: : प्रकरण - 38 :
दो और बडे प्रोडक्शन हाउस की बोलबाला थी जिन्होंने फिल्मों नई दिशा प्रदान की थी, जो थी
राजश्री प्रोडक्शन और प्रसाद प्रोडक्शन!
राजश्री को ताराचंद बड़जात्या ने स्थापित किया था. उन्होंने अपने बैनर तले ' आरती ' फ़िल्म का निर्माण किया था. बाद में एक से बढ़कर एक फ़िल्म बनाई थी. उन के साथ उन के तीन बेटे भी जुड़े थे.
कमल, राज कुमार और अजित बड़जात्या.
सालो तक उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिये राज किया था.
' आरती ' की कथा एक गुजराती नाटक पर आधारित थी.
उस के बाद उन्होंने ' दोस्ती ' फ़िल्म का निर्माण किया था. उस में एक अंधे लड़के और लुले लडके की दर्दनाक कहानी थी. फिल्मों के हर एक गीत ने धूम मचाई थी.
चाहूंगा मैं तुझे शाम सवेरे
फिर भी कभी तेरे नाम को
आवाज मैं ना दूंगा... (2)
दर्द भी तु चैन भी तु
दर्शन भी तु नैन भी तु
इस गीत को फ़िल्म फेर एवर्ड्स से नवाजित किया गया था.
फिर तो फिल्मे बनाने का उन का लंबा सिलसिला जारी हुआ था.
उस के बाद तकदीर फ़िल्म बनाई थी.
फिर ' दुल्हन वही जो पिया मन भाये '
' मैंने प्यार किया ' फ़िल्म बनी जिस में पोता सूरज बड़जात्या भी जुड़ गया. उस ने भी नये अंदाज से फिल्मे बनाना चालू रखा..
चितचोर, जीवन मृत्यु, हम आप के हैं कौन, इत्यादि इत्यादि....
उसी तरह उसी तरह एल वी प्रसाद ने अपने' प्रसाद प्रोडक्शन ' के बैनर तले, ' शारदा, छोटी बहन, ससुराल, हमराही, बेटी बेटे, मिलन के अलावा कई फिल्मे निर्माण की थी.
पहली हीं फ़िल्म शारदा के लिये उन्होंने ने जबरदस्त कहानी चुनी थी.
फ़िल्म में हिरो जिस लड़की को प्यार करती हैं, वही उस के घर में मा बनकर आती हैं. उस के पिता हीं बेटे की प्रेयसी से शादी कर के घर लाते हैं. इस स्थिति में वह उसे मा नहीं कह सकता था.
एक बार वह मंदिर के पास अन्य भिखारी के बीच बैठा होता है. उस वक़्त उस की मा दर्शन को आती है. उस वक़्त उस का पैर गलती से हिरो के हाथ पर पड़ता हैं और वह मा कहकर जोर से चिल्लाता हैं.
फ़िल्म का यह कितना अदभुत अंत था.
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एक और हस्ति ने फ़िल्म इंडस्ट्रीज में ' कांच की गुड़िया' फ़िल्म से पैर रखा था, जिस का नाम मनोज कुमार था. उस के सामने हीरोइन थी शयदा खान.
उस के बाद उन्होंने ने बहुत फिल्मों में काम किया था : हरियाली और रास्ता, हिमालय की गोद में, वह कौन थी? गुमनाम, साजन, अनिता.
वह एक सर्जक थे. वह देश भक्ति में ज्यादा रूचि रखते थे. उन्होंने फ़िल्म शहीद में रोल किया था.
बाद में उन्होंने ने खुद अपने ' विशाल इंटरनेशनल' के बैनर तले फिल्मे बनाना शुरू किया.
उन्होंने ने सब से पहले ' जय जवान जय किसान ' के लाल बहादुर शास्त्री के नारे को लेकर ' उपकार' फ़िल्म बनाई थी जो सुपर हिट साबित हुई थी. इस फ़िल्म में अभिनेता प्राण ने मलंग चाचा की भूमिका निभाकर चार चांद लगा दिये थे जिन्होंने ने अब तक खल नायक की भूमिका निभाई थी.
उस के बाद ' पुरब और पश्चिम बनाई थी, जिस में सायरा बानू ने एक विदेशी लड़की का रोल निभाया था. उसे भारतीय संस्कृति की याद दिलाने फ़िल्म में एक गीत रखा गया था.
' कोई शर्त होती नहीं प्यार में
मगर प्यार शर्तो पे तुमने किया
नजर में सितारे जो चमके जरा
बुझाने लगी आरती का दिया
ज़ब अपनी नजर में गिरने लगो
अंधेरे में अपने हीं घिरने लगो
तब तुम मेरी पास आना प्रिये
मेरा दर खुला हैं तुम्हारे लिये
उन के जीवन की एक खास बात थी. उन का एक सपना था. धुरंधर अभिनेता दिलीप कुमार के साथ काम करने का जो ' आदमी' फ़िल्म ने साकार किया था. इतना हीं आगे जाकर उन्हो ने ' क्रांति' फ़िल्म में दोबारा काम किया था. जो देश भक्ति की कहानी थी.
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एक बार मैं दादर स्टेशन का ओवर हेड ब्रिज चढ़कर ईस्ट में जा रहा था. उस वक़्त दोनों बाजु कई लोग अपनी चीज वस्तु का धंधा कर रहे थे.
उस में एक लड़की थी जो मुस्लिम बिरादरी की थी. वह भी अपना पेन, पेन्सिल, नोट बुक इत्यादि चीजों का धंधा करना चाहती थी. लेकिन क़ानून के रखवाले उस की राह में बाधा डाल रहे थे. उसे रोक रहे थे. इस बात को लेकर लड़की भी अड़ गई थी.
पुलिस हवालदार ने उसे बैठने से मना कर दिया तो लड़की ने सहज पूछा.
" यह सब लोग यहाँ बैठकर धंधा करते हैं तो फिर मैं क्यों नहीं? "
" उस की बात अलग हैं! "
" क्यों अलग है? कया वह तुम्हे हप्ता देते है?? "
" इतना कुछ जानती, समझती हो फिर क्यों सवाल करते हो? "
" मै तुम्हे एके पैसा भी नहीं दूंगी. "
"तो फिर इधर नहीं बैठने का. "
" क्या स्टेशन तुम्हारे बाप दादा की जागीर है? "
उसी वजह मै वहाँ से गुजर रहा था.
मेरे कानो पर उस के शब्द पड़े थे और मेरे कदम रुक गये थे.
यह देखकर पुलिस ने कुछ जवाब नहीं दिया था.
वह तीन पुलिस थे, उस में से एक को उस लड़की पर तरस आया था.
" जाने दो ना यार. लड़की नई हैं. अभी धंधा शुरू करने जा रही है. उस के पास पैसे कहाँ से होंगे. उस को धंधा लगाने दो, बाद में हिसाब करेंगे. "
और लड़की ने धंधा शुरू कर दिया था.
वह तीसरे पुलिस को उस के साथ कुछ लगाव हो गया था. वह उस को ना बताते हुए लड़की का हप्ता अपनी जेब से उन दोनों को दे देता था.
उस लड़की का नाम शकीला था.
पहले उसे मालूम नहीं था. बाद में उसे पता चला था. वह उसे चाहता था. उस बात का भी उसे पता चला था. वह भी उस की तरफ खींचने लगी थी.
एक दिन उस पुलिस ने जो खुद शकीला की बिरादरी से था उस ने प्रपोज़ किया था.
" क्या तुम मेरे साथ शादी करोंगी? "
और शकीला ने तुरंत उस का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया था.
वह दोनों पुलिस की नियत ख़राब थी. वह उसे अपनी हवस का शिकार बनाना चाहते थे लेकिन उस की शादी हो रही थी. तो वह मजबूर, विवश हो गये थे.
फिर भी उन दोनों ने मुस्लिम रीति रिवाज़ से निकाह कर लिया.
उस का हनीमून होना था तब दोस्तों ने पार्टी मांगी थी और?
00000000000 ( क्रमशः)