My Dear Professor - 16 in Hindi Love Stories by Vartikareena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 16

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 16

















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चारू दोबारा भागने के लिए मुडती ही है कि अमर उसकी कलाई पकड उसे एक खाली क्लासरूम मे ले गया। चारू का दिल तेजी से दौड़ने लगा। 

अमर ने दरवाजा बंद किया और चारू का हाथ छोड दिया। चारू आंखे फाडे उसे देख रही थी। 


" मिस चारू..आप क्यो भाग रही है ? ", अमर ने शांत लहजे मे सवाल किया।


चारू हल्के से हँस दी। एक नकली , चोरी पकडने जाने पर दी जाने वाली हँसी।


"भ..भाग ! नही तो। मै कहा भाग रही हूं । और कॉरिडोर मे भागना अलाउड भी नही है। ", वो जबरन दांत दिखाते हुए बोली।


अमर ने एक नजर चारू की बत्तीसी पर डाली। 

" आप ठीक से ब्रश किजिए मिस । दांत साफ नही है। ", अमर ने स्पाट उत्तर दिया।


चारू का जबड़ा लटक गया। वो भौचक्कि सी अमर को देखती रही । अमर ने अपना हाथ बडाया और एक उंगली चारू की ठुड्डी के नीचे टिकाए और उसका जबडा ऊपर कर मुंह बंद कर दिया।


चारू अब तक पुरी तरह चिढ चुकी थी और गुस्से मे आ गई थी। क्रश.अगर मुंह पर झंड कर दे तो इंसान तड़पती मछली बन जाता है। और चारू तो गुस्से मे उबलती हुई मछली थी। 


अमर ने उसके चेहरे के भाव अच्छे से पढे पर कुछ कहा नही। उसके चेहरे पर कोई भाव नही था। ये देख कर चारू गुस्से से उबालकर भांप बनने लगी। 


वो अभी कुछ बोलने ।ई वाली थी की नैना ने दरवाज झटके से खोल दिया।

दोनो सर उसकी तरफ मुड गए । नैना ने दांत दिखा दिए। 


" वो चारू को स्पोर्ट्स टीचर बुला रहे है। " 


उसने कहा और चारू का हाथ पकड उसे ले गई।  अमर ने उसे रोकना चाहा पर रूक गया । शायद इस समय चारू के पीछे जाना सही नही था। और कही वो इसका गलत मतलब ना समझ ले । अमर ने सर ना मे हिलाया और चला गया । 








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इधर गुस्से मे उबलती चारू ने ग्राउंड मे आते ही बच्चे की तरह रोना शुरू कर दिया। 


" नैनाआआआआआ.....!!!!!!"  , वो छोटे बच्चो ही रोती बोली।


" क्या हुआ? ", नैना कान मे उंगली डाल ली।


" सर ने बिना साबुन पानी के मुझे धो दिया। "


" मतलब ? "


" मतलब ये की मैरी इज्जत की मट्टी पलीद हो गई।  "


नैना चारू के सर पर चपत लगा दी, " सही से बता । "


चारू सुबक ने लगी। 


" सर ने कहा मैरे दांत साफ नही। ऊऊऊऊ...!!! "


चारू ने दोबारा रोना शुरू कर दिया।उसने नैना की आस्तीन पकडी और उस से नाक पोछने लगी।


" ऐ...छी ! हट!! ", नैना मुंह बनाकर दूर हट गई। उसने एक  नजर सुबक सुबक कर रोती चारू को देखा फिर अपना सर पीट लिया। 



" क्या होगा इस लडकी का ! राम.ही इसके रखवाले है । "


वो बुदबुदाई। इसके बाद उसने बैग से एक चॉकलेट निकाली और चारू की तरफ बडा दी।


बार देखते ही चारू चुप हो गई।  उसने झपटा मार कर बार छीन लिया और खाने लगी।


नैना हँस दी। 



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एक्टिविटी एरिया मे फोर्थ इयर का आर्ट्स बेच के वो स्टूडेंट्स जमा थे जो अगले महीने होने वाले 'गिल्मस ऑफ एंशियंट इंडिया' के डिबेट प्रतियोगिता मे हिस्सा लेने वाले थे। 


नैना , नव्या और शशांक...तीनो लोग हिस्सा ले रहे थे। और आपस मे बहस कर रहे थे । बाकी और भी सेक्शन के स्टूडेंट्स भी वहा थे। 


नैना ने संभा जी महाराज के टाईम पीरियड को नजर मे रखते हुए हिसटॉरिक कथन से शुरूआत करी। 


" ऑरंगजेब तब तक उत्तर वापस नही जा पाया जब तक शभांजी महाराज की मृत्यू नही हो गई।  अपने शासन काल का एक लंबा समय उन्होने दक्षिण मे ही बिताया। वो राज तो कर ही नही पाया। इस कारण से ये कहना की ऑरंग ने मराठा को हरा दिया..गलत होगा । "



नैना पांच से दस मिनट के अंदर अपनी थीसिस कम्प्लीट करी । उसके खत्म करते ही वहा तालियो की गड़गड़ाहट गूंज गई।  



इसके बात नव्या , शशांक,  और उनकी क्लास के और भी स्टूडेंट्स आए। 




एट लास्ट टीचर ने दस नामो की लिस्ट बनाई।  और एक पेपर हाथ मे लिए  प्रोफेसर अमर राजपूत पोडियम पर आकर खडे हो गए। 


" वेल डन स्टूडेंट्स।  अच्छा लगा कि आप सब ने पुरे जोश से इस प्रतियोगिता मे भाग लिया। कल तक फाइनल लिस्ट नोटिस बोर्ड पर लगा दी जाएगी । उसमे दस बच्चो के नाम होंगे । उन दस कॉम्पिटिर्स का आपस मे एक डिबेट कॉम्पिटिशन होगा दैन वी विल गेट फाइनल फाईव फॉर अपकमिंग  इंटर अकैडमिया कल्चरल इवेंट! बी रेडी फॉर इट । "




अमर ने कहा और इसी के साथ स्टेज से नीचे उतर गया। सभी स्टूडेंट्स अब अपने अपने दोस्तो के साथ डिस्कस करते हुए रूम से निकल गए।  



नैना जैसे ही बाहर आई उसके सामने चारू और अमोघ खडे थे। अभी वो कुछ समझ पाती की चारू आई और उसके गले से लटक गई। 


" आज तू हॉस्टल चलेगी । मुझे नही पता । नेक्स्ट वीक फ्रेशर्स है न्यू कमर्स का...! वी हैव टू प्रिपेयर फॉर डेट। ", चारू एक सांस ने बोल गई ।


तभी वहा अमर आकर उसके पीछे खडा हो गया। तभी अमोघ आगे आया और उसने  चारू की शर्ट की स्लीव पकड उसे पीछे खींच लिया। 


चारू हडबडाकर मुडी मगर उसका शू अटक गया और वो धडाम से जमीन पर गिर पडी। पर गिरते गिरते उसने  पीछे बस अभी आए अमर के पैर पकड लिए।  उसका चेहरा अमर के कमर से जरा नीचे तक के हिस्से के सामने था। 


अमर की आंखे बडी हो गई।  वही चारू ने अपने होठ दबा लिए । उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि वो अब क्या करे । उसकी धडकने इतनी तेज थी की वो उन्हे अपने कानो मे सुन सकती थी। सांस गले मे अटक गई थी। वो मानो अपनी जगह पर जम गई हो। 


हर एक सर अमर और चारू की इस अजीब सी स्थिति को देख रहा था। सब सांसे रोके खडे थे मानो अगर कोई पलके भी झपकाया तो कुछ बहुत बडा हो जाएगा। 



हर तरफ सन्नाटा छा गया था।


तभी एक हँसी छूटी । सब सब आवाज की दिशा मे घूम गए। वो शशांक था। उसकी आवाज के साथ वो बोझिल सा माहौल मानो गायब हो गया हो। और हर एक इंसान बुरी तरह हँसने लगे। 




वही चारू ने सर उठाकर अमर को देखा जो भंवे उचकाए उसे घूर रहा था।


चारू के दिमागी तार झनझना गए। और वो अगले ही पल पीठ के बल बेहोश होकर गिर गई।  




क्रमशः