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सुबह का समय था और सभी बच्चे वाई एच यूनिवर्सिटी मे जा रहे थे । अच्छा खासा बच्चो की आवाजे युनि मे सुनाई दी जा सकती थी । तभी एक बाइक आकर युनि के दरवाजे के सामने आकर रूकी । कुछ बच्चो का ध्यान बाईक सवार की तरफ चला गया । बाईक कोई नोर्मल बाईक नही थी वो रेसिंग बाईक थी । उसका रंग काले रंग का था और उसपर पीले रंग से कुछ धारियां बनी थी । जिससे लगता था की बाईक के किनारे पर सोना गडा हो ।
बाईक के साथ लडकिया बाईक सवार को भी देखे जा रही थी क्योंकि वो था ही देखने लायक । बाईक सवार ने वाइट शर्ट और ब्लैक पेंट पहन रखी थी । उसका शरीर गठिला था तो शर्ट भी उसके बदन पस कसी हुई थी । तभी बाईक सवार ने हेल्मेट उतारा और लडकिया आहे भरने लगी ।
वो अमोघ था ! हेल्मेट उतारते ही उसने अपने बालो मे हाथ फेरा और सर को एक झटका दिया । उसके बाल बिखर गए और माथे पर आने लगे ।
वो उतरा और अंगडाई भरते हुए आगे बढा । उसने एक कंधे पर अपना बैग टांग रखा था । उसकी चाल मे कुछ ऐसा था की सब उसकी तरफ आकर्षित हो रहे थे । लेकिन अमोघ! वो तो नाक की सीद मे चला हुआ था । उसपर किसी का भी प्रभाव नही पडता था । उसपर बस एक ही व्यक्ति अपना प्रभाव डाल सकती थी और वो थी नैना !
नैना के लिए वो किसी भी हद तक जा सकता था । युनि आते ही वो हमेशा नैना को ढुंढा करता था लेकिन आज कुछ बात अलग थी ।
आज वो नैना को नही ब्लकि नव्या को खोज रहा था । वो रोज नव्या को गले लगाकर युनि आया करता था । पर आज वो उसके उठने से पहले ही जा चुकी थी ।
उसने जेब से फोन निकाला और नव्या को कॉल लगा दिया । रिंग जाती रही पर नव्या ने फोन नही उठाया ।
अमोघ अब खीज गया था । सुबह से ना जाने कितने कॉल्स मिला चुका था वो नव्या को , लेकिन नव्या...वो तो उठाने का नाम ही नही ले रही थी ।
" तुम मिल जाओ नव्या ! फिर बताता हू मुझे इग्नोर करने की क्या सजा होती है । ", अमोघ ने गुस्से से फोन को घूरते हुए कहा जिसपर नव्या का नंबर खुला था ।
वो अब कॉरिडोर मे चल रहा था जब एक रूम से होकर गुजरा और ठिठक कर रूक गया । उसने पलट कर रूम को देखा जिसका दरवाजा बंद था लेकिन अंदर से कुछ आवाज आ रहा थी । और जिसकी आवाज आ रही थी उसे अमोघ बडे अच्छे से जानता था ।
उसका चेहरा सख्त हो गया था और गुस्से से उसके सर की नसें तेजी से फडकने लगी थी । उसने अपना बैग वही दिवार के पास रखा और अपनी शर्ट की शीलिवज मोडकर कोहनी तक करने लगा ।
फिर उसने दरवाजे को देखा और अगले ही पल ...
धाड़!!!!!!
आवाज हुई और अमोघ कमरे मे आ गया । उसका चेहरा गुस्से से तमतमा रहा था । और सामने का दृश्य देखने के बाद तो अब उसकी सांसे तक गहरी होने लगी थी ।
सामने शशांक खडा था जिसने पीछे से नव्या को बाहो मे भर रखा था और नव्या लगातार उसे खुद से दूर कर रही थी लेकिन वो नही मान रहा था । उसने अपना मुंह नव्या के बालो मे डाल दिया तो वो चिल्ला दी ।
ये देख कर अमोघ का खून खोलने लगा । और उससे भी ज्यादा उसे गुस्सा आ रहा था वहा पर खडी चारू और नैना पर जो बस शशांक को रूकने को कह रही थी लेकिन कर कुछ नही रही थी ।
अमोघ बिजली की तेजी से आगे आया और उसने एक झटके मे शशांक को नव्या से अलग कर दिया । शशांक इसके लिए तैयार नही था तो वो लडखडा गया । अमोघ ने नव्या को देखा जिसके बाल बिखरे हुए थे और आखे लाल ! गालो पर आसूओ के निशान थे । ये देख कर अमोघ का जी चाहा की अभी इस शशांक को चीर फाड़कर रख दे । उसने नव्या को अपने पीछे किया और शशांक की तरफ बडा । शशांक भी अब तक सभंल गया था । वो सीधा खडा होकर लापरवाही से अमोघ को देख रहा था । मानो उसे अमोघ के गुस्से से कोई फर्क ही ना पडता हो ।
" हे ब्रो...चिल ! ऐसा भी कुछ नही हुआ है जो तुम इतना गुस्से मे दिख रहे हो । ", शशांक लापरवाही से बोला ।
उसकी बात सुनकर अमोघ ने शशांक का गला पकड लिया और दांत पीसते हुए बोला, "कुछ नही हुआ है ! यहा तू मेरी बहन को उसकी इच्छा के विरूध उसे छू रहा है और मै चिल करू! साले...ये तो पता था कि तू कमीनी है लेकिन इतना गिर जाए गा ये नही पता था । "
शशांक का चेहरा लाल पड गया था लेकिन अमोघ की बात सुनकर वो मुस्कुरा दिया । उसने अमोघ की कलाई पकड ली और बोला, " आई लव हर ! हां..मुझे नही छूना चाहिए था पर प्यार करता हूं मै नव्या से और इस नाते हक है मेरा उसके करीब जाना चाहे वो ना भी क्यो ना कहे । "
ये सुनकर अमोघ दिमाग और खराब हो गया और उसने शशांक को उठाकर पास ही.मे रखी बेंच पर दे मारा । शशांक ने आंखे बंद कर ली । चारू की आंखे बडी हो गई थी और नैना ने घबराकर अपने मुंह पर हाथ रख लिए थे । वही नव्या बिल्कुल शांत खडी थी ।
अमोघ ने शशांक के गले पर अपनी पकड कसते हुए कहा , " प्यार करता है तू उससे ! इसलिए उसे छू सकता है । किसने कहा तुझसे ये ! अगर नव्या तेली बीवी भी होती ना और.वो.तब भी तुझे ना कहती तो तुझे कोई हक नही जो उसकी मर्जी के बिना उसके पास जाए । एक ना समझ मे नही आती । नो मीनस नो ! पता है ना । साले ! हरामी! तेली जात ही ऐसी है । तेरा बाप भी तो ऐसा ही था । खून अपना रंग तो दिखाएगा ही ! "
अचानक शशांक फुर्ती से उठा और घूम गया । अब.वो.अमोघ की पकड से आजाद था । उसने एक जोरदार मुक्का अमोघ के मुंह.पर दे मारा । अमोघ पीछे की तरफ लडखडा गया । लेकिन वो सभंल पाता उस से पहले शशांक तेजी से उसकी तरफ आया और घुमाकर एक लात उसके पेट मे दे मारी । अमोघ झुक गया तो शशांक ने उसके कंधे पकडे और अपना घटना अमोघ के मुंह पर दे मारा.। अमोघ खाते हुए नीचे बैठ गया । उसके मुंह से खून निकलने लगा ।
" तेरी हिम्मत कैसे.हुई मेरे बाप के बारे कुछ.भी.बोलने की ! तू है कौन ? और क्या जानता है.मेरे बाप के बारे मे ! बस.वही.सुनी सुनाई बाते जो मेघराज मे फैली.हुई है । और तू क्या मुझे लडकी की ना के बारे मे बता रहा.है जब तू खुद नैना की ना को कसिंडर नही.करता । तब कहा तेरा ये नो मीन्स नो वाला स्लोगन चला जाता है ! एक नजर देख नैना को और सोच क्या तू उसके साथ सही कर रहा है । अपनी बहन के लिए तो बडी जल्दी भडक गया और उसकी इच्छा के बारे बताने लगा ! पर क्या तू खूद नैना की इच्छा का मान रखता है ! "
इतना कहकर शशांक बेंच पर बैठ गया और अप उ बालो मे हाथ डाल कर उन्हे बिखेरने लगा । जमीन पर बैठे अमोघ ने एक नजर नैना को देखा जिसने अपना सर झुकाकर रखा था । अमोघ का दिल ग्लानि से भर उठा । आज जब उसकी खुद की बहन की बात आई तो वो इतना ज्ञानी बन रहा था और इतना गुस्से मे था कि शशांक को ना जाने क्या क्या बोल गया था । लेकिन वही सेम चीज वो खूद नैना के साथ कर रहा था । उसे तो मर जाना चाहिए! आज अमोघ को अपनी गलती का एहसास हुआ था और वो अब खुद को नैना से.नजर मिलाने के काबिल.भी नही हमझ पा रहा था । उसने ग्लानी से आंखे कसकर बंद कर ली । तभी एक हाथ उसके कंधे पर आया ।
अमोघ ने सर उठाकर देखा तो चारू खडी थी । चारू उसके पास जमीन पर बैठ गई । और उसके कंधे पर टक्कर मारते हुए बोली , " राजवंशी'ज ब्रदर ! तुम्हे अपनी गलती का एहसास हो इसीलिए हम लोगो ने ये ड्रामा किया । "
चारू की बात सुन अमोघ चौक गया । वो अब बारी बारी से चारो को देखने लगा ।
क्रमशः