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कॉरिडोर का माहौल अजीब सा हो गया था। तेजी से भागती थी चारू नव्या से टकरा गई थी। और अब नव्या जमीन पर और चारू उसके ऊपर गिरी हुई थी। आसपास से गुजरते स्टुडेंट रूक कर ये नजारा देखने लगे। कुछ अपनी हँसी रोक रहे थे तो कुछ लोग ये सोचने की कोशिश कर रहे थे कि यहां हो क्या रहा है।
नव्या पलके झपकाते हुए चारू को देख रही थी। वही चारू का मुंह हल्का सा खुल.गया था। वो आअखे फाडे उसे देखे जा रही थी।
तभी कही से एक गाना सुनाई देने लगा।
आंखो मे तेरी , अजब सी अजब सी अदाएं है !
चारू और नव्या असहज हो गए।
" तुम उठोगी या सुहागरात करके ही.मानोगी ! ", नव्या बोली और चारू को एक तरफ धकेल खुद खडी हो गई ।
चारू भी अपने आप खडी हो कर नव्या को घूरने लगी।
नव्या ने एक भवं उठा ली।
" क्या !? "
" तुम ये क्या बकवास कर रही थी ! ", चारू चिढ कर बोली।
" तुम मेरे ऊपर क्यो पडी हुई थी ? "
" मै गिर गई थी ! "
" मेरे ऊपर ही.क्यो ? "
" अरे..तुम एकदम से सामने आ गई तो मै टकरा गई तुमसे ।"
" तुम रूक भी सकती थी । "
" तुम हट भी सकती थी । "
" तुम...."
" अरे बस!!!", उन दोनो के बीच शशांक आते हुए बोला।
नव्या और चारू उसकी गुस्से वाली अवाज सुनकर छोटे बच्चो की तरह चुप हो गई।
" तुम दोनो मे अक्ल है थोडी सी! ऐसे कॉरिडोर मे लड रही हो। लड़ना है तो बाजू वाली क्लास मे जाकर लड़ो । यहा सब देख रहे है ! ", शशांक पुरी गंभीरता से बोला।
उसकी बात सुनकर दोनो लडकिया उल्लू की तरह उसका मुंह ताकने लगी।
" तुम मजाक कर रहे हो ? ", नव्या ने शांती से पूछा ।
" मै कभी मजाक नहा करता । मै बडा सीरियस बंदा हूं! "
शशांक की इस बात पर सारा कालेज रूक कर उसे देखने लगा। यहा तक की दिवार पर चढती चीटियां भी रूक गई।
नव्या ने अपना सर ना मे हिलाया । मानो कहना चाह रही हो ' इस आदमी से ऐसी ही उम्मीद थी! '
चारू ने नाक सिकोड़कर शशांक को देखा। उसकी शक्ल देख शशांक हँस दिया। और आगे बडकर चारू का सर सहलाने लगा।
उसी समय वहा नैना और अमोघ भी आ गए। नैना के चेहरे पर चिढ साफ झलक रही थी। अमोघ ने नैना का थाम रखा था। और दूसरे हाथ से उसका बैग पकडे हुए था।
वो दोनो आकर नव्या की बगल मे खडे हो गए। तीनो अमोघ और नैना को घूर कर देख रहे थे।
अमोघ ने एक भवं उठा दी।
" क्या ? "
किसी ने कोई जवाब नही दिया। तभी चारू आगे बडी और उसने नैना का हाथ अमोघ के हाथ से छुडा लिया।
" आ..मेरी बहन! इस पिल्लू के साथ मत रहा कर। ", चारू नाक भौं सिकोड़कर कर बोली।
" स्कयूज मी ! ", अमोघ ने आंखे छोटी कर ली।
" यू आर एक्स कयूज्ड! ", चारू ने मुंह बना लिया।
" आप बस जल रही है कि नैना आपसे ज्यादा मुझे समय दे रही है। ", अमोघ तिरछा मुस्कुराते हुए बोला ।
चारू चिढ गई। उसने मुंह लटकाकर नैना को देखा तो नैना ने एक नजर आमोघ पर डाली। अमोघ एक दम गंभीर हो गया।
मानो शरारती बच्चे को टीचर शरारत करते समय देख ले ।.
" वैसे तुम भाग क्यो रहा थी ? ", अचानक से नव्या बोल पडी।
सब चौंक गए।
" कौन भाग रहा था ? ", अमोघ ने सवाल किया।
" चारू ! "
" क्यो ? "
" ये ही तो जानना है । "
सारी नजरे चारू पर टिक गई। चारू ने गहरी सांस छोडी और सारी लाम कहानी उन्हे सुना दी।
एक पल के लिए वहां सन्नाटा छा गया। कोई कुछ नही बोल रहा था ।
और अचानक —
" आर यू आउट ऑफ योर माइंड ? हू किस प्रोफेसर ? !!!" ,शशांक हैरत से तेज आवाज मे बोला।
तभी अमोघ ने उसके पेट मे मुक्का जड दिया।
" धीरे बोल कमीने ! सारे कॉलेज को बताना है.क्या तुझे ! "
शशांक ने अपना पेट पकड एक जहरीली निगाह अमोघ पर डाली फिर नव्या के कंधे का सहारा लेकर खडा होगया।
नव्या ने नजरे घुमाकर उसे देखा। शांत मगर सख्त और.सर्द निगाह ! शशांक एक दम से दूर खिसक गया।
सबने एक नजर चारू को देखा और उसे थमस् अप का साइन दिखाकर खिसकने लगे। चारू उन लोगो को असमंजस मे देखती रही ।
तभी नैना बोली , " टेक केयर चारू एंड गुड मोर्निंग अमर सर ! "
इतना बोलकर नैना भाग गई। और चारू वो तो आंखे बडी किए अपनी जगह पर जम गई। उसने सर घुमाया और अमर को उसके पीछे खडे देखा।
अमर अपनी गहरी और सर्द निगाहौ से उसे ही देख रहा था। चारू ने थूक निगला और अगले ही पल भाग गई। अमर इसके लिए तैयार था। वो फुर्ती से आगे बडा और उसने चारू की कलाई पकड उसे एक खाली क्लासरूम मे ले गया।
क्रमशः