मैंने देखा...
दुसरो के सुख दुःख में,
सबसे आगे रहने वाला,
अपनो के विरह में..,
खड़ा रह जाता है,
ठगा सा, निस्तेज, निरंकार..!
मैंने देखा...
परिधी पे जो,
होता है सबसे तेज,
केंद्र पर आते ही..,
सब कुछ भूल सा जाता है,
अपनी गती खो देता है,
और बना रह जाता है,
मूकदर्शक... एक मूकदृष्टा..!!