Garbha Sanskar - 15 in Hindi Women Focused by Praveen Kumrawat books and stories PDF | गर्भ संस्कार - भाग 15 - एक्टिविटीज–14

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गर्भ संस्कार - भाग 15 - एक्टिविटीज–14

प्रार्थना:
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥

भावार्थ– जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती है, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली सरस्वती हमारी रक्षा करें ॥1॥

ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु। सहवीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥ 
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः

भावार्थ– ईश्वर हम दोनों (गुरू एवं शिष्य) की रक्षा करें! हम दोनों का पोषण करें! हम दोनों पूर्ण शक्ति के साथ कार्यरत रहें! हम तेजस्वी विद्या को प्राप्त करें! हम कभी आपस में द्वेष न करें ! सर्वत्र शांति रहे!

ॐ असतो मा सद्गमय।।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।।
मृत्योर्मामृतं गमय।।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः।।

भावार्थ– हे ईश्वर! हमको असत्य से सत्य की ओर ले चलो। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता के भाव की ओर ले चलो।

मंत्र:
माता धर्मपत्नी च यथार्हं पूजयेत्। 
जीवनं शान्ति विधाय समृद्धि देहि।।

अर्थः माँ और पत्नी को उचित सम्मान देकर ही जीवन में शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु, मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ हूँ …… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ महानतम गुणों की याद दिला रही हूँ जो तुम्हें परमात्मा का अनमोल उपहार हैं।

— प्रेम स्वरूप परमात्मा का अंश होने के कारण तुम्हारा हृदय भी प्रेम से भरपूर है, तुम्हारी हर अदा में परमात्मा का प्रेम झलकता है।

— तुम्हारे हृदय में सम्पूर्ण मानवमात्र के प्रति समभाव है।

— तुम्हारा हृदय सबके लिए दया और करुणा से भरपूर रहता है।

— क्षमाशीलता के गुण के कारण सभी तुम्हारा सम्मान करते हैं, जिससे तुम्हारा स्वभाव और विनम्र हो जाता है।

— नम्रता तुम्हारा विशेष गुण है।

— मेरे बच्चे। तुम्हारा प्रत्येक कार्य सेवा-भाव से परिपूर्ण होता है।

— सहनशीलता तुम्हारा स्वाभाविक गुण है।

— धैर्यपूर्वक प्रत्येक कार्य को करना तुम्हारी महानता है।

— तुम्हारा मन आंतरिक रूप से स्थिर और शांत है।

— मेरे बच्चे! तुम बल और साहस के स्वामी हो।

— तुम अनुशासन प्रिय हो।

— कृतज्ञता का गुण तुम्हारे व्यवहार की शोभा बढ़ाता है।

— तुम अपनो से बड़ों को सम्मान और छोटों को प्रेम देते हो।

— तुम भाव से बहुत भोले हो लेकिन जरूरत पड़ने पर अपनी कठोरता भी दिखाते हो।

— तुम अपनो से छोटों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हो।

— तुम सत् और असत के पारखी हो।

— तुम्हारा व्यवहार चन्द्रमा के समान शीतल है।

— तुम सबसे इतना मीठा बोलते हो कि सभी तुम पर मोहित हो जाते हैं।

— तुम्हारा व्यक्तित्व परम प्रभावशाली है।

— तुम हमेशा सत्य बोलना ही पसंद करते हो।

— तुम हाजिर जवाबी हो।

— तुम्हारे मुख से निकला एक-एक शब्द मधुर और आकर्षक होता है।

— तुम मन, वचन और कर्म से पवित्र हो।

— घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है। तुम्हारे रूप में मुझे जैसे दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, तुम्हे पाकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। जल्द ही इस सुन्दर संसार में तुम्हारा आगमन होगा। तुम्हारा स्वागत करने के लिए सभी बेचैन हैं।

गर्भ संवाद
“मेरे बच्चे! जीवन में गलतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन उन गलतियों से सीखना बहुत महत्वपूर्ण है। हर गलती हमें एक नया सबक देती है और वही हमें अपने भविष्य के लिए तैयार करती है। मैं चाहती हूं कि तुम कभी अपनी गलतियों से भागो नहीं, बल्कि उन्हें स्वीकार करो और उनसे कुछ नया सीखो। यही तरीका तुम्हें सही दिशा में ले जाएगा। हर गलती तुम्हारे जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक बन सकती है, अगर तुम उसे सही तरीके से समझने की कोशिश करते हो।”

पहेली:
आँखे दो हो जाए चार, 
मेरे बिना कोट बेकार, 
घुसा आँखो में मेरा धागा 
दरजी के घर से मैं भागा।

कहानी: हाथी और बंदर का विवाद
बहुत समय पहले, एक हरा-भरा घना जंगल था, जहां अनेक प्रकार के जानवर रहते थे। इस जंगल में एक विशाल हाथी और एक चतुर बंदर भी रहते थे। दोनों जानवर अपनी-अपनी खूबियों के लिए मशहूर थे। हाथी अपनी ताकत और बड़े आकार के लिए जाना जाता था, जबकि बंदर अपनी फुर्ती और बुद्धिमानी के लिए मशहूर था। दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी, लेकिन कभी-कभी उनके विचारों में टकराव हो जाया करता था।

एक दिन, जंगल में एक पेड़ फलों से लदा हुआ था। यह पेड़ विशेष था क्योंकि इसके फल मीठे और रसदार होते थे। सभी जानवर इस पेड़ के फलों को खाने के लिए उत्सुक रहते थे। हाथी और बंदर भी इस पेड़ के पास पहुंचे। जब उन्होंने देखा कि पेड़ फलों से लदा हुआ है, तो दोनों ने सोचा कि ये फल उन्हें सबसे पहले खाने चाहिए।

बंदर ने तुरंत पेड़ पर चढ़कर फलों को तोड़ना शुरू कर दिया। जैसे ही उसने पहला फल तोड़ा, हाथी ने गुस्से से कहा, “रुको! ये फल पहले मैं खाऊंगा। मैं इस जंगल का सबसे बड़ा और ताकतवर प्राणी हूं। मुझे इन फलों का पहला हक है।”

बंदर ने ऊपर से नीचे देखते हुए कहा, “ताकतवर होना ही सब कुछ नहीं होता, मेरे दोस्त। मेहनत और बुद्धि भी बहुत महत्वपूर्ण है। मैंने मेहनत की है और इस पेड़ पर चढ़ा हूं। इसलिए, इन फलों पर मेरा अधिकार है।"”

हाथी को यह सुनकर बहुत गुस्सा आया। उसने अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए पेड़ को अपनी सूंड से जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया। पेड़ के हिलने से बंदर को संतुलन बनाए रखने में मुश्किल होने लगी, लेकिन वह अपनी फुर्ती से पेड़ की शाखाओं पर टिके रहने में कामयाब रहा।

हाथी और बंदर के बीच इस विवाद का शोर जंगल में गूंजने लगा। अन्य जानवर जैसे हिरण, लोमड़ी, मोर और खरगोश भी वहां इकट्ठा हो गए। उन्होंने देखा कि दोनों दोस्त झगड़ रहे थे और तय नहीं कर पा रहे थे कि फलों पर किसका हक है। सबने अपनी-अपनी राय देने की कोशिश की लेकिन कोई भी इसका हल नहीं निकाल पाया।

तभी एक हिरण ने सुझाव दिया, “चलो, इस समस्या का समाधान करने के लिए जंगल के सबसे बुद्धिमान जानवर उल्लू से मदद मांगते हैं।

सभी जानवर इस सुझाव से सहमत हुए। वे उल्लू को बुलाने गए। उल्लू, जो एक पुराने पेड़ की ऊंची शाखा पर रहता था, उनकी बात सुनने को तैयार हो गया। वह धीरे-धीरे फलों के पेड़ के पास आया। उसने हाथी और बंदर की बातें सुनीं और उनसे पूछा, “तुम दोनों को क्या लगता है कि इन फलों पर किसका अधिकार होना चाहिए?”

बंदर ने अपनी बात रखते हुए कहा, “मैंने इस पेड़ पर चढ़ने में मेहनत की है। अगर मैं मेहनत नहीं करता, तो ये फल मेरे हाथ न आते। इसलिए, इन फलों पर मेरा अधिकार है।”

हाथी ने अपनी दलील दी, “मैं जंगल का सबसे ताकतवर प्राणी हूं। मेरी ताकत का सम्मान होना चाहिए। मुझे इन फलों का सबसे पहले अधिकार मिलना चाहिए।”

उल्लू ने दोनों की बातें ध्यान से सुनी और फिर मुस्कुराते हुए कहा, “तुम दोनों सही हो, लेकिन तुम्हारी सोच में अंतर है। बंदर ने अपनी मेहनत और बुद्धि से फल तोड़े हैं, जबकि हाथी अपनी ताकत के कारण फल पाने की उम्मीद कर रहा है। परंतु, अगर तुम दोनों अपनी खूबियों का इस्तेमाल एक साथ करोगे, तो न केवल समस्या हल होगी बल्कि दोनों को फल खाने का अवसर मिलेगा।”

उल्लू ने एक योजना सुझाई। उसने कहा, “हाथी, तुम अपनी ताकत का इस्तेमाल करके पेड़ को थोड़ा झुका दो, ताकि बंदर को फल तोड़ने में आसानी हो। और बंदर, तुम फलों का हिस्सा हाथी के साथ बांट लो। इस तरह, तुम दोनों को बराबर लाभ मिलेगा।”

हाथी और बंदर ने उल्लू की बात मान ली। हाथी ने पेड़ को अपनी सूंड से झुका दिया, और बंदर ने आसानी से फल तोड़ लिए। बंदर ने फलों को आधा-आधा बांट दिया। दोनों ने मिलकर फल खाए और आनंद लिया।

उस दिन के बाद, हाथी और बंदर ने सीखा कि झगड़े और विवाद से कुछ हासिल नहीं होता। मिलजुलकर काम करने से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है। उन्होंने ठान लिया कि वे भविष्य में किसी भी समस्या को समझदारी और सहयोग से हल करेंगे।

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि दूसरों की खूबियों का सम्मान करना चाहिए और मिलकर काम करना चाहिए। विवाद और झगड़े से कोई समाधान नहीं निकलता। जब हम एक-दूसरे की ताकत और क्षमताओं का सम्मान करते हैं, तो जीवन में सफलता पाना आसान हो जाता है।

पहेली का उत्तर : बटन
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प्रार्थना:
दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना, 
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना। 
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ, 
अँधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना।
बहा दो प्रेम की गंगा, दिलों में प्रेम का सागर, 
हमे आपस में मिलजुल के प्रभु रहना सीखा देना। 
हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा,
सदा ईमान हो सेवा, वो सेवक चर बना देना। 
वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना, 
वतन पे जा फ़िदा करना, प्रभु हमको सीखा देना।
 दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना। 

मंत्र:
पुत्रं सर्वशरीरं पूजयेत्। 
तथैव मातरं सर्वशक्तिमयीं शरणं गच्छे।

अर्थः संतान और माता दोनों का सम्मान करना जीवन के उद्देश्य को सिद्ध करता है। इस प्रकार के कार्यों से जीवन में सभी प्रकार की शक्तियां और आशीर्वाद मिलते हैं।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु, मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ भौतिक गुणों की याद दिला रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार हैं।

— परम तेजस्वी ईश्वर का अंश होने के कारण तुम्हारे मुख पर सूर्य के समान दिव्य तेज और ओज रहता है।

— तुम्हारे नैन-नक्श तीखे और बहुत सुन्दर है, तुम्हारा सुन्दर मुखड़ा सबको बहुत प्यारा लगता है।

— तुम्हारे चेहरे का रंग गोरा और सबका मन मोह लेने वाला है।

— तुम्हारी हर अदा सुन्दरतम ईश्वर की झलक लिए हुए है, तुम्हारा माथा चौड़ा है, तुम्हारी आँखें बड़ी है, तुम्हारी भौहें तीर के आकार की तरह बड़ी है, तुम्हारी पलकें काली और बड़ी हैं।

— तुम्हारे होंठ फूल की तरह कोमल और सुन्दर हैं, तुम्हारे चेहरे पर हर पल एक मधुर मुस्कान छाई रहती है।

— तुम्हारी बुद्धि कुशाग्र है, तुम्हारी वाणी मधुर और सम्मोहन करने वाली है।

— तुम बहुत अच्छे खिलाडी हो, तुम्हारा शरीर तंदुरुस्त और फुर्तीला है। (किसी विशेष खेल के प्रति शिशु के मन में प्रतिभा विकसित करनी हो तो यहाँ कह सकते हैं)

— तुम बहुत सुंदर दिखते हो, बड़े होने पर भी तुम्हारी सुंदरता और निखरती जाएगी।

— तुम्हारी हर अदा बहुत निराली और अनोखी है।

— घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है। तुम्हारे रूप में मुझे जैसे दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, तुम्हे पाकर में बहुत प्रसन्न हूँ, जल्द ही इस सुन्दर संसार में तुम्हारा आगमन होगा। तुम्हारा स्वागत करने के लिए सभी बेचैन है।

गर्भ संवाद
“सच्चे दोस्त तुम्हारे जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। अच्छे दोस्त तुम्हें हर परिस्थिति में सहारा देते हैं और तुम्हें हमेशा बेहतर बनने की प्रेरणा देते हैं। मैं चाहती हूं कि तुम सच्चे दोस्त बनाओ, जो न केवल तुम्हारी सफलता पर खुश हों, बल्कि तुम्हारी असफलताओं में भी तुम्हारे साथ खड़े रहें। दोस्ती एक ऐसा बंधन है जो समय और परिस्थितियों से परे होता है। अच्छे दोस्त तुम्हारे जीवन को और भी अधिक खूबसूरत बना देंगे।”

पहेली:
एक बार एक लड़का अपने दोस्त से कहता है, कि आज मैंने पांच मच्छर मारे जिसमे तीन लेडीज थे और दो जेंट्स। बताओ की उसको कैसे पता चला की कौन सी लेडीज थी और कौन जेंट्स ?

कहानी: कौए और मटके की कहानी
गर्मियों का मौसम था और जंगल में पानी की भारी कमी हो गई थी। छोटे-छोटे तालाब और नदी के किनारे सूख चुके थे। जानवरों और पक्षियों को अपनी प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। इसी जंगल में एक चतुर और मेहनती कौआ रहता था।

एक दिन, वह कौआ बहुत प्यासा हो गया। उसने पानी की तलाश में पूरे जंगल का चक्कर लगा लिया, लेकिन कहीं भी पानी नहीं मिला। सूरज तेज चमक रहा था, और कौआ की हालत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। वह निराश होकर सोचने लगा, “क्या अब मेरी प्यास बुझने की कोई संभावना नहीं बची?”

उड़ते-उड़ते कौआ एक खेत के पास पहुंचा। वहां उसने एक पुराना मटका देखा। मटके को देखकर उसकी उम्मीद जागी। उसने सोचा, “शायद इस मटके में पानी हो।” कौआ तुरंत मटके के पास पहुंचा और उसमें झांककर देखा। मटके के अंदर थोड़ा सा पानी था, लेकिन पानी इतना नीचे था कि उसकी चोंच वहां तक नहीं पहुंच पा रही थी।

कौआ परेशान हो गया। उसने इधर-उधर देखा कि कोई और उपाय हो, जिससे वह पानी तक पहुंच सके। तभी उसकी नजर मटके के पास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ों पर पड़ी। उसने तुरंत एक योजना बनाई। कौए ने सोचा, “अगर मैं इन कंकड़ों को मटके में डालूं, तो पानी ऊपर आ सकता है।"”

बिना समय गंवाए, कौआ एक-एक कंकड़ उठाने लगा और मटके में डालने लगा। हर बार जब वह कंकड़ डालता, पानी का स्तर थोड़ा ऊपर आ जाता। यह देखकर कौआ और भी तेजी से काम करने लगा। उसने अपनी सारी ऊर्जा इस काम में लगा दी।

धीरे-धीरे मटके का पानी ऊपर आने लगा। कौआ बहुत खुश हुआ। अंततः, पानी मटके के ऊपरी हिस्से तक आ गया। कौआ ने अपनी चोंच से पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई। पानी पीने के बाद उसने एक गहरी सांस ली और सोचने लगा, “मेहनत और बुद्धि से किसी भी कठिनाई को हल किया जा सकता है। अगर मैंने हार मान ली होती, तो आज मेरी प्यास नहीं बुझ पाती।”

कौआ जंगल में वापस गया और उसने अपनी कहानी सभी जानवरों को सुनाई। उसने उन्हें सिखाया कि संकट के समय घबराने के बजाय हमें बुद्धिमानी और धैर्य से काम लेना चाहिए।

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में हमें घबराने की बजाय समस्या का समाधान खोजने की कोशिश करनी चाहिए। मेहनत, धैर्य और बुद्धिमानी से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। संकट के समय अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करना सफलता की कुंजी है।

पहेली का उत्तर : जो लेडीज थी वो दर्पण पर बैठी थी और जो जेंट्स सिगरेट पर।
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प्रार्थना:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

भावार्थ: हम उस त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते है जो अपनी शक्ति से इस संसार का पालन-पोषण करते है उनसे हम प्रार्थना करते है कि वे हमें इस जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त कर दे और हमें मोक्ष प्रदान करें। जिस प्रकार से एक ककड़ी अपनी बेल से पक जाने के पश्चात् स्वतः की आज़ाद होकर जमीन पर गिर जाती है उसी प्रकार हमें भी इस बेल रुपी सांसारिक जीवन से जन्म मृत्यु के सभी बन्धनों से मुक्ति प्रदान कर मोक्ष प्रदान करें।

मंत्र:
यत्र देवी सरस्वती विद्या विद्या सदा प्रिया। 
नारी मातरं तां हि पूजयेत् सदा विशुद्धम्।

अर्थः जहां सरस्वती देवी विद्या की देवी के रूप में विद्यमान हैं, वहां विद्या और ज्ञान हमेशा प्यारे होते हैं। नारी को मातरूप में सम्मानित करना चाहिए क्योंकि वह शुद्धता और ज्ञान की प्रतीक हैं।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ ‍ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ महानतम गुणों की याद दिला रही रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार है।

— मेरे बच्चे! तुम्हारे मस्तिष्क में अपार क्षमता है। तुम्हारी बुद्धि तीव्र है।

— तुम आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक जैसी क्षमता लेकर आ रहे हो। तुममे कठिन से कठिन समस्या को सुलझाने की योग्यता है।

— तुम रामानुजन जैसी गणित के सवालों को हल करने की क्षमता रखते हो।

— विवेकानंद जैसी महान प्रतिभा है तुममें।

— तुम्हारी याददाश्त बहुत अच्छी है, जो बात तुम याद रखना चाहो तुम्हें सदा याद रहती है।

— तुम्हारी एकाग्रता कमाल की है। जिस काम पर तुम फोकस करते हो उसमें बेहतरीन परिणाम लेकर आते हो।

— कोई भी विषय, कोई भी टॉपिक तुम्हारे लिए कठिन नहीं, हर विषय को अपनी लगन से, परिश्रम से तुम सरल बना लेते हो।

— तुम्हारे भीतर अनंत संभावनाएं छुपी हुई है।

— तुम्हें म्यूजिक का बहुत शौक है, तुम सभी वाद्य यंत्र बजाना जानते हो। ढोलक, गिटार, तबला, हारमोनियम, तुम बहुत अच्छे से बजा सकते हो।

— तुम्हारा दिमाग बहुत तेज चलता है। मुश्किल से मुश्किल समस्या का भी तुम बड़ी आसानी से हल निकाल लेते हो।

— तुम्हारी वाणी में मिठास है। तुम एक बहुत अच्छे गायक हो। जब तुम गाते हो तो सभी मंत्रमुग्ध हो जाते है।

— तुम्हें पढ़ाई में सभी सब्जेक्ट अच्छे लगते है। जो भी पढ़ते हो बड़ी आसानी से याद हो जाता है।

गर्भ संवाद:
“धरती जितनी सहनशील और धैर्यवान है, वह हमें सिखाती है कि जीवन में कभी भी कोई कठिनाई हमेशा के लिए नहीं रहती। धरती कई तूफानों, बारिशों और धूप को सहन कर के भी हमें अपनी सुंदरता और समृद्धि देती रहती है। तुम्हें भी धरती की तरह धैर्य रखना चाहिए, क्योंकि समय के साथ हर परेशानी दूर हो जाती है। जीवन में जब भी मुश्किलें आएं, तो उन्हें धरती की तरह धैर्य से सहन करो, और फिर देखो कि सफलता कैसे तुम्हारे कदम चूमेगी।”

पहेली:
फ़ेद मुर्गी हरी पूंछ, 
तुझे न आये तो नानी से पूछ ।

कहानी: सास-बहू की सच्ची कहानी
किसी छोटे से गांव में कमला देवी नाम की एक बुजुर्ग महिला रहती थी। उनके बेटे का नाम अर्जुन था और बहू का नाम प्रिया। अर्जुन और प्रिया का विवाह हाल ही में हुआ था। प्रिया पढ़ी-लिखी और संस्कारी लड़की थी, जो अपने ससुराल में सभी को खुश रखने की कोशिश करती थी। लेकिन सास-बहू के रिश्ते में अक्सर एक दूरी बनी रहती थी।

कमला देवी को हमेशा ऐसा लगता था कि उनकी बहू ने उनके बेटे पर अधिकार जमा लिया है। वह छोटी-छोटी बातों पर प्रिया को टोकती रहती थीं। कभी खाने में नमक कम होने पर नाराज होतीं, तो कभी सफाई में कोई कमी देखकर गुस्सा करतीं।

प्रिया ने सास के हर ताने और शिकायत को सहन किया। वह जानती थी कि सास के मन में उसके लिए कोई दुर्भावना नहीं है, लेकिन उनकी आदतों के कारण दोनों के बीच तनाव बना रहता था।

एक दिन, गांव में एक बड़ा त्योहार आया। प्रिया ने अपनी सास के लिए एक नई साड़ी खरीदी और उनके लिए खुद से मिठाई बनाई। कमला देवी को जब प्रिया का यह समर्पण और प्यार महसूस हुआ, तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने कहा, “प्रिया, मुझे माफ कर दो। मैंने तुम्हें हमेशा गलत समझा। लेकिन आज मुझे एहसास हुआ कि तुम मुझे सच्चे दिल से अपना मानती हो।”

प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “मां जी, आपका प्यार और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। आप मेरे लिए मां जैसी हैं।”

उस दिन से सास-बहू के रिश्ते में नया मोड़ आ गया। दोनों के बीच प्यार और समझदारी बढ़ गई। वे एक-दूसरे की मदद करने लगीं और परिवार के हर सदस्य को खुश रखने के लिए मिलकर काम करने लगीं।

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि रिश्तों में गलतफहमियां दूर करने के लिए प्यार और समर्पण सबसे जरूरी है। जब हम सच्चे दिल से किसी का भला चाहते हैं, तो हर रिश्ता मजबूत और मधुर बन जाता है।

पहेली का उत्तर : मूली
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प्रार्थना:
प्रह्लाद, नारद, पाराशर, पुंडरीक, व्यास, अंबरीश, शूक, शौनक, भीष्म, दाल्भ्य, रूक्मांगद, अर्जुन, वशिष्ठ और विभीषण आदि इन परम पवित्र वैष्णवो का मै स्मरण करता हूं।
वाल्मीकि, सनक, सनंदन, तरु, व्यास, वशिष्ठ, भृगु, जाबाली, जमदग्नि, कच्छ, जनक, गर्ग, अंगिरा, गौतम, मांधाता, रितुपर्ण पृथु, सगर, धन्यवाद देने योग्य दिलीप और नल, पुण्यात्मा युधिष्ठिर, ययाति और नहुष ये सब हमारा मंगल करें।

मंत्र:
ॐ महाज्वालाय विद्महे। 
अग्निदेवाय धीमहि। 
तन्नो अग्निः प्रचोदयात्॥

अर्थः हे अग्निदेव! आप हमें ज्ञान, ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करें।

गर्भ संवाद
“मेरे बच्चे! बारिश की बूंदें जब गिरती हैं, तो वे जमीन को सिक्त और ताजगी से भर देती हैं। जैसे बारिश हर बार जीवन में बदलाव लाती है, वैसे ही तुम्हें भी हर बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। जीवन में बदलाव आते रहेंगे, और अगर तुम उन्हें सही ढंग से अपनाओगे, तो वही बदलाव तुम्हारे जीवन को नई दिशा देंगे। मैं चाहती हूं कि तुम बारिश की तरह हर बदलाव को खुलकर अपनाओ, क्योंकि वही बदलाव तुम्हें नई ऊर्जा और दिशा देगा।”

पहेली:
कभी बड़ा हो कभी हो छोटा, 
माह में एक दिन मारे गोता।

कहानी: दादा का आशीर्वाद
किसी छोटे से गांव में मोहन नाम का एक लड़का अपने दादा-दादी के साथ रहता था। मोहन के माता-पिता शहर में काम करते थे और साल में एक बार ही गांव आते थे। मोहन का अपने दादा के साथ बहुत गहरा रिश्ता था। उसके दादा, रामनाथ, गांव के सबसे समझदार और सम्मानित व्यक्ति थे।

दादा हर दिन मोहन को कहानियां सुनाते और जीवन के महत्वपूर्ण सबक सिखाते। वे कहते, “मोहन, जीवन में मेहनत और ईमानदारी से बढ़कर कुछ नहीं है। जो भी करो, पूरी लगन और समर्पण से करो।”

मोहन स्कूल में पढ़ाई में बहुत अच्छा था। लेकिन एक दिन, उसके स्कूल में एक खेल प्रतियोगिता आयोजित हुई। मोहन को उसमें भाग लेने के लिए चुना गया। हालांकि, मोहन को खेल में ज्यादा रुचि नहीं थी, और उसे डर था कि वह हार जाएगा।

मोहन ने अपने दादा से कहा, “दादा जी, मुझे इस प्रतियोगिता में भाग नहीं लेना चाहिए। मैं हार जाऊंगा, और सभी मेरा मजाक उड़ाएंगे।”

दादा ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, जीत या हार से ज्यादा महत्वपूर्ण है अपनी पूरी कोशिश करना। अगर तुम बिना कोशिश किए हार मान लोगे, तो कभी नहीं जान पाओगे कि तुम क्या कर सकते हो। मेहनत से हर असंभव चीज संभव हो जाती है।”

दादा की बातों ने मोहन को प्रेरित किया। उसने प्रतियोगिता में भाग लिया और पूरे दिल से मेहनत की। आखिरकार, मोहन ने वह प्रतियोगिता जीत ली और स्कूल का नाम रोशन किया।

जब मोहन ट्रॉफी लेकर घर आया, तो उसने अपने दादा से कहा, “यह जीत आपकी वजह से है, दादा जी! आपके आशीर्वाद और सीख ने मुझे प्रेरित किया।”

दादा ने मोहन को गले लगाते हुए कहा, “यह तुम्हारी मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम है। बस याद रखना, जीवन में कभी डरकर पीछे मत हटना।”

उस दिन के बाद, मोहन ने दादा की सीख को अपने जीवन का हिस्सा बना लिया। वह हर काम में अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी से जुट जाता और हर बार सफलता हासिल करता।

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बड़ों का आशीर्वाद और उनके द्वारा दी गई सीख हमारे जीवन को बदल सकती है। मेहनत और आत्मविश्वास से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।

पहेली का उत्तर : चंद्रमा
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प्रार्थना:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

भावार्थ: हम उस त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते है जो अपनी शक्ति से इस संसार का पालन-पोषण करते है उनसे हम प्रार्थना करते है कि वे हमें इस जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त कर दे और हमें मोक्ष प्रदान करें। जिस प्रकार से एक ककड़ी अपनी बेल से पक जाने के पश्चात् स्वतः की आज़ाद होकर जमीन पर गिर जाती है उसी प्रकार हमें भी इस बेल रुपी सांसारिक जीवन से जन्म मृत्यु के सभी बन्धनों से मुक्ति प्रदान कर मोक्ष प्रदान करें।

मंत्र:
माता यत्र सहोदयात्मा शरणं शान्तिदायकं। 
शान्तिमंत्रं शृणु सम्यक् सर्वं सुखं भविष्यति।

अर्थः माँ का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। वह शान्तिदायक और सुख देने वाली होती हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में हर प्रकार की शांति और सुख की प्राप्ति होती है।

गर्भ संवाद
“मेरे प्यारे बच्चे! सूर्यास्त के समय जो शांति होती है, वह हमें सिखाती है कि हर दिन का अंत भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना उसका आरंभ। जैसे सूर्य दिन भर की यात्रा के बाद शांतिपूर्वक अस्त होता है, वैसे ही तुम्हें अपने दिन का अंत भी शांति से करना चाहिए। सूर्यास्त की शांति हमें यह याद दिलाती है कि दिन का काम खत्म होने पर हमें अपने दिल और दिमाग को शांति देनी चाहिए। मैं चाहती हूं कि तुम भी हर दिन को इस शांति के साथ समाप्त करो और अगले दिन के लिए तैयार हो जाओ।”

पहेली:
काली काली एक चुनरिया, 
जगमग जगमग मोती, 
आ सजती धरती के ऊपर, 
जब सारी दुनिया सोती।

कहानी: खुद पर भरोसा रखो
किसी छोटे से गांव में एक लड़का रहता था, जिसका नाम रघु था। रघु बहुत गरीब परिवार से था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। उसे चित्रकार बनना था। जब भी वह खेतों या जंगल में जाता वह अपनी छोटी सी नोटबुक में सुंदर चित्र बनाता। उसके चित्र बहुत अद्भुत थे, लेकिन किसी ने उसकी कला को गंभीरता से नहीं लिया।

गांव के लोग कहते, “रघु, चित्रकारी से पेट नहीं भरता। तुम्हें कुछ ऐसा काम करना चाहिए, जिससे पैसा कमाया जा सके।” यहां तक कि उसके परिवार ने भी उसे समझाने की कोशिश की, “बेटा, यह सब शौक के लिए ठीक है, लेकिन असल जिंदगी में मेहनत से ही गुजारा होता है।” 

लेकिन रघु को अपनी कला पर भरोसा था। उसने मन ही मन ठान लिया कि वह अपनी मेहनत से सबको दिखाएगा कि चित्रकारी भी एक सफल करियर हो सकता है।

एक दिन, गांव में एक प्रदर्शनी आयोजित हुई। इसमें गांव के लोग अपनी कला और शिल्प का प्रदर्शन करते थे। रघु ने अपने चित्रों को वहां प्रदर्शित करने का फैसला किया। हालांकि, उसके पास पैसे नहीं थे कि वह अच्छे फ्रेम बनवा सके, लेकिन उसने अपनी साधारण सामग्री का उपयोग कर चित्र तैयार किए।

प्रदर्शनी में रघु के चित्रों को देखकर लोगों ने सराहा, लेकिन किसी ने चित्र नहीं खरीदे। रघु निराश हो गया। उसे लगा कि शायद वह अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाएगा।

तभी, एक बूढ़े व्यक्ति ने उसके पास आकर कहा, “तुम्हारे चित्र अद्भुत हैं, लेकिन तुम्हें खुद पर भरोसा करना होगा। अगर तुम अपनी कला में विश्वास नहीं रखोगे, तो कोई और भी नहीं करेगा। मेहनत करते रहो, और एक दिन तुम्हारी कला को दुनिया पहचानेगी।”

उस बूढ़े व्यक्ति की बातें रघु के दिल में उतर गईं। उसने अपनी मेहनत दोगुनी कर दी। वह दिन-रात अभ्यास करता और अपनी कला को निखारने में लगा रहता। कुछ महीनों बाद, एक प्रसिद्ध चित्रकार गांव में आया और रघु के चित्र देखे। वह उसकी कला से इतना प्रभावित हुआ कि उसने रघु को शहर आने का न्योता दिया।

शहर में रघु ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, और वहां के लोगों ने उसकी प्रतिभा को सराहा। उसकी चित्रकारी की सराहना बढ़ती गई, और वह एक प्रसिद्ध चित्रकार बन गया।

रघु ने गांव लौटकर अपने उन चित्रों को दिखाया, जिन्हें एक समय किसी ने नहीं सराहा था। उसने कहा, “अगर मैं खुद पर भरोसा न करता, तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंच पाता। हर व्यक्ति की सफलता उसके विश्वास और मेहनत पर निर्भर करती है।”

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि खुद पर भरोसा और निरंतर मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है। दूसरों की बातों से हतोत्साहित होने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

पहेली का उत्तर : रात
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प्रार्थना:
राजाओं में श्रेष्ठ श्रीराम सदा विजय को प्राप्त करते हैं। मैं लक्ष्मीपति भगवान् श्रीराम का भजन करता हूँ। सम्पूर्ण राक्षस सेना का नाश करने वाले श्रीराम को मैं नमस्कार करता हूँ। श्रीराम के समान अन्य कोई आश्रयदाता नहीं। मैं उन शरणागत वत्सल का दास हूँ। मैं हमेशा श्रीराम मैं ही लीन रहूँ। हे श्रीराम! आप मेरा (इस संसार सागर से) उद्धार करें।

मंत्र:
मातृदेवो भव पितृदेवो भव। 
आचार्यदेवो भव ब्राह्मणदेवो च।

अर्थः माँ और पिता को देवता के समान सम्मान देना चाहिए। आचार्य और ब्राह्मण का भी सम्मान करना जीवन के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

गर्भ संवाद:
“मेरे प्यारे बच्चे! वृक्ष अपनी जड़ों के जरिए पृथ्वी से जुड़े होते हैं, और उनकी जड़ें उन्हें स्थिर बनाए रखती हैं। तुम्हें भी अपने परिवार, समाज और संस्कृति से जुड़ा रहना चाहिए क्योंकि यही तुम्हें स्थिरता और ताकत देगा। जैसे पेड़ अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए ऊंचे और मजबूत होते हैं, वैसे ही तुम भी अपने परिवार और समाज के साथ जुड़कर अपनी शक्ति और पहचान को मजबूत कर सकते हो। मैं चाहती हूं कि तुम अपने परिवार और समाज से हमेशा जुड़े रहो, क्योंकि यही तुम्हारा सबसे बड़ा सहारा होगा।”

पहेली:
छोटा हूँ पर बड़ा कहलाता, 
रोज दही की नदी में नहाता।

कहानी: सफलता की कहानी
एक बड़े शहर में एक युवक रहता था, जिसका नाम अमन था। अमन का सपना था कि वह एक सफल उद्यमी बने। वह दिन-रात मेहनत करता और अपनी योजना पर काम करता। लेकिन सफलता उसकी पहुंच से दूर लगती थी।

अमन ने एक बार छोटे स्तर पर एक व्यापार शुरू किया, लेकिन वह असफल हो गया। उसे बड़ा नुकसान हुआ। उसके दोस्तों और परिवार वालों ने कहा, “तुम्हें अब यह सब छोड़ देना चाहिए। यह तुम्हारे बस की बात नहीं है।”

लेकिन अमन ने हार नहीं मानी। उसने अपनी असफलताओं से सबक लिया और अपने व्यापार को नए सिरे से शुरू करने की योजना बनाई। उसने अपनी गलतियों पर काम किया और एक नई योजना बनाई।

अमन ने एक छोटे से किराए की दुकान में काम शुरू किया। शुरू में, ग्राहक कम आते थे। वह निराश होता, लेकिन उसने खुद को हर दिन प्रेरित किया। वह अपने आप से कहता, “सफलता का रास्ता कठिन होता है, लेकिन अगर मैंने हार मान ली, तो मैं कभी नहीं जान पाऊंगा कि मैं क्या कर सकता हूं।”

धीरे-धीरे, अमन की मेहनत रंग लाई। उसके व्यापार में सुधार होने लगा, और ग्राहक उसकी सेवाओं को पसंद करने लगे। उसने अपनी सेवाओं में गुणवत्ता पर ध्यान दिया और ग्राहकों की जरूरतों को समझा।

कुछ सालों बाद, अमन का छोटा सा व्यापार एक बड़ी कंपनी में बदल गया। वह अब एक सफल उद्यमी बन चुका था। उसने अपनी सफलता के सफर में अपनी मेहनत और धैर्य को सबसे बड़ा कारण बताया।

एक दिन, एक पत्रकार ने अमन से पूछा, “आपकी सफलता का राज क्या है?”

अमन ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरी सफलता का राज है मेरी असफलताएं। हर असफलता ने मुझे कुछ नया सिखाया और मुझे मजबूत बनाया। अगर आप असफल होते हैं, तो इसका मतलब है कि आप कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं। और यही सबसे बड़ी बात है।”

अमन ने अपने अनुभव से यह भी बताया कि सफलता केवल मेहनत और धैर्य से ही मिलती है। उसने कहा, “हमेशा याद रखें, सफलता रातोंरात नहीं मिलती। यह छोटी-छोटी कोशिशों और धैर्य का परिणाम होती है।”

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सफलता का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन असफलताओं से डरकर हार मान लेना सही नहीं है। असफलताएं हमें बेहतर बनने का मौका देती हैं और धैर्य के साथ किए गए प्रयास हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचाते हैं।

पहेली का उत्तर : दही बड़ा
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प्रार्थना:
दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना, 
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना। 
हमारे ध्यान में आओ, प्रभु आँखों में बस जाओ, 
अँधेरे दिल में आकर के परम ज्योति जगा देना।
बहा दो प्रेम की गंगा, दिलों में प्रेम का सागर, 
हमे आपस में मिलजुल के प्रभु रहना सीखा देना। 
हमारा कर्म हो सेवा, हमारा धर्म हो सेवा,
सदा ईमान हो सेवा, वो सेवक चर बना देना। 
वतन के वास्ते जीना, वतन के वास्ते मरना, 
वतन पे जा फ़िदा करना, प्रभु हमको सीखा देना।
 दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में शुद्धता देना। 

मंत्र:
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः। 
सर्वे सन्तु निरामयाः। 
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। 
मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥

अर्थः सब लोग सुखी रहें। 
सब लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहें। 
किसी को भी कष्ट न हो।

गर्भ संवाद:
“बर्फ जितनी शांत होती है, उसकी शांति हमें सिखाती है कि जीवन में जब भी कोई कठिनाई आए, तो हमें शांत और स्थिर रहना चाहिए। बर्फ का ठंडापन और स्थिरता हमें यह समझाती है कि जब बाहर की दुनिया गरम और उथल-पुथल हो, तो हमें अपने भीतर शांति बनाए रखनी चाहिए। जब तुम शांति से रहोगे, तो जीवन की हर मुश्किल को आसानी से पार कर सकोगे। मैं चाहती हूं कि तुम हर परिस्थिति में शांत और संतुलित रहो, ताकि तुम्हारे निर्णय सही और समझदारी से भरे हों।”

पहेली:
दूध की कटोरी में काला पत्थर, 
जल्दी से तुम बताओ सोचकर।

कहानी: रक्षाबंधन का वचन
किसी छोटे से गांव में आर्या और आर्यन नाम के भाई-बहन रहते थे। दोनों का रिश्ता बहुत खास था। वे एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। आर्या बड़ी बहन थी, जो हमेशा आर्यन को सही रास्ता दिखाती और उसकी परवाह करती थी। वहीं, आर्यन अपने बचपन से ही बहन का रक्षक था।

हर साल रक्षाबंधन के दिन आर्या, आर्यन की कलाई पर राखी बांधती और आर्यन वचन देता कि वह हमेशा उसकी रक्षा करेगा। यह वचन केवल शब्दों तक सीमित नहीं था; यह उनके जीवन का हिस्सा बन चुका था। 

एक साल, रक्षाबंधन के कुछ दिन पहले, गांव में एक डरावनी खबर फैली। कहा गया कि पास के जंगल से कुछ डाकू गांव पर हमला करने वाले हैं। गांव के लोग डर से सहमे हुए थे। आर्या भी इस खबर से चिंतित थी। उसने आर्यन से कहा, “भैया, अगर कुछ बुरा हुआ तो तुम मेरी और गांव की रक्षा करोगे, न?”

आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा, “दीदी, तुमने हर साल राखी बांधकर मुझसे यह वचन लिया है कि मैं तुम्हारी रक्षा करूंगा। मैं अपने वचन को कभी टूटने नहीं दूंगा।”

रक्षाबंधन के दिन, आर्या ने आर्यन की कलाई पर राखी बांधी और भगवान से प्रार्थना की कि वह उसके भाई को हर खतरे से सुरक्षित रखे। उसी दिन शाम को डाकुओं ने गांव पर हमला कर दिया।

डाकू बहुत संख्या में थे और गांव के लोग डरे हुए थे। लेकिन आर्यन ने साहस दिखाया। उसने गांव के सभी युवाओं को इकट्ठा किया और उन्हें योजना बनाकर डाकुओं का सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने डाकुओं को घेरकर गांव से भगा दिया।

डाकुओं के जाने के बाद, पूरे गांव ने आर्यन की बहादुरी की तारीफ की। आर्या की आंखों में आंसू थे। उसने कहा, “भैया, तुम्हारा दिया हुआ वचन ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है। तुमने न केवल मेरी, बल्कि पूरे गांव की रक्षा की।” 

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन का त्योहार नहीं है, बल्कि विश्वास, प्रेम और जिम्मेदारी का प्रतीक है। भाई का दिया हुआ वचन केवल बहन के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा का संदेश है।

पहेली का उत्तर : आँख
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प्रार्थना:
मैं उमापति, देवगुरू, जो ब्रह्मांड के कारण हैं, को नमन करता हूँ। मैं उनको नमन करता हूँ जिनका आभूषण सर्प है, जो मृगधर हैं एवं जो सभी प्राणियों के स्वामी हैं। सूर्य, चंद्रमा और अग्नि जिनके तीन नेत्र हैं और जो विष्णु प्रिय हैं, मैं उन्हें नमन करता हूँ। मैं भगवान शंकर को नमन करता हूँ जो सभी भक्तों को शरण देने वाले हैं, वरदानों के दाता हैं एवं कल्याणकारी हैं।

मंत्र:
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। 
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम् ॥

अर्थ: हे क्रुद्ध एवं शूरवीर महाविष्णु, आपकी ज्वाला एवं ताप चतुर्दिक फैली हुई है। हे नरसिंहदेव, तुम्हारा चेहरा सर्वव्यापी है, आप मृत्यु के भी यम हो और मैं आपके समक्ष आत्मसमर्पण करता हूँ।

गर्भ संवाद
“सूरज हर सुबह बिना थके, बिना किसी रुकावट के चमकता है और अपनी रोशनी से पूरी दुनिया को रोशन करता है। तुम्हें भी सूरज की तरह हर दिन चमकना चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। तुम्हारे पास अपनी अच्छाई और सकारात्मकता से इस दुनिया को रोशन करने की शक्ति है। जब तुम अपने भीतर की रोशनी को पहचानोगे और उसे दुनिया के सामने लाओगे, तो हर दिन तुम्हारे लिए एक नई शुरुआत बनेगा।”

पहेली:
चाची के दो कान, 
चाचा के नहीं कान, 
चाची अति सुजान, 
चाचा को कुछ न ज्ञान

कहानी: संक्रांति का त्योहार
एक छोटे से गांव में मकर संक्रांति का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जाता था। यह दिन न केवल फसल कटाई का प्रतीक था, बल्कि गांववालों के लिए खुशी और एकता का अवसर भी था।

गांव में रोहित नाम का एक युवक था, जो हर साल मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता आयोजित करता था। वह इस त्योहार को बहुत महत्व देता था और मानता था कि यह दिन नई शुरुआत और नई ऊर्जा का प्रतीक है।

इस साल की मकर संक्रांति खास थी, क्योंकि गांव में पहली बार पतंगबाजी के अलावा खेलों की प्रतियोगिता भी आयोजित होने वाली थी। गांव के सभी लोग इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

रोहित ने इस बार ठान लिया था कि वह पतंगबाजी प्रतियोगिता में जीत हासिल करेगा। उसने महीनों तक मेहनत की, नई पतंगें तैयार कीं और खुद को हर तरह से तैयार किया।

त्योहार का दिन आया। गांव के लोग सुबह से ही तैयारियों में जुट गए। महिलाओं ने तिल के लड्डू बनाए, बच्चे नए कपड़े पहनकर खेलों में भाग लेने के लिए तैयार हुए, और पुरुष पतंगबाजी की प्रतियोगिता के लिए उत्साहित थे।

रोहित ने अपनी सबसे सुंदर पतंग उड़ाई। उसके पतंग की ऊंचाई देखकर लोग हैरान थे। लेकिन तभी, गांव का एक छोटा लड़का, मनु, जो पहली बार प्रतियोगिता में भाग ले रहा था, अपनी पतंग उड़ाने लगा। मनु की पतंग ने रोहित की पतंग को काट दिया।

रोहित ने इस हार को स्वीकार किया और मनु को बधाई दी। उसने कहा, "इस त्योहार का असली मतलब प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि खुशी और मिलजुलकर जश्न मनाना है। तुमने यह साबित किया कि मेहनत और उत्साह से हर कोई जीत सकता है।"

शाम को गांव के बुजुर्गों ने सबको इकट्ठा किया और कहा, “मकर संक्रांति केवल पतंगबाजी या उत्सव का दिन नहीं है। यह हमें सिखाता है कि जीवन में हर चुनौती को नए उत्साह और ऊर्जा के साथ स्वीकार करना चाहिए। यह त्योहार हमें एक नई दिशा और सकारात्मकता का संदेश देता है।”

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मकर संक्रांति का त्योहार केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह नई ऊर्जा, नई शुरुआत, और एकता का प्रतीक है। जीवन में हर हार और जीत को सकारात्मकता के साथ स्वीकार करना चाहिए।

पहेली का उत्तर : तवा और कढ़ाई
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प्रार्थना:
हम ईश्वर की महिमा का ध्यान करते हैं, जिन्होंने इस संसार को उत्पन्न किया है, जो पूजनीय हैं और ज्ञान के भंडार हैं, जो पापों तथा अज्ञानता को दूर करने वाले हैं वे हमें प्रकाश दिखाएँ और सत्य के मार्ग पर ले जाऐं।

मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे। 
महादेवाय धीमहि। 
तन्नो: शिवः प्रचोदयात्॥

अर्थः हे महादेव! आप हमें सन्मार्ग और ज्ञान का प्रकाश दें।

गर्भ संवाद 
— मेरे प्यारे शिशु, मेरे राज दुलार, मैं तुम्हारी माँ हूँ.......माँ !

— मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ, तुम मेरे गर्भ में पूर्ण रूप से सुरक्षित हो, तुम हर क्षण पूर्ण रूप से विकसित हो रहे हो।

— तुम मेरे हर भाव को समझ सकते हो क्योंकि तुम पूर्ण आत्मा हो।

— तुम परमात्मा की तरफ से मेरे लिए एक सुन्दरतम तोहफा हो, तुम शुभ संस्कारी आत्मा हो, तुम्हारे रूप में मुझे परमात्मा की दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, परमात्मा ने तुम्हें सभी विलक्षण गुणों से परिपूर्ण करके ही भेजा है, परमात्मा की दिव्य संतान के रूप में तुम दिव्य कार्य करने के लिए ही आए हो। मेरे बच्चे! तुम
ईश्वर का परम प्रकाश रूप हो, परमात्मा की अनंत शक्ति तुम्हारे अंदर विद्यमान है, ईश्वर का तेज तुम्हारे माथे पर चमक रहा है, परमात्मा के प्रेम की चमक तुम्हारी आँखों में दिखाई देती है, तुम ईश्वर के प्रेम का साक्षात भण्डार हो, तुम परमात्मा के एक महान उद्देश्य को लेकर इस संसार में आ रहे हो, परमात्मा ने तुम्हें इंसान रूप में इंसानियत के सभी गुणों से भरपूर किया है।

— तुम हर इंसान को परमात्मा का रूप समझते हो, और सभी के साथ प्रेम का व्यवहार करते हो, तुम जानते हो अपने जीवन के महानतम लक्ष्य को, तुम्हें इस संसार की सेवा करनी है, सभी से प्रेम करना है, सभी की सहायता करनी है, और परमात्मा ने जो विशेष लक्ष्य तुम्हें दिया है, वह तुम्हें अच्छे से याद रहेगा।

— परमात्मा की भक्ति में तुम्हारा मन बहुत लगता है, तुम प्रभु के गुणों का गायन करके बहुत खुश होते हो, तुम्हारे रोम-रोम में प्रभु का प्रेम बसा हुआ है। स्त्रियों के प्रति तुम विशेष रूप से आदर का भाव अनुभव करते हो, सभी स्त्रियों को सम्मान की दृष्टि से देखते हो।

— तुम्हारा उद्देश्य संसार में सबको खुशियाँ बाँटना है, सब तरह से आजाद रहते हुए तुम सबको कल्याण का मार्ग दिखाने आ रहे हो, परमात्मा से प्राप्त जीवन से तुम पूर्ण रूप से संतुष्ट हो, तुम सदैव परमात्मा के साये में सुरक्षित हो।

— मानव जीवन के संघर्षो को जीतना तम्हें खूब अच्छी तरह से आता है, जीवन के प्रत्येक कार्य को करने का तुम्हारा तरीका बहुत प्यारा है, जीवन की हर परेशानी का हल ढूँढने में तुम सक्षम हो, तुम हमेशा अपने जीवन के परम लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहोगे।

— मेरी तरह तुम्हारे पिता भी तुम्हें देखने के लिए आतुर हैं, मेरा और तुम्हारे पिता का आशीष सदैव तुम्हारे साथ है।

— यह पृथ्वी हमेशा से प्रेम करने वाले अच्छे लोगों से भरी हुई है, यह सृष्टि परमात्मा की अनंत सुंदरता से भरी हुई है, यहाँ के सभी सुख तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं, गर्भावस्था का यह सफर तुम्हें परमात्मा के सभी दैविक संस्कारों से परिपूर्ण कर देगा।

—घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है।

पहेली:
पाँच अक्षर का मेरा नाम, 
उल्टा-सीधा एक समान।

कहानी: संकट में मां की शक्ति
एक छोटे से गांव में कमला नाम की एक महिला रहती थी। वह विधवा थी और अपने छोटे बेटे राहुल के साथ रहती थी। कमला ने अपनी पूरी जिंदगी राहुल के लिए समर्पित कर दी थी। वह खेतों में दिन-रात काम करती और अपने बेटे को पढ़ाई के लिए प्रेरित करती।

एक दिन गांव में अचानक बाढ़ आ गई। यह बाढ़ इतनी भयंकर थी कि उसने गांव के घरों और खेतों को बर्बाद कर दिया। कमला का घर भी पानी में डूब गया। वह और राहुल एक ऊंची जगह पर शरण लेने के लिए भागे।

पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा था। कमला ने देखा कि उनके पास बचने के लिए ज्यादा समय नहीं था। उसने राहुल को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का निर्णय लिया। लेकिन रास्ते में तेज धार में बहते पेड़ों और मलबे के कारण उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं।

कमला ने अपनी सारी ताकत और साहस जुटाया। वह राहुल को अपनी पीठ पर बांधकर पानी में चलने लगी। पानी का बहाव तेज था, लेकिन उसने हार नहीं मानी। उसने राहुल से कहा, “बेटा, तुम्हें कुछ नहीं होगा। तुम्हारी मां तुम्हारी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगी।”

कई घंटों के संघर्ष के बाद, कमला राहुल को एक सुरक्षित स्थान पर ले जाने में सफल रही। वहां पर गांव के अन्य लोग भी शरण लिए हुए थे। सभी ने कमला की हिम्मत और ममता की तारीफ की।

इस घटना के बाद, राहुल ने अपनी मां से कहा, “मां, आज मैंने देखा कि आप कितनी शक्तिशाली हैं। आपने मुझे सिखाया कि हर संकट का सामना साहस और धैर्य से करना चाहिए।”

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मां की ममता और ताकत किसी भी संकट से बड़ी होती है। जब बात अपने बच्चों की होती है तो मां हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहती है। 

पहेली का उत्तर : मलयालम
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प्रार्थना:
हे ईश्वर आप ही इस धरती और इस ब्रह्मांड के निर्माणकर्ता हो। आप सभी के जीवन के कर्ता-धर्ता है, आप ही सभी प्राणियों के सुख-दुख को हरने वाले हो। हे ईश्वर हमें सुख-शांति का रास्ता दिखाने का उपकार करें। हे श्रृष्टि के रचियता! हे परमपिता परमेश्वर! हमारी आपसे यही विनती है कि आप मुझे सद्बुद्धि प्रदान करें और हमारे जीवन को उज्जवल बनाए।

मंत्र:
ॐ एकदन्ताय विद्महे 
वक्रतुंडाय धीमहि 
तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात॥

अर्थ: हम भगवान गणपति, जिनके हाथी के दांत हैं और जो सर्वव्यापी है, उनको नमन करते हैं। हम भगवान गणेश जी से प्रार्थना करते हैं कि हमें अधिक बुद्धि प्रदान करें और हमारे जीवन को ज्ञान से रोशन कर दें। हम आपके सामने नतमस्तक होते हैं। 

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु, मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ हूँ …… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ महानतम गुणों की याद दिला रही हूँ जो तुम्हें परमात्मा का अनमोल उपहार हैं।

— प्रेम स्वरूप परमात्मा का अंश होने के कारण तुम्हारा हृदय भी प्रेम से भरपूर है, तुम्हारी हर अदा में परमात्मा का प्रेम झलकता है।

— तुम्हारे हृदय में सम्पूर्ण मानवमात्र के प्रति समभाव है।

— तुम्हारा हृदय सबके लिए दया और करुणा से भरपूर रहता है।

— क्षमाशीलता के गुण के कारण सभी तुम्हारा सम्मान करते हैं, जिससे तुम्हारा स्वभाव और विनम्र हो जाता है।

— नम्रता तुम्हारा विशेष गुण है।

— मेरे बच्चे। तुम्हारा प्रत्येक कार्य सेवा-भाव से परिपूर्ण होता है।

— सहनशीलता तुम्हारा स्वाभाविक गुण है।

— धैर्यपूर्वक प्रत्येक कार्य को करना तुम्हारी महानता है।

— तुम्हारा मन आंतरिक रूप से स्थिर और शांत है।

— मेरे बच्चे! तुम बल और साहस के स्वामी हो।

— तुम अनुशासन प्रिय हो।

— कृतज्ञता का गुण तुम्हारे व्यवहार की शोभा बढ़ाता है।

— तुम अपनो से बड़ों को सम्मान और छोटों को प्रेम देते हो।

— तुम भाव से बहुत भोले हो लेकिन जरूरत पड़ने पर अपनी कठोरता भी दिखाते हो।

— तुम अपनो से छोटों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत हो।

— तुम सत् और असत के पारखी हो।

— तुम्हारा व्यवहार चन्द्रमा के समान शीतल है।

— तुम सबसे इतना मीठा बोलते हो कि सभी तुम पर मोहित हो जाते हैं।

— तुम्हारा व्यक्तित्व परम प्रभावशाली है।

— तुम हमेशा सत्य बोलना ही पसंद करते हो।

— तुम हाजिर जवाबी हो।

— तुम्हारे मुख से निकला एक-एक शब्द मधुर और आकर्षक होता है।

— तुम मन, वचन और कर्म से पवित्र हो।

— घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है। तुम्हारे रूप में मुझे जैसे दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, तुम्हे पाकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ। जल्द ही इस सुन्दर संसार में तुम्हारा आगमन होगा। तुम्हारा स्वागत करने के लिए सभी बेचैन हैं।

पहेली:
न ही मैं खाता हूँ, 
न ही मैं पीता हूँ, 
फिर भी सबके घरों की, 
मैं रखवाली करता हूँ।

कहानी: मां का आशीर्वाद
किसी छोटे से शहर में एक लड़का अर्जुन, रहता था। उसका सपना था कि वह एक दिन डॉक्टर बने। अर्जुन बहुत होशियार था, लेकिन उसके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। उसकी मां रमा, घर-घर जाकर काम करती थी ताकि वह अर्जुन की पढ़ाई का खर्च उठा सके।

रमा हर सुबह जल्दी उठती और अर्जुन के लिए टिफिन बनाकर काम पर चली जाती। वह दिनभर मेहनत करती और अपनी छोटी-छोटी बचत को अर्जुन की शिक्षा में लगाती। अर्जुन अपनी मां की मेहनत देखकर प्रेरित होता और और अधिक मेहनत करता।

एक दिन, अर्जुन को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए एक परीक्षा देनी थी। यह परीक्षा उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा अवसर था। लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले, रमा बीमार हो गई। अर्जुन परेशान हो गया और उसने सोचा कि वह परीक्षा देने नहीं जाएगा।

रमा ने उसे बुलाया और कहा, “बेटा, यह मौका तुम्हारे सपने को पूरा करने का है। मेरी तबीयत की चिंता मत करो। मैं जानती हूं कि तुम यह परीक्षा पास करोगे। मेरी मेहनत का फल तुम्हारी सफलता है।”

अर्जुन ने मां की बात मानी और परीक्षा दी। उसने पूरी लगन और मेहनत से उत्तर लिखे। कुछ हफ्तों बाद, जब परिणाम आया, तो अर्जुन ने पूरे राज्य में टॉप किया। उसे एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला।

अर्जुन अपनी मां के पास गया और उसके पैर छूकर कहा, “मां, यह सब आपके आशीर्वाद और मेहनत की वजह से हुआ है। आपने मेरे लिए जो किया है, मैं उसका कर्ज कभी नहीं चुका सकता।”

शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि मां का आशीर्वाद और उसकी मेहनत बच्चों की सफलता की सबसे बड़ी ताकत होती है। मां का समर्पण और प्रेम हर बच्चे को प्रेरणा देता है.

पहेली का उत्तर : ताला
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प्रार्थना:
प्रार्थना है यही मेरी, हनुमान जी, 
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए, 
राम सीता का दर्शन कराके मुझे, 
मेरे सपने को साकार कर दीजिए ॥

दुख देते है मुझे मेरे ही पाप, 
मेरे मन में है क्या, जानते आप हैं, 
आप हर रूप है इसलिए कर कृपा, 
मेरे हर एक संकट को हर लीजिए, 
प्रार्थना है यही मेरी, हनुमान जी, 
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,

मैं भावुक तो हूं पर नहीं भक्त हूं, 
इसी कारण तो विषयों में आसक्त हूं 
वासना मुक्त कर मेरे मन को प्रभु 
राम सीता की भक्ति से भर दीजिए, 
प्रार्थना है यही मेरी, हनुमान जी, 
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,

तन निरोगी रहे, धन भी भरपुर हो, 
मन भजन में रहे, द्वंद्व दुख दूर हो, 
कर्ज भी ना रहे, मर्ज भी ना रहे, 
फर्ज निभाते रहे ऐसा वर दीजिए, 
प्रार्थना है यही मेरी, हनुमान जी, 
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,

मैं कथा भी कहूं सियाराम की, 
मैं भक्ति भी करूं तो सिया राम की, 
मेरे हर एक संकट को हर लीजिये ,
प्रार्थना है यही मेरी, हनुमान जी, 
मेरे सर पर भी अब हाथ धर दीजिए,

मंत्र:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये । 
अमृतकलश हस्ताय सर्वामय विनाशनाय । 
त्रैलोक्यनाथाय श्री महाविष्णवे नमः।।

अर्थः हे भगवान धन्वंतरि! आप हमें आरोग्य और सभी रोगों से मुक्ति प्रदान करें।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु, मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ भौतिक गुणों की याद दिला रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार हैं।

— परम तेजस्वी ईश्वर का अंश होने के कारण तुम्हारे मुख पर सूर्य के समान दिव्य तेज और ओज रहता है।

— तुम्हारे नैन-नक्श तीखे और बहुत सुन्दर है, तुम्हारा सुन्दर मुखड़ा सबको बहुत प्यारा लगता है।

— तुम्हारे चेहरे का रंग गोरा और सबका मन मोह लेने वाला है।

— तुम्हारी हर अदा सुन्दरतम ईश्वर की झलक लिए हुए है, तुम्हारा माथा चौड़ा है, तुम्हारी आँखें बड़ी है, तुम्हारी भौहें तीर के आकार की तरह बड़ी है, तुम्हारी पलकें काली और बड़ी हैं।

— तुम्हारे होंठ फूल की तरह कोमल और सुन्दर हैं, तुम्हारे चेहरे पर हर पल एक मधुर मुस्कान छाई रहती है।

— तुम्हारी बुद्धि कुशाग्र है, तुम्हारी वाणी मधुर और सम्मोहन करने वाली है।

— तुम बहुत अच्छे खिलाडी हो, तुम्हारा शरीर तंदुरुस्त और फुर्तीला है। (किसी विशेष खेल के प्रति शिशु के मन में प्रतिभा विकसित करनी हो तो यहाँ कह सकते हैं)

— तुम बहुत सुंदर दिखते हो, बड़े होने पर भी तुम्हारी सुंदरता और निखरती जाएगी।

— तुम्हारी हर अदा बहुत निराली और अनोखी है।

— घर के सभी सदस्यों का आशीर्वाद सदा तुम्हारे साथ है। तुम्हारे रूप में मुझे जैसे दिव्य संतान प्राप्त हो रही है, तुम्हे पाकर में बहुत प्रसन्न हूँ, जल्द ही इस सुन्दर संसार में तुम्हारा आगमन होगा। तुम्हारा स्वागत करने के लिए सभी बेचैन है।

पहेली:
मध्य कटे तो सास बन जाऊँ, 
अंत कटे तो सार समझाऊँ, 
मैं हूँ पंक्षी, रंग सफ़ेद, 
बताओ मेरे नाम का भेद।

कहानी: अहंकार का पतन
बहुत समय पहले, एक राज्य में राजा सूरजसेन का शासन था। सूरजसेन एक बहुत ही शक्तिशाली और समृद्ध राजा थे। उनकी सेना बड़ी थी, उनके राज्य में प्रजा सुखी थी और उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली हुई थी। लेकिन समय के साथ, सूरजसेन के मन में घमंड घर कर गया। उन्हें लगने लगा कि उनकी शक्ति और संपत्ति के सामने कोई नहीं टिक सकता। उन्होंने अपने मंत्रियों और प्रजा के साथ भी कठोर व्यवहार करना शुरू कर दिया।

एक दिन, एक वृद्ध साधु उनके दरबार में आया। साधु ने राजा से कहा, “महाराज, मैंने सुना है कि आप सबसे महान और शक्तिशाली राजा हैं। लेकिन क्या आप मुझे यह बता सकते हैं कि इस शक्ति और घमंड का अंत कब होगा?”

राजा को यह सवाल बहुत अजीब लगा। उन्होंने क्रोधित होकर साधु से कहा, "मेरी शक्ति और सामर्थ्य का कोई अंत नहीं है। मैं हमेशा के लिए महान रहूँगा।"

साधु मुस्कराया और बोला, "महाराज, हर चीज का अंत होता है। घमंड उस पत्थर के समान है, जो अपने वजन के कारण पानी में डूब जाता है। मैं आपको एक सलाह देना चाहता हूँ। कृपया इसे ध्यान से सुनिए।"

राजा ने साधु की बात को नजरअंदाज कर दिया। वह अपने घमंड में इतना खो गया था कि उसने साधु को महल से बाहर निकालने का आदेश दे दिया।

कुछ महीनों बाद, पड़ोसी राज्य के राजा ने सूरजसेन के राज्य पर आक्रमण कर दिया। राजा ने अपनी बड़ी सेना और ताकत पर भरोसा किया, लेकिन उसने अपने मंत्रियों की सलाह को नजरअंदाज कर दिया। वह सोचता था कि वह खुद ही सब कुछ संभाल लेगा। लेकिन युद्ध में राजा की सेना हार गई, और राजा को अपना राज्य खोना पड़ा।

अब राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि उसका घमंड ही उसकी हार का कारण बना। उसने उस साधु को ढूँढा और उससे माफी माँगी। साधु ने कहा, “महाराज, अब आपने अपनी गलती समझ ली है। घमंड विनाश का कारण बनता है, और विनम्रता ही सच्ची ताकत है।”

उस दिन के बाद, राजा ने अपने घमंड को त्याग दिया और अपने राज्य का पुनर्निर्माण विनम्रता और समझदारी के साथ किया।

शिक्षा:
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि घमंड हमें विनाश की ओर ले जाता है। हमें हमेशा विनम्र और दयालु रहना चाहिए। सच्ची शक्ति विनम्रता और दूसरों का सम्मान करने में है। अहंकार का त्याग करके हम जीवन में सच्ची सफलता और शांति प्राप्त कर सकते हैं।

पहेली का उत्तर : सारस
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प्रार्थना:
माँ सरस्वती वरदान दो, 
मुझको नवल उत्थान दो। 
यह विश्व ही परिवार हो, 
सब के लिए सम प्यार हो । 
आदर्श, लक्ष्य महान हो । माँ सरस्वती..........

मन, बुद्धि, हृदय पवित्र हो, 
मेरा महान चरित्र हो। 
विद्या विनय वरदान दो। माँ सरस्वती.... 

माँ शारदे हँसासिनी, 
वागीश वीणा वादिनी। 
मुझको अगम स्वर ज्ञान दो। 
माँ सरस्वती, वरदान दो। 
मुझको नवल उत्थान दो।
उत्थान दो। उत्थान दो...।

मंत्र:
ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि। 
तन्नो: विष्णुः प्रचोदयात्॥

अर्थः हे भगवान विष्णु! आप हमें जीवन में सन्मार्ग का प्रकाश दें।

गर्भ संवाद:
मेरे प्यारे शिशु मेरे बच्चे, मैं तुम्हारी माँ ‍ हूं…… माँ!

— आज मैं तुम्हे तुम्हारे कुछ महानतम गुणों की याद दिला रही रही हूँ जो तुम्हे परमात्मा का अनमोल उपहार है।

— मेरे बच्चे! तुम्हारे मस्तिष्क में अपार क्षमता है। तुम्हारी बुद्धि तीव्र है।

— तुम आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक जैसी क्षमता लेकर आ रहे हो। तुममे कठिन से कठिन समस्या को सुलझाने की योग्यता है।

— तुम रामानुजन जैसी गणित के सवालों को हल करने की क्षमता रखते हो।

— विवेकानंद जैसी महान प्रतिभा है तुममें।

— तुम्हारी याददाश्त बहुत अच्छी है, जो बात तुम याद रखना चाहो तुम्हें सदा याद रहती है।

— तुम्हारी एकाग्रता कमाल की है। जिस काम पर तुम फोकस करते हो उसमें बेहतरीन परिणाम लेकर आते हो।

— कोई भी विषय, कोई भी टॉपिक तुम्हारे लिए कठिन नहीं, हर विषय को अपनी लगन से, परिश्रम से तुम सरल बना लेते हो।

— तुम्हारे भीतर अनंत संभावनाएं छुपी हुई है।

— तुम्हें म्यूजिक का बहुत शौक है, तुम सभी वाद्य यंत्र बजाना जानते हो। ढोलक, गिटार, तबला, हारमोनियम, तुम बहुत अच्छे से बजा सकते हो।

— तुम्हारा दिमाग बहुत तेज चलता है। मुश्किल से मुश्किल समस्या का भी तुम बड़ी आसानी से हल निकाल लेते हो।

— तुम्हारी वाणी में मिठास है। तुम एक बहुत अच्छे गायक हो। जब तुम गाते हो तो सभी मंत्रमुग्ध हो जाते है।

— तुम्हें पढ़ाई में सभी सब्जेक्ट अच्छे लगते है। जो भी पढ़ते हो बड़ी आसानी से याद हो जाता है।

पहेली:
तीन अक्षर का मेरा नाम प्रथम कटे तो रहूँ पड़ा,
मध्य कटे तो हो जाऊँ कड़ा
अंत कटे बनता कप
नहीं समझना इसको गप्प ।

कहानी: माफी का महत्व
एक छोटे से गाँव में दो मित्र रहते थे— राम और श्याम। दोनों बचपन के दोस्त थे और एक-दूसरे के बिना कुछ भी नहीं करते थे। उनका रिश्ता इतना गहरा था कि लोग उनकी दोस्ती की मिसाल देते थे। लेकिन समय के साथ, एक छोटी सी बात उनके रिश्ते में दरार डाल गई।

एक दिन, राम और श्याम खेतों में काम कर रहे थे। किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई। बहस इतनी बढ़ गई कि राम ने गुस्से में श्याम को बुरा-भला कह दिया। श्याम को यह बात बहुत बुरी लगी, और वह बिना कुछ कहे वहाँ से चला गया।

लेकिन राम को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन उसका अहंकार उसे श्याम से माफी माँगने से रोक रहा था। उसने सोचा, “अगर मैं माफी माँगूँगा, तो लोग क्या कहेंगे? मैं कमजोर दिखूंगा।”

कुछ दिनों बाद, राम ने महसूस किया कि श्याम उससे बात करना बंद कर चुका है। उसे यह बात खलने लगी। वह समझ गया कि उसने अपनी गुस्से में अपने सबसे अच्छे दोस्त को खो दिया है।

राम ने गाँव के एक बुजुर्ग से सलाह ली। बुजुर्ग ने कहा, "बेटा, माफी माँगने से कोई छोटा नहीं होता। माफी माँगना एक ऐसा कदम है, जो न केवल रिश्ते को बचाता है, बल्कि हमारे दिल को भी सुकून देता है। अगर तुम अपनी गलती मानते हो, तो श्याम से माफी माँगने में देरी मत करो।" 

राम ने बुजुर्ग की बात मानी और अगले दिन श्याम के घर गया। उसने श्याम से कहा, “भाई, मैं जानता हूँ कि मैंने तुम्हारे साथ गलत किया। मेरा गुस्सा मुझ पर हावी हो गया था। मैं तुमसे दिल से माफी माँगता हूँ।”

श्याम ने राम को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “राम, मैं तुम्हारी माफी का इंतजार कर रहा था। दोस्ती में छोटी-छोटी गलतियाँ होती हैं, लेकिन सच्चा दोस्त वही होता है, जो अपने रिश्ते को बचाने के लिए कदम उठाए।”

दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और उनकी दोस्ती फिर से पहले जैसी हो गई। राम ने उस दिन सीखा कि माफी माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत का प्रतीक है।

शिक्षा:
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि माफी माँगने से हमारे रिश्ते बच सकते हैं और मजबूत हो सकते हैं। गुस्से और अहंकार को छोड़कर, हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करना चाहिए और माफी माँगने में संकोच नहीं करना चाहिए। माफी केवल दूसरों को नहीं, बल्कि खुद को भी शांति और सुकून देती है।

पहेली का उत्तर : कपड़ा
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प्रार्थना:
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तारदे माँ

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे
हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे
हम है अकेले, हम है अधूरे
तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

मुनियों ने समझी, गुणियों ने जानी
वेदों की भाषा, पुराणों की बानी
हम भी तो समझे, हम भी तो जाने
विद्या का हमको अधिकार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

तू श्वेतवर्णी, कमल पर विराजे
हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे
मन से हमारे मिटाके अँधेरे
हमको उजालों का संसार दे माँ
हे शारदे माँ, हे शारदे माँ
अज्ञानता से हमें तार दे माँ

मंत्र:
ॐ शान्ताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्। 
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांगम्॥
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

अर्थः मैं ऐसे सर्वव्यापी भगवान विष्णु को प्रणाम करता हूं जिनका स्वरूप शांत है। जो शेषनाग पर विश्राम करते हैं, जिनकी नाभि पर कमल खिला है और जो सभी देवताओं के स्वामी हैं।
जो ब्रह्मांड को धारण करते हैं, जो आकाश की तरह अनंत और असीम हैं, जिनका रंग नीला है और जिनका शरीर अत्यंत सुंदर है।
जो धन की देवी लक्ष्मी के पति हैं और जिनकी आंखें कमल के समान हैं। जो ध्यान के जरिए योगियों के लिए उपलब्ध हैं।
ऐसे श्रीहरि विष्णु को नमस्कार है जो सांसारिक भय को दूर करते हैं और सभी लोगों के स्वामी हैं।

गर्भ संवाद
“भगवान का मार्गदर्शन किसी भी भौतिक संपत्ति से बड़ी चीज है। जब भगवान तुम्हारे साथ होते हैं, तो तुम सही रास्ते पर चलते हो और जीवन में सही निर्णय लेते हो। भगवान का आशीर्वाद तुम्हें हर समस्या में रास्ता दिखाता है। मुझे यह विश्वास है कि जब तुम जीवन के रास्ते पर चलते हो और भगवान से मार्गदर्शन प्राप्त करते हो, तो तुम कभी भी गलत दिशा में नहीं जाओगे।”

पहेली:
सरपट दौड़े हाथ न आये, 
घड़ियाँ उसका नाम बताये।

कहानी: नारद मुनि की सीख
नारद मुनि, जो देवताओं के संदेशवाहक और भक्तिवेदांत के ज्ञाता थे, अपनी बुद्धिमत्ता और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे। वे हमेशा अपने संगीत और भक्ति से भगवान विष्णु की स्तुति करते थे। लेकिन उनके जीवन की हर कहानी में एक गहरा संदेश छिपा होता था।

एक बार की बात है, नारद मुनि को यह भ्रम हो गया कि वे भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्त हैं। उन्होंने सोचा कि उनके समान भगवान को कोई और प्रेम नहीं कर सकता। इस गर्व के साथ, वे भगवान विष्णु के पास गए और उनसे पूछा, “प्रभु, क्या मैं आपका सबसे बड़ा भक्त हूँ?”

भगवान विष्णु मुस्कुराए और कहा, “नारद, तुम मेरे प्रिय भक्तों में से एक हो, लेकिन सबसे बड़े भक्त नहीं।”

यह सुनकर नारद हैरान हो गए। उन्होंने पूछा, “प्रभु, ऐसा कौन है जो मुझसे बड़ा भक्त हो सकता है?”

भगवान विष्णु ने कहा, “वह किसान, जो इस पृथ्वी पर साधारण जीवन जीता है, मेरा सबसे बड़ा भक्त है।”

नारद को विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने उस किसान से मिलने का निश्चय किया। उन्होंने देखा कि किसान अपने दिन की शुरुआत भगवान विष्णु का नाम लेकर करता है और फिर पूरे दिन अपने खेत में मेहनत करता है। दिनभर की थकान के बाद, वह रात को फिर भगवान का नाम लेकर सोता है।

नारद ने सोचा, “यह तो केवल दिन में दो बार भगवान का नाम लेता है। यह मुझसे बड़ा भक्त कैसे हो सकता है?”

भगवान विष्णु ने नारद को समझाया, “नारद, भक्ति केवल नाम जपने तक सीमित नहीं है। सच्ची भक्ति वह है, जिसमें इंसान अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए भगवान को अपने हर काम में याद रखे। यह किसान अपने हर कर्म में मुझे देखता है और यही उसकी सच्ची भक्ति है।”

नारद को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने समझा कि भक्ति केवल दिखावे की नहीं, बल्कि सच्चे समर्पण की होती है।

शिक्षा:
यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा या प्रार्थना में नहीं, बल्कि हमारे कर्मों में है। जब हम अपने हर काम में ईमानदारी और भगवान के प्रति समर्पण रखते हैं तभी हम सच्चे भक्त बनते हैं।

पहेली का उत्तर: समय
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प्रार्थना
अंतर्यामी परमात्मा को नमन,
शक्ति हमेशा मिलती रहे आपसे; 
ऐसी कृपा कर दो, अज्ञान दूर हो, आतम ज्ञान पाएँ।
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

सद्बुद्धि प्राप्त हो, व्यवहार आदर्श हो, सेवामय जीवन रहे। 
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

मात-पिता का उपकार ना भूलें, हरदम गुरु के विनय में रहें, दोस्तों से स्पर्धा ना करेंगे, एकाग्र चित्त से पढ़ेंगे हम; 
अंतर्यामी परमात्मा को नमन 

आलस्य को टालो, विकारों को दूर कर दो, व्यसनों से हम मुक्त रहें, ऐसे कुसंगों से बचा लो हमें।
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

मन-वचन और काया से, दुःख किसी को हम ना दें।
चाहे ना कुछ भी किसी का, प्योरिटी ऐसी रखेंगे हम।  
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

कल्याण के हम सब, निमित्त बने ऐसे,
विश्व में शांति फैलाएँ।
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

पूर्ण रूप से हम खिलें, मुश्किलों से ना डरें... धर्मों के भेद मिटा दें जग में, ज्ञानदृष्टि को पाकर हम।
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

अभेद हो जाएँ, लघुतम में रहकर हम,
प्रेम स्वरूप बन जाएँ।
अंतर्यामी परमात्मा को नमन

मंत्र:
ॐ आदित्याय विद्महे। 
भास्कराय धीमहि। 
तन्नो: भानु: प्रचोदयात्॥

अर्थ: मैं सूर्य देवता को नमन करता हूं। हे प्रभु, दिन के निर्माता, मुझे बुद्धि दो और मेरे मन को प्रकाशित करो।

गर्भ संवाद
"जब हमें अपने जीवन में कोई कठिनाई आती है, तो भगवान के प्रति विश्वास हमें शांति और संतुलन प्रदान करता है। विश्वास से हमारी चिंता कम होती है और हम हर समस्या का सामना शांतिपूर्वक करते हैं। जैसे जब तूफान आता है, तो भगवान का नाम लेने से हमें आंतरिक शक्ति मिलती है। मैं चाहती हूं कि तुम हर दिन भगवान पर विश्वास करो, क्योंकि विश्वास ही तुम्हें हर मुश्किल को पार करने की ताकत देगा।"

पहेली:
वह पक्षी नहीं है, 
पर उड़ सकता है, 
और उल्टा होकर सोता है।

कहानी: रानी पद्मिनी का सम्मान
राजस्थान के चित्तौड़ किले में एक समय रानी पद्मिनी का नाम अत्यधिक सम्मान और प्रतिष्ठा से लिया जाता था। उनकी सुंदरता और साहस की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई थी। रानी पद्मिनी केवल अपनी आकर्षक रूप-रंग के लिए प्रसिद्ध नहीं थीं, बल्कि उनका आत्मसम्मान, साहस और आदर्श भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत था। वह हमेशा अपने सम्मान और परिवार की सुरक्षा के लिए तैयार रहती थीं, और यही कारण था कि उनका नाम इतिहास में अमर हो गया।

यह कहानी उस समय की है, जब दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ पर आक्रमण करने की योजना बनाई थी। वह रानी पद्मिनी की प्रसिद्ध सुंदरता के बारे में सुन चुका था और उसने तय किया था कि चित्तौड़ पर आक्रमण करके वह रानी को अपने कब्जे में ले आएगा। वह रानी पद्मिनी की सुंदरता का लालच रखता था और उसका यह विश्वास था कि रानी पद्मिनी को हराने से उसकी विजय पूरी हो जाएगी।

सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ किले को घेर लिया और दरबार में यह घोषणा की कि अगर रानी पद्मिनी को उसके पास भेजा जाए, तो वह युद्ध को टाल देगा और राज्य को सुरक्षित छोड़ देगा। यह प्रस्ताव सुनकर किले में घबराहट फैल गई।

रानी पद्मिनी का सम्मान केवल उनके परिवार में ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में था। उनका त्याग और बलिदान राज्य की आत्मा थे, और किसी भी कीमत पर रानी पद्मिनी का अपमान सहन नहीं किया जा सकता था।

राजा रावल रतन सिंह, रानी पद्मिनी के पति, जो पहले ही जानते थे कि खिलजी का उद्देश्य केवल रानी को अपने कब्जे में लेना है, ने यह प्रस्ताव सख्ती से नकार दिया। लेकिन सुलतान खिलजी का दबाव बढ़ता जा रहा था और उसने किले में एक सशक्त नायक भेजा, जिसने राजा से कहा, “यदि आप रानी को खिलजी के सामने भेजने को तैयार नहीं हैं, तो वह युद्ध करेगा और आपकी प्रजा का संहार कर देगा।”

राजा रावल रतन सिंह और उनके मंत्री इस संकट का समाधान ढूंढने के लिए चिंतित थे। रानी पद्मिनी ने अपने पति के सामने यह प्रस्ताव रखा, “मुझे खुद को खिलजी के सामने भेजने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन यदि युद्ध बचाने के लिए ऐसा करना पड़े, तो मैं इस बलिदान को स्वीकार करूंगी।”

राजा रावल रतन सिंह और उनके सलाहकारों ने रानी की बात को बहुत गंभीरता से लिया। रानी पद्मिनी के बलिदान के बारे में सोचते हुए, उन्होंने निर्णय लिया कि रानी को खिलजी के पास भेजने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनका कोई अपमान न हो। उन्होंने अपनी योजना बनाई और किले के भीतर एक जौहर (आत्मदाह करने का निश्चय किया, ताकि किसी भी हालत में रानी पद्मिनी का सम्मान न घटे।)

जब सुलतान अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ किले पर हमला किया, तो रानी पद्मिनी और किले की अन्य महिलाओं ने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए जौहर की तैयारी की। रानी पद्मिनी ने अपने साथियों को अपने सम्मान की रक्षा के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह तय किया कि यदि वह आत्मसमर्पण नहीं करेंगी, तो वे अपनी इज्जत बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देंगी। 

रानी पद्मिनी और उनकी साथी महिलाओं ने अंतिम समय में अपनी इज्जत और सम्मान को बचाने के लिए आत्मदाह करने का मार्ग चुना। यह निर्णय कोई आसान नहीं था, लेकिन रानी पद्मिनी और उनकी साथी महिलाओं ने अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए एक अडिग कदम उठाया। वे चित्तौड़ किले के भीतर जलती हुई चिता में कूद गईं, ताकि उनका सम्मान हमेशा अमर रहे। हमेशा अमर रहे।

यह घटना न केवल चित्तौड़ के किले में, बल्कि पूरे भारत में एक साहसिक कृत्य के रूप में जानी गई। रानी पद्मिनी के इस बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि उनका सम्मान उनके प्राणों से भी अधिक मूल्यवान था। रानी पद्मिनी का सम्मान और साहस हमेशा के लिए भारतीय इतिहास में अमर हो गया।

शिक्षा:
रानी पद्मिनी की यह कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि सम्मान और आत्मसम्मान को किसी भी परिस्थिति में कभी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। रानी पद्मिनी ने हमें यह सिखाया कि हमें अपनी इज्जत और सम्मान की रक्षा के लिए हर स्थिति में खड़े रहना चाहिए, चाहे वह कितना भी कठिन क्यों न हो। आत्मसम्मान और गरिमा जीवन के सबसे बड़े आभूषण होते हैं और उनका सम्मान करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

रानी पद्मिनी का बलिदान यह दर्शाता है कि कभी-कभी हमें अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और जीवन को त्याग कर भी अपने आदर्शों, सम्मान और सिद्धांतों की रक्षा करनी पड़ती है। रानी पद्मिनी ने यह सिद्ध किया कि एक महिला का सम्मान और साहस किसी भी चुनौती से बड़ा होता है।

यह कहानी यह भी सिखाती है कि हमें कभी भी किसी प्रकार के अपमान या हिंसा के सामने आत्मसमर्पण नहीं करना चाहिए। हमें अपने आत्मसम्मान और मूल्य की रक्षा के लिए हर परिस्थिति में दृढ़ रहना चाहिए, क्योंकि यही हमें सम्मान और शौर्य की ऊँचाइयों तक पहुंचाता है।

पहेली का उत्तर : चमगादड़
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