#friendship story
दोस्ती
नदी किनारे झोपड़ी में एक बुढ़िया रहती थी। वरुण नामक उसे पोता था। वह रोज उसे उपदेश देती कि अनजाने दोस्ती मत करो। दोस्ती सदा निभाओ।
वरुण नित्य पेड़ के निचे नदी के किनारे खेल रहा था। उसी पेड़ पर एक तोता था। धीरे-धीरे दोने में दोस्ती हुई। तोता वरुण के लिए पका मिठा फल गिराता था। वरुण फुलाया चना उसे खिलाता था। समय बितता गया, दोनों कि दोस्ती गहरी होती गई। दोनों कि दोस्ती देख लोग कहने लगे मनुष्य की अपेक्षा पशु-पक्षी की दोस्ती अटुट होती है। पशु-पक्षी हमारे अभिन्न मित्र है। इनपर दया करना हमारा धर्म है।