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मै हैरान थी और आंखे बडी करके अपने नीचे गिरा इंसान को देखे जा रही थी । मेरी धडकने बेकाबू हो गई थी । मै तेज तेज सांसे लेने लगी थी और लगातार पलके झपका रही थी ।
" मिस चारु ! क्या आप उठेगी या ऐसे ही पडे रहने का इरादा है ! ", आदमी ने कहा ।
मै हडबडा गई। और झटके से उठकर खडी हो गई। मेरे खडे होते ही वो भी खडा हो गया । उसने अपने कपडे झंडे और फिर.मुझे घूर कर देखा ।
मै नजरे इधर उधर करते हुए बोली , " सॉरी अमर सर ! "
" आप कॉरिडोर मे बेध्यानी ने चली जा रही है । कहा ध्यान है आपका ? इतनी केयर लेस मिस चारू आप कैसे हो सकती है ! ", वो मुझे डांटते हुए बोला ।
तभी नैना आगे आई और बोली , " सर वो मुझे कुछ बता रही थी तो सामने नही देख पाई । लेकिन आप तो देख सकते थे ना ! आप क्यो टकरा गए चारू से ? "
नैना की बात सुनकर अमर थोडा सकपका गया । मैने एक नजर उन्हे देखा फिर सर ना मे हिलाकर मुस्कुरा दी । वही अमर ने मुझे मुस्कुराते देख लिया था तो अब वो.मुझे और नैना , हम दोनो को ही घूरने लगा ।
हम दोनो मंद मंद मुस्कुराने लगी । अमर हमे फटकारते हुए तेज आवाज मे बोला, " बहुत मुस्कुरा रही है आप दोनो ! अब ये अनाउंसमेंट आप दोनो करेगी अपने सेक्सन और अपने डिपार्टमेंट कि हर क्लास मे । "
इसी के साथ अमर ने मेरा हाथ पकडा और उसपर एक पेपर रख कर चला गया । मै अपनी जगह पर जम गई थी । मेरी सांसे धीमे चलने लगी थी और मै जड होकर अपने हाथ को देखे जा रही थी जिसे अभी अभी अमर सर ने पकडा था । ऐसा लग रहा था कि हवाएं भी हमारे साथ झूम रही थी और प्रेमी के पहले स्पर्श के आनंद को महसूस कर रही थी । मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा समय.रूक गया है और.मै अभी भी उस पल मे हूं जिसमे अमर सर मे मुझे छुआ था ।
तभी नैना ने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मेरे हाथ से पेपर लेकर पढ़ने लगी । जैसे जैसे वो.पेपर पढ़ रही थी वैसे वैसे उसकी पकड मेरे कंधे पर कसती जा रही थी । वो मेरी तरफ मुडी और मुंह बना कर बोली , " यार अब ये क्या स्यापा है ! "
" क्या हो गया ? ", मैने आंखे सिकोड़कर नैना को देखा फिर उसके हाथ से पेपर ले लिया ।
पेपर पढ़ते ही मेरे मुंह.से स्वतः ही निकाला , " ओह गॉड ! इसे भी अभी होना था । हमारे सेमेस्टर इक्जाम आने वाले है और ये उस से पहले ऑर्गनाइज किया जा रहा है । ये युनिवर्सिटी वाले पागल हो गए है ! "
" चल यार क्या कर सकते है ! अभी इसे डिपार्टमेंट कि हर क्लास मे अनाउंस भी करना है । " , नैना थके स्वर बोली ।
" हम्म ! " ,मैने कहा और आगे बड गई।
अगले पंद्रह मिनट बाद हम अपनी क्लास मे आ चुके थे । हम सभी स्टूडेंट्स के क्लास मे आ जाने का इंतजार कर रहे थे । जैसे ही सब आ गए। मैने डस्टर उठाकर टेबल पर मारना शुरू कर दिया । आवाज सुनकर पुरी क्लास का ध्यान मेरी तरफ आ गया था ।
" चारू आर यू गोन मैड ! ये डस्टर क्यो बजा रही हो ? ", थर्ड रो कि स्टार्टिंग सीट पर बैठी एक लडकी बोली । उसने क्रिम कलर का स्वेटर ब्राउन पेंट पर पहना था । उसके बाल कंधे से थोडा ही नीचे तक के थे । वो पीछे होकर सीट से टिक कर बैठी थी और उसने अपनी राईट कोहनी मोडकर पीछे वाली बेंच पर रख रखी थी । उसका चेहरा छोटा और गोल था । आंखे मध्यम आकार की जिनपर हल्की पलके थी । वो अपने मुंह मे कैंडी लिए मेरी तरफ एक टक देखे जा रही थी ।
मैने उसे देखा और ना मे गर्दन हिला दी । फिर थोडी तेज आवाज मे बोली , " नव्या ! आई हेव टु मेक एन अनाउंसमेंट, सो आई वांट ऑल द अटेंशन ऑफ क्लास । "
मेरी बात सुनते ही सारी क्लास खुसुर-पुसुर करने लगी । नव्या ने आंखे सिकोड़कर मुझे देखा और बोली , " वॉट अनाउंसमेंट? "
" तुम भी सुनो और बाकि सब भी । आज से एक महीने बाद एक कॉम्पिटिशन होने वाला है जिसका नाम है ' गलिमस ऑफ एंशियंट इंडिया ' । इसमे हमे भारत के पौराणिक इतिहास की कोई भी एक घटना को चूज करना है और उसपर एक प्रेजेंटेशन रेडी करनी है । साथ ही उस टॉपिक से रिलेटेड पॉलिटिकल हिस्ट्री के बारे मे भी हमे बताना है । पुरी क्लास मे से बेस्ट पांच स्टुडेंट पीक किए जाएंगे और उनको फिर रेडी होना होगा दूसरे यूनिवर्सिटीज के साथ कम्पिट करने के लिए। "
मै अब चुप हो गई थी । सारी क्लास मुझे ही देख रही थी । सब शांत थे लेकिन अगले ही पल एक लडका अपनी सीट पर से उठा और थोडा तेज आवाज मे बोला , " बट वी हैं इक्जाम नेक्स्ट मंथ ! "
मैने उसे देखा और अपने कंधे उचका कर बोली , " इसमे मै कुछ नही कर सकती ! मुझे तो बस तुम सबको बताने को कहा था अमर सर ने । "
" लेकिन तुम सी आर हो ! जस्ट टॉक टू अमर सर । ", वही लडका बोला ।
" शशांक ! तुम कॉम्पिटिशन डर क्यो रहे हो ! यू ऑर केपेबल टू कम इन टॉप फाईव । ", नैना शशांक कि तरफ मुडकर बोली ।
वो लडका यानी शशांक ने नैना को घूर कर देखा । नैना हँसने लगी ।
तभी नव्या अपनी सीट पर से उठी और मेरी तरफ उंगली करके बोली , " तुम सर को मना भी कर सकती थी । उनसे बात क्यो नही की ? तुम खुद चाहती हो ना कि हम.सब कॉम्पिटिशन मे उलझे रहे और तुम इक्जाम मे टॉप कर जोओ । हाओ चीप चारू श्रीवास्तव! "
कहते कहते नव्या ने अपने हाथ बांध लिए। उसकी बात सुनकर सारी क्लास मेरी तरफ देखने लगी । वो कुछ बोले नही पर उनके चेहरे देख कर पता चल रहा था कि वो नव्या की बात से सहमत है ।
सब के सब भेड बकरी है! जिधर हांक दो उधर ही चले जाते है । मै मुस्कुराई और बोली , " पहली बात ! मै इस प्रतियोगिता मे इंट्रेस्टिंग नही हूं । आई एम फॉक्सिंग आन माई बास्केटबॉल मैच ! सो नॉट लॉकिंग फारवर्ड टू कम्पिट । बाकि प्रजेंटेशन तो देनी ही है सबको । रही बात इक्जाम कि तो ना पहले मै टॉप करने के लिए पढ़ती थी और ना ही अब ! मै बस स्टैंडर्ड मेंटेन कर रही हूं सबके लिए। बाकि अभी मुझे जुनियर्स को भी बताना है तो चलती हूं । कैट फाईव किसी और दिन करेंगे नव्या । यू हैं फन नाओ ! "
इतना बोलकर मै चली गई। मेरे निकलने तक भी मुझे क्लास मे हूटिंग सुनाई दे रही थी और निकलने के बाद भी । मेरी जिंदगी का एक ही.रूल है । या तो किसी से उलझो मत और अगर उलझो तो एक ही बार मे कंवरसेशन को जीत लो ! और ऐसे जीतो कि सामने वाला तड़पने के अलावा कुछ ना कर सके !
क्रमशः
इस भाग मे इतना ही मिलते है अगले भाग के साथ । कमेंट कर दे ।