तुजसे हे बहेतर जालीम ये जमाने वाले
भूल से याद भी करले भूलजाने वाले
मुद्दतो बाद जीता तू इश्क की चालबाझी
फिर भी मायूस क्यू हे ए हराने वाले
गैरो ने लाख कोशीश की तु भी आजमाले
कभी हे खुद भी जले, मुजको जलाने वाले
इश्क मे जो मिला लौटा रहा हु मे वापस
क्यु भला रो पडे हे मुजको रुलाने वाले
- KaliRaja