जीना सिखाया आपने बढ़ना सिखाया आपने
तरक्कियों की सीढ़ीयाँ चढ़ना सिखाया आपने।
क्या पता कितने दियों में रोशनी भर रक्खी है
और उनमें लौ भरी, खुद को जलाया आपने।
आप का दर्ज़ा कहाँ कम है हमें भगवान से,
कच्चे ढेले को पकी मूरत बनाया आपने
आज दुनिया में हुआ है गर हमारा नाम जो
मान के उस पद पे टीचर है बिठाया आपने
आपसे ही सीखा है मज़बूत रहना हर कदम
ज़िन्दगी की राह में चलना सिखाया आपने।