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लाईब्रेरि से निकल कर चारू सीधा अपने डोर्म चली गई। पिछले एक हफ्ते से वो अकेली ही रह रही थी। क्योंकि अमोघ नैना के साथ ही रहना चाहता था । चारू समझती थी उसका डर! उसकी प्रवाह! और उसे विश्वास हो गया था कि अमोघ नैना से सच मे प्रेम करता है!
चारू ने कमरे मे आते ही अपना बैग एक ओर फेंका और खुद बेड पर कूद गई। उसने अपना चेहरा तकिए मे छुपा लिया और पूरे बिस्तर पर गोल गोल घुमने लगी ।
" आआआआआ!!!!!!!!!!", चारू अपना चेहरा तकिए मे छुपाते हुए हल्के से चिल्लाई। उसे बार बार प्रोफेसर अमर याद आ जाते और जो कारनामा वो कर आई थी..वो भी !
चारू ने तकिए हटाया और अपने आप को शीशे मे देखा। उसके गाल सुर्ख हो गए थे।
उसने अपने होंठो कि तरफ देखा और उसे एक बार फिर वही स्पर्श महसूस हुआ! उसने दांतो तले होंठ दबा लिए।
" चारू....तू कैसे इतनी लापरवाह.हो.सकती है ! ठीक से खडा भी नही हुआ जाता तेरे से ! सर को किस कर आई !!!!!
आआआआ...!!! मम्मीईईईईईईईईईईईई! ", वो अपना चेहरा हाथो मे छुपाते हुए बोली।
" एक तो पहले ही उनके सामने ना जाने क्या हो जाता है! ऊपर से अब ये ! किसी को मुंह दिखाने लायक नही रही मै! अब क्या करू ? कल तो क्लास है.! ऐसे मे सर का सामना कैसे करूंगी मै ? "
चारू कमरे मे इधर उधर घुमते हुए बोली।
" एक तो ये अमर सर भी ना...रोज लेक्चर लेते है ! अरे एक आद दिन नही भी लेंगे तो कुछ हो जाएगा ! नही! इन्हे तो फिजिक्स और मैथ्स के टीचर को कॉम्पिटिशन देना है कि ' हम हिस्ट्री के प्रोफेसर भी चाहे आंधी आए या भूंकप...हम.भी क्लास लेने आ सकते है और आएंगे ! हुं! ये टीचर लोग होते ही बेकार है ! ये प्रजाति मे दया भाव.नाम.का तो कोई जगह ही नही है ! "
चारू बड़बड़ाते हुए अपने बाल खिंचने लगी।
" क्या करूं ? क्या करूं ? आइडिया..मै कुछ दिन युनिवर्सिटी जाऊंगी ही नही ! एक दो दिन मे भूल जाएंगे ! यस! मस्त प्लान है बाबू भईया ! "
इतना कहकर चारू ने अपनी पीठ थपथपा दी ।
अगले दिन
एक ब्लैक बाइक युनिवर्सिटी के सामने आकर रूकी। बाइकर ने अपना हेल्मेट उतारा फिर अपनी जैकेट की सिल्विज को अनटाई कर दिया जो उसकी कमर के पास बंधी थी। उसने अपने बालो मे हाथ फेरा और हल्के से पीछे सर घुमाकर नैना को देखा । जो कि उसे ऐसे देख रही थी मानो आंखो से कत्ल कर दे !
अमोघ ने अपनी जैकेट उसके आसपास लपेट कर उसे अपने से बांध दिया था । नैना पुरी तरह अमोघ से सटी हुई थी। वो राजवंशी महल से लेकर युनिवर्सिटी तक उसके कान खा गई थी ।
" अमोघ राजवंशी !!!!", नैन चिड कर बोली।
उसकी चिढ भरी आवाज सुनकर अमोघ हँस दिया। उसकी हँसी कुछ ऐसी थी कि नैना को अपने पेट मे तितलियां उडती हुई महसूस हुई। वो पलके झपकाते हुए अमोघ को देखने लगी।
अमोघ को जब एहसास हुआ की नैना कुछ.नही बोल.रही तो अब वो.भी.शांत हो गया ।.उसने नजर भर नैना को देखा और मुस्कुरा दिया।
नैना की धड़कन तेज हो गई!
अमोघ बाईक से उतरा और उसने नैना की कमर पर हाथ रख उठा लिया।
" आआ...",,नैना ने जल्दी से अमोघ के कंधे पकड लिए। उसकी आंखे बडी हो गई थी और अगले ही पल वो जमीन पर अपने पैरो पर खडी थी।
नैना पहले बाईक को देखा फिर अपने आप को और फिर अमोघ को । उसके होंठ हल्के से गोल हो गए।
" मै क्या कोई तकिया हूं...जिसे जब चाहे उठा कर कही भी रख दिया ! ये तुम बार बार मुझे क्यो गोद मे उठा लेते हो ? "
नैना ने अपनी कमर.पर हाथ रख भंवे उचका दी।
उसे देख कर अमोघ का दिल गुलाठी मारने लगा था ।.एक तो वो उससे कद मे छोटी थी । ऊपर से इस समय होंठो को गोल करे , कमर.पर हाथ रखे वो उसे ऐसे देख रही थी मानो अभी सवालों से उसमे छेद कर देगी।
अमोघ हल्का सा उसकी तरफ झुका । नैना की आंखे बडी हो गई। उसका रिएक्शन देख अमोघ मुस्कुरा दिया। वो नैना के चेहरे से एक इंच की दूरी पर आकर रूक गया ।
" क्यूट ! ", अमोघ ने मुस्कुराते हुए कहा।
नैना तेजी से पलके झपकाने लगी। उसके गाल पर हल्की सी लाली छा गई। उसके ऐसे.रिएक्शन को देख अमोघ हँस दिया।
एक बार फिर अमोघ की हँसी.से नैना के पेट मे सिकुडन होने लगी। उसने गहरी सांस लेना शुरू कर. दिया और नजरे फेर.ली।
कुछ पल तक अमोघ नैना को एकटक देखता रहा फिर दो कदम.पीछे हट गया ।
" अगर अनकम्फर्टेबल कर दिया हो तो सॉरी नैना ! आप कहेगी तो मै अब दो कदम की दूरी पर ही रहुंगा! ", अमोघ ने नर्म और थोडी ग्लानी से कहा। उसे लगा की उसके पास आने से नैना असहज हो गई है। उसने नैना के नजरे फेरने का कुछ और ही.मतलब निकाल लिया था ।
नैना ने जब अमोघ की बात सुनी तो उसके माथे पर बल.पड गए। लेकिन वो अमोघ से कुछ कहती की अमोघ युनि के अंदर चला गया।
नैना उसे देखती रही। जी चाहा की भाग कर हाथ पकड ले ! लेकिन...ऐसा करके वो अमोघ को उम्मीद दे सकती थी!, जोकि गलत था !
नैना को उसकी क्लास तक छोडने के बाद अमोघ अपनी क्लास मे चला गया। नैना अपनी तय की सिट पर जाकर बैठ गई और 'गिल्मस ऑफ एंशियंट इंडिया ' प्रतियोगिता के ऊपर बना गए अबतक के नोट्स देखने लगी।.वो. इस प्रतियोगिता के लिए गंभीरता से तैयारी कर रही थी । जो भी प्रतियोगिता जीतता उसे एक लाक नकद पुरूस्कार और स्कॉलरशिप मिलती । और नैना को ये दोनो ही चाहिए था । फजिफा अपने लिए और पैसे अपने इलाज के लिए! वो ऐसे अमोघ पर डिपेंड नही होना चाहती थी । उसके स्वाभिमान को ये माननीय नही था ।
वो अभी सोच ही.रही थी की उसे महसूस हुआ कि चारू अब तक क्लास मे नही आई। उसके माथे पर परेशानी की लकीर दिखने लगी।
ये चारू कहा है ? रोज तो सबसे पहले आकर बैठ जाती है और उसे फोन कर....कर के परेशान कर देती है।.पर आज ! आज तो मैडम.का.फोन क्या...मिस्ड कॉल भी नही आई!
उसने चारू को फोन मिलाना शुरू कर दिया ।.पर मजाल है जो एक भी फोन.चारू मैडम उठा ले।
नैना अब परेशान होने लगी थी । इतने मे प्रोफेसर अमर क्लास मे एंटर हो गए और क्लास. शुरू हो गई।
अब तो नैनी और भी परेशान हो गई थी।
कहा है ये लडकी?! अमर सर की तो एक क्लास नही छोडती और आज..जब टेस्ट रिजल्ट दिखाने वाले है सर..ये लडकी आई ही नही !
इधर अपने डोर्म मे चारू आराम से सोई हुई थी । वो पेट के बल.सो रहा थी । उसका एक घूटना पेट की तरफ मुडा था । एक हाथ बिल्कुल सीधा और दूसरा बिस्तर से नीचे लटक रहा था । कंबल थोडा सा बिस्तर पर और आधा जमीन पर पडा था ।
वो दीन दुनिया से बेख़बर घोड़े क्या घोडों का तबेला बेंच कर सो रही थी । इस बात से अनजान की उसके कॉलेज ना जाने का प्लान उस पर कितना भारी पडने वाला था ।
क्रमशः
इस भाग मे इतना ही मिलते है अगले भाग के साथ ।