My Dear Professor - 14 in Hindi Love Stories by Vartikareena books and stories PDF | माई डियर प्रोफेसर - भाग 14

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माई डियर प्रोफेसर - भाग 14













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क्लास मे आकर अमर ने टेस्ट रिजल्ट देने शुरू कर दिए।  वो एक एक कर सबके नाम लेकर मार्क्स बताने लगा। 

नैना लगातार दरवाजे की तरफ देख रही थी। उसके पसीने छूटने लगे थे। 


ये चारू की बच्ची ! आई ही नही ! सर ने कहा था जो रिजल्ट वाले दिन नही आएगा...उसे अमर सर पर्सनली हैंडल करेंगे । 


तभी अमर ने चारू का नाम लिया । नैना के रोंगटे खडे हो गए।  वो भगवान से दुआ मनाने लगी की बस ये खुसंट प्रोफेसर उस से चारू के बारे मे कुछ पुछे ना ! 

पर भगवान उसके साथ नही थे ।


जब चारू कही नही दिखी तो अमर ने नैना के आवाज लगाई। 


" नैना..मिस चारू कहा है ? ", अमर नैना को देखते हुए बोला।

नैना का दिल धक धक करने लगा। वैसे भी उसे अमर से डर लगता था । वैसे भी चारू का कहना था कि वो भैंसे पर सवार यम दूत है, जो बच्चो के हलक से जान निकाल ले ! 

और आज उसे ऐसा लग भा रहा था । 


वो खडी हो गई और भरसक खुद को शांत रखने की कोशिश करने लगी।


" नैना ! ", अमर ने एक बार फिर उसे पुकारा।


नैना ने आंखे गोल घुमाते हुए कहा , " सर चारू के पेट मे सिर दर्द है ! "


वो हडबडाकर बोली.

" क्या !!!! ", हकबकाया सा अमर नैना को देखने लगा।


नैना का जवाब सुनकर शशांक ने होंठ दबा लिए।  वो हंसी रौकने की कोशिश कर रहा था । वो जानता था कि अगर वो हँस गया तो ये इंसानी यम दूत जो इनका प्रोफेसर है वो उसकी खटिया खडी कर देगा। 

वही नव्या आंखे बडी कर नैना को देख रही थी। 


नैना की हवा टाईट होने लगी थी । उसने नव्या और शशांक की तरफ देखा। मानो कह रही हो ' बचा लो मुझे ! '।


नव्या ने गर्दन टेढी कर उसे देखा और वही शशांक ने चेहरा घुमा लिया।


मतलब साफ था । तुम्हारी गडबड..तुम खुद ठीक करो।

नैना ने मन ही मन दोनो को जमकर गालिया दी । फिर अमर को देख.कर खिसयानी सी हँसी हँस दी।


" असल मे सर...चारू की तबियत खराब है ! ", नैना नाखुन अपने अंगूठे मे धसांते हुए बोली।

अमर ने आंखे सिकोड़कर उसे देखा फिर हां मे सर हिला दिया। 


नैना के गहरी सांस छोडी और बैठ गई।  




अगले तीन चार दिन ऐसे ही बीते । चारू कॉलेज नही आई थी। नैना ने जब उस से इसका जवाब मांगा तो उसने सब कुछ नैना को बता दिया। नैना ने अपना सर पीट लिया। 


आज मंडे था और फाइनली चारू कॉलेज आ गई थी । वो जैसे ही कैंटीन की तरफ बडती है की एक अमर उसके सामने आकर खडा हो जाता है।


सकपका कर चारू ददम पीछे हट जाती है। वो.पलके झपका कर अमर को देखने लगती है। 


" कही सर लाइब्रेरी वाले हादसे के बारे मे तो बात नही करने वाले ! नही! नही ! ये नही होना चाहिए।  मै क्या जवाब दुंगी ?! एक काम करती हूं – भाग जाती हूं! ना यहा रूकुंगी ना सर कोई सवाल करेंगे । "


चारू का दिमाग सरपट दौड रहा था। वो.पुरा मन बनाने खडी थी कि अगर अमर ने लाइब्रेरी शब्द भी लिया तो वो भाग जाएगी। 


अमर ने उसे देखा और बोला, " मिस चारू आप कालेज क्यो नही आ रही थी ? आपको पता है ना की आपके इक्जाम मे बस दो हफ्ते रह गए है ! फिर भी आप लापरवाही दिखा रही है ! "


अमर ने फटकारते हुए कहा । चारू ने एक पल के लिए उसे देखा फिर गहरी सांस छोडी । जो उसे पता तक नही थी उसने रोक रखी है। 


" हाश!!!! तो आप ये पुछने वाले थे । वो मेरी तबियत खराब हो गई थी सर इसलिए नही आ पाई।  ", चारू ने रिलीफ के साथ कहा।


अमर ने कुछ देर उसे देखा फिर उसका हाथ पकड अपने ऑफिस की तरफ बड गया।

चारू की आंखे बडी हो गई।  दिल मानो धडकने भूल गया हो ! उसने एक बार अमर को देखा फिर अपने हाथ को जिसे अमर ने पकड रखा था। 


" ये पक्का लाईब्रेरी के बारे मे बात करेंगे । कही इन्होने मुझे जेल मे डालने का तो नही.सोचा! नही..नही !!!!! मै जेल धही जाना चाहती !!!!!!!!"


सोचते सोचते चारू के पसीने छूटने लगे । उसके आगे उसका भविष्य घूम गया। 


वो सफेद सारी मे , जिसपर नीले रंग का गोटा लगा था। उसके हाथ मे हथकड़ी थी और वो कोर्ट रूम के कटघरे मे खडी थी । 


" तुमने एक आदमी को किस किया वो भी उसकी मर्जी के बिना ! बहुत बडा अपराध है ये ! तुम्हे सजा मिलेगी। चारू श्रीवास्तव तुम्हे उम्र के की सजा मिलती है। ", जज अपना फैसला सुनाकर चले गए। 

चारू गिड़गिड़ाते रह गई ।.पर किसे ने उस पर तरस नही खाया। उसे काल कोठरी मे डाल दिया गया और चक्की मे आटा पिस.वाने लगे। 


आटा पिसते पीसते चारू के हाथ छिल गए।  तभी एक. खडुस जेलर आई और उसने दो बोली गेहू की और उसके सामने फेंक दी। ये देख कर आटा पीस रही चारू चिल्ला दी।



" आआआ!!!!!!!!", चिल्लाते हुए चारू ने अपना हाथ झटका और भाग गई।


अपने ऑफिस के सामने खडा अमर हकबकाया सा उसे देखता रहा। 



ये इस लडकी को हो क्या गया है ?! 





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नव्या बनाना शेक पीते हुए अपने फोन मे कुछ देखते चले जा रही थी। कॉरिडोर मे शांती थी। मगर ये शांती अधिक समय तक टिकने वाली नही थी । 


नव्या फोन मे कुछ पडते हुए रूक गई।  उसने अपना शेक कर को शेक किया और जैसे ही दोबारा उसे अपने होंठो सेध लगाने को हुई की इसी ने उस से बोटल छीन ली।


हडबडाकर नव्या ने अपना सर उठाया तो उसकी आंखे सिकुड गई।  सामने शशांक खडा था। वो नव्या के शेक कर से शेक पीने लगा। एक बार पीने के बाद शशांक ने नव्या को देखा और उसे अपने दांत दिखा दिए। 


नव्या ने उसे घूरा तो वो और भी बडी मुस्कान के हाथ उसे देखने लगा। नव्या ने ना मे गर्दन हिला दी । फिर हाथ बडा कर उसने अपना शैक कर शशांक से छीन लिया। 


ये देख कर शशांक ने पाउट बना लिया। नव्या ने उसे घूरा तो वो और भी ज्यादा अपने होठो को गोल कर लिया। 


" शशांक स्टॉप इट ! ", नव्या ने चिढ भरी आवाज मे कहा ।

" तुम मुझे बनाना शैक नही दे रही ! ", शशांक ने शैककर की तरफ उंगली कर दी तो नव्या नु अपनी आअखे घुमा ली।


" नौटंकी ! " , वो बुदबुदा उठी। 


इतना कहकर जैसे ही वो जाने लगी की उसकी आंखे बडी हो गई।  


सामने से चारू भागते हुए ऐसे आ रही थी मानो उसके पीछे गली के कुत्ते पड गए हो। 


नव्या को रास्ते से हटने का जरा भी मौका नही मिला और चारू जबतक खुद को रोकती उस से पहले ही उसकी टक्कर नव्या से हो गई थी।


नव्या जमीन पर धडाम से गिर गई।  चारू उसके ऊपर आ गिरी। 


शशांक की आंखे इतनी बडी हो गई की मानो अभी बाहर निकल आएगी ।


क्योंकि नजारा ही कुछ ऐसा था। 


नव्या जमीन पर पडी थी । उसके ऊपर चारू ढेर थी। दोनो के चेहरे बीच बस एक इंच का फासला था । 


उन्हे ऐसे देख शशांक को कुछ अजीब सा महसूस होने लगा ।.उसे चारू और नव्या इतने करीब पसंद नही आ रहे थे। वो दोनो को घूरने लगा। 







क्रमशः 


इस भाग मे इतना ही । मिलते है अगले भाग के साथ ।