: : प्रकरण : : 19
मेरे परिवार और परमेश्वर के परिवार ने साथ मिलकर अजंता का मिनि पिकनिक आयोजित किया था.
उस के लिये सुबह साथ बजे चर्च गेट स्टेशन पर मिले थे. मेरे परिवार सहित फ्लोरा की बहन और परमेश्वर के सौतेले भाई बहन उस में शामिल थे.
हम लोग गेट वे ओफ इंडिया गये थे, वहाँ से हम लोग लोंच में अजंता गुफा गये थे.
एक घंटे के अंदर हम लोग वहाँ पहुंच गये थे
सब से पहले हम लोगो ने चाय नास्ता किया था.
बाद में सब बच्चे पकड़ा पकड़ी खेल ने लगे थे, और हम लोग उन्हें देख रहे थे. और आपस में बातें कर रहे थे. हमारे बच्चें परमेश्वर के भाई बहन से हिल मिल गये थे.
उस वक़्त मैं फ़िल्मी गीत को गुनगुना रहा था.
छोटी सी यह दुनिया पहचाने रास्ते
तुम कभी तो मिलोगे कहीं तो मिलोंगे
तो पूछेंगे हाल.. छोटी सी यह दुनिया
मुझे देखकर सुंदर भी शुरू हो गया था.
नन्हा मुन्ना रही हूं देश का सिपाही हूं
बोलो मेरे संग जय हिन्द जय हिन्द
फिर हमने लुप्पा छुप्पी खेलना शुरू किया था.
करीब करीब एक घंटे हमने यह खेल एंजोय किया था. फिर थोड़ा थमकर, रुककर खो खेला था.
बच्चों को बहुत मजा आ रहा था.. यह देखकर हम भी खुश हो रहे थे.
फिर हमने सारी गुफाओ को देखा था.
सारे बच्चे एक जुथ होकर नाचते कूदते आगे बढ़ रहे थे. हमारे लिये यह पिकनिक एक आनंदओत्स्व बन गया था.
हमारे साथ केमेरा हमने सभी गुफाओ के फोटो क्लिक किये थे. मेरे कहने से फ्लोरा ने गुजराती ढब से साड़ी पहना था.
. मैंने दोनों का एक साथ फोटो क्लिक किया था.
दोपहर को दो बजे घूम फिर कर हम सब ने साथ मिलकर लंच किया था.
आरती ने थेपला और आलू का शाक बनाया था ज़ब की फ्लोरा ढोसा और इडली बनाकर लाई थी.
उस के बाद अंताक्षरी का खेल शुरू हुआ था.
मैंने अपने मन पसंदीदा फ़िल्म धूल का फूल के गीत से शुरुआत की थी.
तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं
वफ़ा कर रहा हूं वफ़ा चाहता हूं
उस पर परमेश्वर ने गाया था
हम तो तेरे आशिक हैं सदियों पूराने
चाहे तुं मैंने या ना माने,
उस को आगे बढ़ाते हुए फ्लोरा ने गाया था
ना ना करते प्यार तुम ही से कर बैठे
. करना था इन्कार मगर इकरार
तुम्ही से कर बैठे
दोनों फ्लोरा और आरती का एक ही किस्सा था.
गीत ने दोनों के चेहरो को चमका दिया था.
उस को सुंदर ने आगे बढ़ाया था.
थोड़ा था थोड़ा हैं...
उस को मैंने आगे बढ़ाया था
हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गायेगा
दिवाना हर महफ़िल मैं पहचाना जायेगा
परमेश्वर ने उसे आगे बढ़ाया था.
गीत गाता हूं मैं गुनगुनाता हु मैं
मैंने हसने का वादा किया था
इस लिये सदा मुस्कुराता हुआ मैं
उस को परमेश्वर के भाई ने पूरा किया था.
मुझे दुनिया वालों शराबी ना समजो
मैं पीता नहीं हूं पिलाई गई है
उस पर मैंने गाया था.
होठों पर सच्चाई रहती हैं
दिल मैं सफाई रहती हैं
हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती हैं
हा मैंने भी प्यार किया
प्यार से कब इन्कार किया
परमेश्वर ने गाया था.
मुझे उस के लिये गाना पता था. लेकिन मैं अपने दोस्त को हारा हुआ नहीं देख सकता था. तो मैंने जानते हुए भी उस का जवाब नहीं दिया था. लेकिन फ्लोरा की चालाक आँखों ने मेरी चोरी पकड़ ली थी.. मैंने उसे इशारा किया था और वह चुप रही थी.
हसी मजाक खेल कूद में दिन कहाँ बीत गया?
उस का पता ही नहीं चला.
पांच बज चुके थे. बच्चों को भूख लगी थी. तो आरती ने सब को नास्ता खिलाया, चाय पीलाई.
छह बजते ही हम लोग डोक पहुंच गये.
लॉन्च छूटने में थोड़ा समय बाकी था.
सब लोग दूर खडे सागर के पानी की उछल कूद को निहार रहे थे .
सात बजे लोंच छूटने वाला था. हम लोगो को इंतजार करना पड़ा था. वह भी थक से गये थे, कंटाल गये थे. उन्होंने अपनी ओर से समय पास करने का तरीका ढूंढ लिया था.. उस से समय पास हो गया.
सात बजे लोंच छूटा..
पुरे दिन सब लोगो ने खूब मजा किया था. उस का रिकेप मेरी आँखों के सामने नर्तन कर रहा था.
आठ बजने में कुछ समय बाकी था. और हम गेट वे ओफ इंडिया के डोक पर पहुंचे थे. वहां से दो टेक्सी कर के हम लोग चर्च गेट स्टेशन पहुंचे थे.
स्टेशन पर मेरे बच्चों ने ज्यूस पीने की डिमांड की और मैंने सब को ज्यूस पिलाया.. बाद में दोनों परिवार अलग अलग गाड़ी में चढ़ गये.
हम लोग पहले घर पहुंच गये थे.
एक घंटा इंतज़ार कर के मैंने परमेश्वर को फोन कर के सवाल किया :
" आप लोग बराबर पहुंच गये.. "
उस ने समर्थन देते हुए हमारे बारे में पूछपाछ की :
" तुम लोग भी बराबर पहुंच गये? "
मैंने भी हकारात्मक जवाब दिया.
पूरा दिन खुशी के माहौल में गुजरा था.. इस वजह से ही बिस्तर में पड़ते ही नींद लग गई थी
सुबह होने से कुछ समय पहले मुझे डरावना सपना आया था.
जिस से मैं कुछ सहम सा गया था.
सपने में मैंने देखा था. फ्लोरा मुझे से अलग हो रही हैं.
सुबह उठने के बाद ओफिस के लिये तैयार होने के बाद भी वह सपने की याद मुझे सता रही थी.
ठीक समय पर मैं चर्च गेट स्टेशन पर उतरा था.. और OCM के बैनर तले खड़ा रहकर फ्लोरा का इंतजार कर रहा था. लेकिन वह आई नहीं थी. वह थक गई होगी, इस लिये शायद वह नहीं आयेगी यह सोचकर मैं बस स्टोप की दिशा में अग्रेसर हो गया.
बस स्टोप पर एक साथ दो बसे ख़डी थी. मैं पिछ्ली बस में चढ़ गया. दोनों बसे साथ में चलने लगी.. और सिग्नल के पास ख़डी ऱह गई..
अनायास मेरी नजर उस बस पर पड़ी.
फ्लोरा उस बस में सवार थी.
ऐसा कैसे हो गया?
मेरी कुछ समझ में नहीं आया.
दोनों बस स्टोप पर उतरकर एक साथ हो गये.
वह मेरे लिये रुकी नहीं थी!
उस बात का मुझे अचरज हुआ था.
0000000000 ( क्रमशः)