*आज भी वो तस्वीर मुझे रुलाती है*
क्यों दूर गए तुम इसी की याद मुझे हर पल सताती है,
हर एक खुसबू के महक में तुम्हे खोजता हु,
आज भी वो तस्वीर मुझे रुलाती है।
कहता रहता हूं देखकर क्या कोई बात थी जो तुम छुपाये थे,
या मेरी ख्वाबो के तलाश में ख़ुद के लॉ के साज को छुपाये थे,
सोच सोच कर परेशान हूँ,
हर एक सवालिया बात में देख खोजता अपना इंतकाम हूँ,
बस मैं भी राही बन गया जिसका कोई राह नही,
दर्द है जुबान पर लब्जो में कोई आह नही,
बस हर चेहरे आपका ही रूप दिखती है,
रखी हुई है वो आज भी उस काँच के पीछे जहाँ आप छोड़ गए थे,
आज भी वो तस्वीर मुझे रुलाती है।
बस उस तस्वीर की भी एक खामी नज़र आ गयी,
साथ तुम्हारे मैं भी था मैंने ही साथ छोड़ दिया,
बस अब ये फासला मुझे मिटाना है,
उस तस्वीर को हकीकत का रूप दिखाना है,
अपने आप को आपके पास फिर से लाना है,
तब मैं अपने आँसू पोछ जाऊंगा,
फिर वो तस्वीर में ज़रा अपनी व झलक पाऊंगा,
ज़िन्दगी को मौत में तब्दील कर जाऊंगा।
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