hindi Best Short Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • करवाचौथ की शॉपिंग

    सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धू...

  • मुकम्मल

    पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म...

  • चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं

    चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स...

आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 2 By Ankit Khatri

सुबह के सात बजे थे।अलार्म की आवाज सुनते ही आरव की आंख खुल गई।कुछ पल तक वह छत को देखता रहा। फिर अचानक उसे याद आया—आज उसकी नई नौकरी का पहला दिन था।वह तुरंत बिस्तर से उठा।कल तक जिस नौ...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ"...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari Deeptansh

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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आप ऊपर ही बिराजिये By Neelam Kulshreshtha

[    नीलम कुलश्रेष्ठ    ]              ये कार्यालय आम सरकारी  कार्यालय  जैसा है। कौन  से प्रदेश का ? और कौन &n...

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बाबूजी की विपरीत सीख By Deepak sharma

               जीजी की शादी के बाद जीजी से ज़्यादा बदलाव बाबूजी में आया।                कहां तो वह ज...

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तुम हो तो सब कुछ है - भाग 2 By Ankit Khatri

सुबह के सात बजे थे।अलार्म की आवाज सुनते ही आरव की आंख खुल गई।कुछ पल तक वह छत को देखता रहा। फिर अचानक उसे याद आया—आज उसकी नई नौकरी का पहला दिन था।वह तुरंत बिस्तर से उठा।कल तक जिस नौ...

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करवाचौथ की शॉपिंग By Vandna Sharma

सिया बालकनी में खड़ी होकर अपने पति को ऑफिस जाते हुए देख रही थी। सुबह की हल्की धूप उसके चेहरे पर पड़ रही थी। उसने हाथ हिलाकर मुस्कुराते हुए बाय कहा। तभी साथ वाले फ्लैट की पड़ोसन अपन...

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अलमारी By Vandna Sharma

सुबह के साढ़े सात बजे थे। रीना ने अदरक वाली चाय बनाकर रवि को थमाई और बहुत हिम्मत जुटाकर बोली, "सुनो, मुझे एक छोटी सी अलमारी चाहिए। मेरा कॉस्मेटिक का सामान, क्रीम-पाउडर, पर्स सब बेड...

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ड्राफ्ट में अटकी एक कहानी By Swagata Chakraborty

शिल्पा प्रतिलिपि पर लिखती थी। एक छोटी सी राइटर, पर शब्दों से बड़ी दुनिया बुनती थी।एक दिन उसके मन में आया, क्यों न प्रतिलिपि के साथ-साथ अपनी कहानियाँ और भी कहीं ले जाऊँ? बस फिर क्या...

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पता बताते दिन By महेश रौतेला

पता बताते दिन:नैनीताल को देखकर एक अद्भुत अनुभूति मन में उत्पन होती है।एक विदेशी ने हाल में ही कहा है," मैंने इतनी सुन्दर जगह और नहीं देखी है यदि यहाँ की कचरे पर ध्यान न दिया जाय।" ...

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मुकम्मल By Shivam Dhuriya

पंद्रह साल पहले बिछड़े राघव और अवनी की कहानी, जिसे वक्त और परिस्थितियां कभी खत्म नहीं कर पाईं। एक पुरानी नीली चूड़ी अचानक दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा करती है और उन्हें एहसास हो...

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किनारा By Rajeev kumar

    जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी...

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मेरी जिंदगी का सफर 10 By Ankit Khatri

      आज मैं जहाँ हूँ… और आगे की उम्मीद हर सफर की एक शुरुआत होती है।कुछ रास्ते आसान होते हैं और कुछ रास्ते ऐसे होते हैं, जिन पर चलते हुए इंसान कई बार खुद से ही पूछता है—“मैं आखिर ज...

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बुंदकी की छींट By Deepak sharma

                 “दो रोटी आज कम क्यों खायी?”    अम्मा ने पूछा।              &n...

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चेतना By Rajeev kumar

  किसी का मन मसोस कर रह जाना किसी के लिए बड़ी ही प्रसन्नता की बात होती है। किसी का हार जाना, न जाने क्यों जलने वालों को जीत की अनुभूति करवा देता है। क्यों किसी का कुछ बिगड़ जाना, किस...

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एहसास By Rajeev kumar

  पहले तो गुजाराभत्ता के नाम पर अड़ी रही सुहानी। मनोज अपने सामर्थ्य को देखते हुए इतनी बड़ी रकम के लिए हामी भरी थी। सुहानी और बेटी काव्या के भविष्य को लेकर चिंतीत थी और वो इस बात को ल...

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देश की शान-सेना का जवान By Piyush Goel

एक गाँव में रामसेवक नाम का किसान रहता था,बड़ा ही मेहनती, अपने परिवार में माता पिता की सेवा और अपनी खेती पर पूरा ध्यान, अपने माँ बाप के इकलौते बेटे थे।रामसेवक हमेशा यही सोचते रहते थ...

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टके कोस By Deepak sharma

                  “मलकिन आप को उधर बुला रही हैं,” किशोरीलाल मेरे कमरे में आन खड़ा हुआ।          &n...

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चुगली By Rajeev kumar

      शनैः शनैः गतिरोध बढ़ता जा रहा था। गतिरोध तन का नहीं, बल्कि गतिरोध मन का बढ़ता जा रहा था। वो तो शिथील सी चाल से चल रहा था लेकिन उसकी इच्छाएं मानो विमान पर सवार हो। शारिरिक परेशा...

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एक माँ का संकल्प By Piyush Goel

M एक माँ का संकल्प मेरा एक मित्र,जिसका नाम कपिल हैं,और मेरे घर से खिची दूरी पर किरायें के मकान में रहते हैं।आजकल एक खेल समाज में बड़ी तेजी से अपनी जगह बना रहा हैं, उस खेल का नाम है...

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बाबूजी की हिचकी By Deepak sharma

                  बाबूजी बिस्तर पर लेटे हुए थे। मुझे देखते ही उठ कर बैठ लिए।                &nb...

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चाँद, सितारा, अँधेरी रात और मैं By Shivam Dhuriya

चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे।
यह कोई तन्हाई नहीं,...

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घुमक्कड़ By Rajeev kumar

घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धी...

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ख़ुशी By Piyush Goel

सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का...

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रिकवरी एजेंट By Rajeev kumar

    अफरातफरी मचते ही लोग सिर पर पाँव रख कर भागे। लोगों के कदमों की तेज ध्वनी गुंजायमान थी। कम्पन ऐसा हो रहा था मानो धरती काँप रही हो। कदमों को कहाँ मालूम था कि कुचला जाने वाला आदमी...

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इन्तजार By Rajeev kumar

. वार्डन ने आकर कहा ’’ मिलने का समय अब सामप्त हुआ। ’’ तो दोनों वार्डन की बात पर भौचक्के भी हुए और गुस्साए भी। कहने के लिए तो बहुत कुछ बचा था, मगर क्या कर सकते थे, वार्डन ठहरा सरकार...

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नाम बदलाई By Deepak sharma

                   उन्हें अपना पहला नाम, हीरालाल, 15 मार्च 1909 को मिला था। जब वह लाला मगनलाल  के घर पैदा हुए थे।   &nbs...

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सच By Rajeev kumar

  सच सच जानना था, सो चुपचाप हो गया। पता है, चुप होकर किसी के अन्दर से सच निकालने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। दरअसल ऐसी आग लगा दी थी, साँप-छुछुंदर वाला हाल हो गया था, न निगलते...

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कथनी और करनी By Vandna Sharma

कहानी - कथनी और करनीरोहित बहुत ही धार्मिक व्यक्ति था। सबकी सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता। मोहल्ले में उसकी गिनती एक अच्छे बेटे और अच्छे भाई के रूप में होती थी, पर वह एक अच्छा पति...

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प्यार की साज़िश By Bihari Lal Chouhan

प्यार की जोखिमएक रोमांटिक-सस्पेंस फिल्म की कहानीशैली: Romance | Suspense | Drama | Action | Emotionअनुमानित अवधि: लगभग 60 मिनटमुख्य पात्र:आरव — 29 वर्ष, तेज-तर्रार, ईमानदार लेकिन ज...

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माटी से मुकाम तक By Bihari Lal Chouhan

माटी से मुकाम तकबिहारी और सुमति की प्रेम कहानीबरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पित...

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पूर्णिमा का नशा By Manoj yadav

वो पूर्णिमा की रात थी। चाँद कुछ ज़्यादा ही पास लग रहा था। आसमान भी बिल्कुल साफ़ था—जैसे किसी ने उसको धोकर रख दिया हो। मैं बालकनी में बैठा था न जाने कितनी देर से। उसकी "हाँ"...

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जल-समाधि By Virendra Dewangan

‘‘ओय अम्मा...ओय काकी...ओय दीदी...ओय मामी...! जरा घूंघट तो उठाओ!! कैमरे में आपलोगों का चेहरा सही से नहीं आ रहा है। कैमरे में चेहरा नहीं आएगा, तो तुम्हें कौन पहचानेगा? तुम्हारा दर्द...

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मेहनत By Rajeev kumar

  घर वापसी का तो मन बना ही लिया था। अब तो जाना लगभग तय ही था। काम भी नहीं और रूपया भी खत्म।बिना रूपया का तो एक दिन भी गुजारा करना संभव है। यह बात तो कई लोगों ने समझायी थी।पिता ने भ...

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बरबस By Deepak sharma

                  इस बीती का पूर्वापर संबंध हम बहन- भाई के बचपन से है।                बीती को ट...

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सादगी By Rajeev kumar

    उसको ऐसा लगा था कि बात बहुत लम्बी चलेगी, दुर तक जाएगी, अपना ज्ञान बघारूंगा, इधर-उधर की कुछ बातें करूंगा। सच और झुठ मिश्रीत बातों का प्रयोग करके , इसकी बोलती बंद रखुंगा और सामने...

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दो शहर एक सपना By Bihari Lal Chouhan

दो शहर एक सपनारायगढ़ की लाल मिट्टी से निकला था रघु। उसके हाथों में फावड़ा था और आँखों में एक सपना - अपना एक पक्का मकान। रायगढ़ में काम था पर पैसा कम। किसी ने बताया - "मंदसौर चला जा...

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सजा.....बिना कसूर की - 13 By Soni shakya

बहन जी मुझे क्या एतराज है पर आपको यह सब पहले बता देना चाहिए था ??और फिर भूमि को स्वीकार करने का निर्णय तो आकाश का है इसमें हम क्या कर सकते हैं ??सरल बोली --मै आपकी बात समझती  हूं ब...

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बचपन By Rajeev kumar

रंग-बिरंगी तीतलियों ने दिवाना बना रखा था। मनमोहक रंगों की आकर्षक तीतलियों के पीछे बच्चे पागल हुए जा रहे थे। बच्चे तो बच्चे हैं, इतनी सारी तीतलियों के पीछे न लग कर एक ही तीतली के पी...

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वजहें By Virendra Dewangan

किसी जमाने में गांवों में समाचार या गाना सुनने का एकमेव माध्यम रेडियो या ट्रांजिस्टर हुआ करता था। जो लोग संपन्न व शौकीन थे, वे अपनें मनोरंजन, समययापन और शान के लिए इसे रखा करते थे।...

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पितृ दोष By Vandna Sharma

बाबू राम किसी गाँव में एक प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे। उनका एक बेटा था मोहन। मोहन अपनी बीवी के साथ शहर में किराए पर रहता था। बाबूराम का गाँव में बड़ा सा घर था। उसने अपने बेटे-बहू...

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कमरा नंबर 17 By Bittu Jain

रात के ठीक बारह बजे अनन्या के फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।कमरा नंबर 17 मत खोलना।अनन्या ने मैसेज पढ़ा और फोन एक तरफ रख दिया।उसे लगा किसी ने मजाक किया है।वह जिस पुराने हॉस्टल म...

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गाँव का लगाव By Deepak Kumar Tiwari Deeptansh

शहर की भागदौड़ से दूर, अमित पूरे पंद्रह साल बाद अपने पुश्तैनी गाँव लौटा था। गांव के पगडंडी पर चलते-चलते उसको बचपन की यादें आने लगी उसका बचपन इसी गांव में बीता था। उसके पिता जी के ग...

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