My Dear Professor - 10 in Hindi Love Stories by Vartikareena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 10

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 10

















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शाम होने को आई थी । आज का दिन काफी भारी बिता था । वो हॉस्टल से बाहर निकली और जंगल की तरफ बड गई।  उसका बंद दिवार के बीच रहने का मन नही था । आज अमोघ को उसकी नासमझी या गलती का एहसास कराया था चारू ने ! अमोघ ने उस से माफी भी मांगी थी । लेकिन वो! वो तो बस सर हिलाकर वहां से चली गई।  


वो अभी जंगल के अंदर कदम रखती की पीछे से उसे किसी ने पुकारा । वो आवाज भारी थी , गंभीर थी लेकिन उसके लिए चिंता और प्रेम से भरी थी । 

उसने गहरी सांस भरी और पलट गई । वो सामने था । 


अमोघ!


वो आगे बडा और नैना से दो कदम की दूरी पर आकर रूक गया । नैना ने पलके उठाकर उसे देखा । अमोघ के बाल बिखर कर उसके माथे पर आ रहे थे। शर्ट के ऊपर के दो बटन खुले हुए थे। एक छोर शर्ट का पेंट से बाहर निकल रहा था। बाजू को कोहनी तक मोड रखा था । नैना ने उसका ये हाल देखा तो हैरत मे पड गई।  


" ये क्या हाल बना रखा है तुमने ? ", नैना ने सवाल किया।

" कहां थी तुम? यहां क्या कर रही हो ? "

" तुमसे मतलब ! ", नैना तीखे स्वर मे बोली। 


अमोघ ने अपने टेम्पल मासज किया और अपने आप को शांत करने लगा। उसकी सांसे भारी हो रखी थी जिन्हे वो शांत कर रहा था ।


" बिना किसी को बताए यहां आ गई! पता भी है कितना परेशान थे हम सब! "


" अभी तो आई हूं ! मुश्किल से पंद्रह मिनट हुए होंगे । इतने मे क्या परेशान हो रहे हो ? " , नैना आंखे सिकोड़कर बोली । 


" पंद्रह मिनट! नैना......चार घंटे से हम सब तुम्हे ढूंढ रहे है ! अंधेरा हो गया है और तुम ये जंगल के अंदर घूम रही हो ! ",अमोघ लगभग चिल्लाते हुए बोला।


इस लडकी को इतना भी एहसास नहि कि ये कबसे बाहर है! इतना लापरवाह आखिर कोई कैसे हो सकता है ! 


अमोघ को नैना की लापरवाही पर गुस्सा आ रहा था और अब अगर नैना कुछ भी बोलती तो वो फट पडता । 


नैना पलके झपकाते हुए अमोघ को देख रही थी । उसने अपने आस पास देखा तो पाया की वो जंगल के काफी अंदर आ चुकी है और..और अंधेरा हो चुका है । लेकिन...उसे पता क्यो नही चला? नैना दिमाग पर जोर डालने लगी लेकिन उसे कुछ याद नही आ रहा था । उसके हिसाब से वो अभी ही तो आई थी और जंगल मे घूस ने ही.वाली थी की अमोघ के आने से रूक गई।  उसे कुछ समझ नही आ रहा था ।


नैना का चेहरा पसीने से तर बतर होने लगा। घबराहट उस पर हावी.होने लगी । उसकी सर दुखने लगा था । 


नैना की ये हालत देख अमोघ का गुस्सा चिंता मे बदल गया था । उसने नैना को कंधो से थामा । 


" क्या हुआ तुम्हे ? इतना कांप क्यो रही हो ? और ये पसीना कैसा ? ", अमोघ ने चिंता से सवाल किया । 


नैना ने अपनी भरी आंखो से अमोघ को देखा । उसके हाथ अमोघ की शर्ट पर कस गए थे । 


" अ..अमोघ..! मुझे..न..नही याद की मै ...जंगल...के इतना अं..दर कब आई ! म..मुझे कुछ समझ नही आ रहा ! मै! मै अभी तो आई थी। रात कब हो गई..मुझे कुछ याद नही ! ", नैना लरजती आवाज मे बोली । वो कांपने लगी थी ।


नैना की बात सुनकर अमोघ की आंखे चिंता से भर गई।  लेकिन इस समय नैना को सभांलना ज्यादा जरूरी था । उसने नैना को अपने सीने से लगा लिया और नैना सुबकती लगी । 


" कुछ नही हुआ है ! शायद तुम कुख सोच रही हो इस.लिए पता नही चला ! टेंशन मत लो ! ", वो नैना का सर सहलाते लगा। 


" न..नही अमोघ ! ये..ये पहले भी हुआ है। पता नही आज कल क्या हो रहा है ? मुझे कुछ याद ही नही.रहता । सर इतना दर्द करता है की पुछा मत ! और.नींद भी नही आती । ", नैना सुबकती हुए अमोघ की बाहो मे और ज्यादा समाते हुए बोली । 


अमोघ का दिमाग ठनक गया । कुछ तो दिक्कत थी नैना के साथ! 


अमोघ ने नैना को अपने से दूर किया और एक झटके मे उसे गोद मे उठा लिया । नैना के हाथ अमोघ के कंधो पर कस गए। उसने कुछ नही कहा । बल्कि अमोघ के सीने पर सर टिकाकर आंखे बंद कर ली ।





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एक गाडी तेजी से आकर मेघराज महल के सामने आकर रूकी। गाडी से तेजी से चारू बाहर आई और उसके पीछे पीछे शशांक भी । शशांक को अमोघ का फोन आया था कि नैना मिल गई है और वो उसे मेघराज महल लेकर जा रहा । 


सिक्योरिटी को पहले से ही अमोघ ने चारू और शशांक के आने के बारे मे बता दिया था इसलिए उन्हे किसी ने भी नही रोका। 


वो दोनो जैसे ही अंदर आए तो उन्हे सोफे पर एक महिला बैठी हुई दिखी । वो तल्लीनता से कोई किताब पढ रही थी जब नौकर ने उन्हे चारू और शशांक के आने के बारे मे बताया । उन्होने हॉल मे खडे चारू और शशांक को देखा और उठकर उनके पास आ गई।  आगे बनकर शशांक ने महिला के पैर छू लिए।.महिला ने बडे प्यार से शशांक के सर पर हाथ फेरा और उसका चेहरा हाथो मे भरकर उसका माथा चूम लिया । 


" कैसा है मेरा बच्चा ? ", महिला ने सवाल किया । 

" मै ठीक हूं आंटी । आंटी अमोघ यहा एक लडकी के साथा आया था । ", शशांक ने जल्दी से कहा ।

" हां..और. अभी वो अपने कमरे मे है । लगता है मुझे मेरी बहू मिल गई!!! ", वो खुशी से चहकते हुए बोली। 


शशांक ने ना मे गर्दन हिला दी । तभी महिला की नजर चारू पर पडी । वो सवालिया निगाह से उसे देखने लगी। उनकी नजरो को महसूस कर शशांक बोला , " आंटी ये चारू है ! उस लडकी की दोस्त ! " 


" अच्छा..मेरी बहू की दोस्त है ! ", महिला मुस्कुराते हुए बोली। 


चारू हडबढा गई। उसने आंखे फाड़कर शशांक को देखा । शशांक ने आंखो से ही शांत रहने को कहा । 





कुछ समय बाद , वो दोनो अमोघ के कमरे के सामने खडे थे । दरवाजा खुला था और वो अंदर झांक रहे थे। अभी वो दोनो देख ही रही थे की किसी ने शशांक का कंधा थपथपाया । 


" कौन है ? ", शशांक ने कंधा उचकाया और दोबारा कमरे मे झांकने लगा। अगले ही पल किसी ने उसकी बांह पकडी और घुमा दिया। 


शशांक का चेहरा अपने सामने खडी नव्या के चेहरे से एक इंच दूर आकर रूक गया । नव्या भंवे उचकाए,  शशांक की एक बांह पकडे उसे ही देख रही थी। शशांक को अपने चेहरे पर नव्या की गर्म सांसे महसूस हो रही थी। उसकी गर्दन के रोंगटे खडे हो गए थे। वो नव्यी की आंखो मे झांक रहा था जो की हल्की भूरी थी। तभी उसकी नजर नव्या के होंठो के कोने पर पडी। वहां पर एक छोटा सा तिल था जोकि बेहद करीब से देखने पर ही नजर आता था। शशांक को अपना गला सूखता हुआ महसूस हुआ।  उसने दोबारा नव्या की आंखे मे देखा...अब उसे उसकी बाई आंखे के एकदम नीचे एक तिल दिखाई दिया। शशांक को अपने अंदर अजीब सी हरकत महसूस हुई।  वो नव्या की तरफ झुकने लगा ।


नव्या को जब एहसास हुआ की उन दोनो का चेहरा बेहद करीब है और शशांक उसी की तरफ झुके जा रहा है तो उसे अपने शरीर मे सिहरन सी महसूस हुई।  उसने शशांक को देखा जो लगातार उसकी आंखो मे देख रहा था। उसका चेहरा गर्म होने लगा था । दोने का चेहरा बस छूने ही वाला था कि ...



" क्या कर रहे हो तुम दोनो ? " , चारू चिढ कर बोल पडी। 


नव्या और शशांक हडबडाकर दूर हो गए।  शशांक ने गला खंखार दिया । 


"..ये..ये तो मुझे तुम दोनो से पूछना चाहिए कि अमोघ के कमरे मे क्यो झांक रहे हो ? ", नव्या भरसक अपनी आवाज को स्थिर करती हुई बोली।


" वो हम नैना को देखने आए है ! ", और चारू ने आज जो कुछ भी हुआ नव्या को बता दिया । नव्या के भावहीन चेहरे पर हल्की सी चिंता दिखने लगी जिसे उसने अगले ही पल कठोर भाव से छुपा लिया। 



" अमोघ ! " , नव्या ने अमोघ को आवाज लगाई।  थोडी देर बाद ..परेशाना सा अमोघ बाहर आया । नव्या को देखते ही वो उसके गले लग गया। 


नव्या के हाथ हवी मे ही रह गए।  उसे महसूस हुआ की अमोघ उसे कसकर गला लगा रहा है और..और वो कांप रहा है ! 


उसने एक हाथ अमोघ की पीठ पर रखा और एक उसके सर को सहलाने लगा। 


" अमोघ! क्या हुआ? ", नव्या ने शांत लहजे मे पुछा । 


" ऐस.....! ", अमोघ लरजती आवाज मे बोला। 


नव्या की आंखे कोमल हो गई।  अमोघ उसे ऐस (ace) तभी बुलाता था जब वो हद से ज्यादा घबराया हुआ होता था। ऐसे समय पर वो बस नव्या के पास आता था। एक वो ही तो थी जो हर मुसीबत से उसे बाहर निकाल लेती थी ! उसके हर डर को खत्म कर देती थी!



इस समय अमोघ पांच साल का हो गया था और नव्या से सटा हुआ था ताकि वो उसे अंधेरे से बचा ले । 



" लड्डू ! क्या हुआ? बोल ना ! मै हू ना! " , नव्या उसका सर सहलाते हुए बोली। 


" ऐस...नैना ! नैना ! ", अमोघ टूटती आवाज मे बोला और जंगल मे हुई घटना को नव्या को बता दिया। 


" उसे..उसे कोई बिमारी है शायद ! मै रास्ते मे ही उसे डॉक्टर के पास ले गया था और उन्होने एम आर आई कराने को बोला है । नव्या...मुझे बहुत डर लग रहा है ! "



अमोघ के कहते ही चारू लडखडा गई।  शशांक ने उसे कंधे से पकडकर सभांला । 


मेरी नैना...को ऐसी कोई दिक्कत थी और उसे पता तक नही ! कैसा दोस्त है वो ! 





क्रमशः


इस भाग मे इतना ही मिलते है अगले भाग के साथ । 


नेक्स्ट पार्ट = 10 कमेंट