीना आपने सिखाया है
एक और लिखना पढ़ना सिखाया है तो दूसरी और आपने किताबो के अतिरिक्त भी ज्ञान बढ़ाया है
आपने हमसे इतना ही चाह है
तो दूसरी और कुछ बनो कुछ बनकर दिखायो
अपना नाम छिपाकर हमे ही
बड़ा बनाना आपने चाहा है
जो कुछ है आज हम आपका आशिर्वाद है
इस लायक आपने हमे बनाया उसके लिए
आपका बारंबार धन्यवाद है