MAHAASHAKTI - 10 in Hindi Mythological Stories by Mehul Pasaya books and stories PDF | महाशक्ति - 10

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महाशक्ति - 10

महाशक्ति – दसवां अध्याय: विध्वंस का संदेश


कालचक्र के रहस्यमयी द्वार के पार जाते ही अर्जुन और अनाया खुद को एक नई, अज्ञात भूमि पर पाते हैं। यहाँ की हवा में अजीब-सी बेचैनी थी, जैसे यह स्थान किसी भयानक घटना का साक्षी रह चुका हो। चारों ओर सन्नाटा पसरा था, केवल दूर-दूर तक टूटे हुए मंदिरों के खंडहर दिखाई दे रहे थे।


अर्जुन ने चारों ओर नजर दौड़ाई। "यह जगह मुझे जानी-पहचानी लग रही है," उसने धीमी आवाज़ में कहा।


अनाया ने सिर हिलाया। "हाँ, मुझे भी ऐसा लग रहा है, जैसे यह कभी बहुत पवित्र स्थान रहा होगा, लेकिन अब... यहाँ सिर्फ विध्वंस बचा है।"


खंडहरों के बीच छिपा अतीत


वे दोनों आगे बढ़े तो एक विशाल मंदिर के सामने पहुंचे। यह मंदिर बाकी खंडहरों से अलग था। इसकी दीवारों पर गहरे रहस्यमयी चित्र उकेरे गए थे, जो समय के थपेड़ों से धुंधले हो चुके थे।


"इस मंदिर का नाम क्या है?" अनाया ने अर्जुन से पूछा।


"यह महाकालेश्वर मंदिर है, जहाँ कभी स्वयं महादेव और माता पार्वती ने ध्यान लगाया था। लेकिन अब यह उजड़ा हुआ लगता है," अर्जुन ने जवाब दिया।


जैसे ही वे मंदिर के द्वार के करीब पहुँचे, अंदर से किसी के चलने की आवाज़ आई। दोनों सतर्क हो गए। अचानक एक वृद्ध तपस्वी उनके सामने प्रकट हुए।


उनकी दाढ़ी घुटनों तक फैली हुई थी, और उनकी आँखों में हजारों वर्षों का ज्ञान झलक रहा था।


तपस्वी की भविष्यवाणी


"तुम्हारा इंतजार था, पुत्र," तपस्वी ने अर्जुन को देखते हुए कहा।


अर्जुन और अनाया ने आश्चर्य से उनकी ओर देखा।


"आप हमें जानते हैं?" अनाया ने पूछा।


"मैं सिर्फ तुम्हें ही नहीं, बल्कि तुम्हारे भाग्य को भी जानता हूँ। तुम्हारी यात्रा यहाँ समाप्त नहीं होती, बल्कि यह तो केवल आरंभ है।"


"कौन-सा आरंभ?" अर्जुन ने गंभीरता से पूछा।


"विनाश और पुनर्जन्म का आरंभ।" तपस्वी की आँखों में एक अलग ही चमक थी।


तपस्वी ने आगे बताया कि यह मंदिर कभी देवताओं और असुरों के बीच हुए महायुद्ध का केंद्र था। यह वही स्थान था, जहाँ महादेव ने कालचक्र की सबसे बड़ी शक्ति छुपाई थी—"त्रिनेत्र मणि"।


"त्रिनेत्र मणि?" अर्जुन और अनाया ने एक साथ कहा।


"हाँ, यह मणि इतनी शक्तिशाली है कि जो भी इसे प्राप्त करेगा, वह पूरे सृष्टि के समय और भाग्य को अपने अनुसार मोड़ सकता है।"


कालांतर का आगमन


तपस्वी की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि अचानक पूरा मंदिर काँप उठा। जैसे कोई प्रचंड शक्ति जाग उठी हो।


चारों ओर घना अंधकार फैलने लगा, और एक गूंजती हुई हँसी वातावरण में गूँजी।


"हा हा हा! तो यही हैं वे दो योद्धा, जिनके बारे में भविष्यवाणी की गई थी?"


अर्जुन और अनाया ने चारों ओर देखा, लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।


तभी मंदिर के प्रवेशद्वार से एक विशाल आकृति प्रकट हुई। यह एक भयंकर असुर था, जिसकी लाल आँखें अंगारे की तरह जल रही थीं, और उसका शरीर काले धुएँ से ढका हुआ था।


"मैं कालांतर हूँ!"


तपस्वी के चेहरे पर चिंता की लकीरें उभर आईं।


"वह त्रिनेत्र मणि को अपने कब्जे में लेना चाहता है। अगर वह इसमें सफल हो गया, तो संपूर्ण सृष्टि नष्ट हो सकती है!"


कालांतर ने अपनी लंबी, नुकीली उंगलियाँ उठाईं और हवा में एक आग का गोला उत्पन्न कर अर्जुन की ओर फेंका।


अर्जुन ने झट से अपनी तलवार निकाली और गोले को काट दिया, लेकिन उसके झटके से वह पीछे हट गया।


"अर्जुन, यह कोई साधारण शक्ति नहीं है!" अनाया ने चेतावनी दी।


महायुद्ध की शुरुआत


कालांतर अब पूरी शक्ति से उन पर हमला करने के लिए तैयार था। उसकी भुजाएँ और बड़ी हो गईं, और उसकी शक्ति चारों ओर अंधकार फैला रही थी।


अर्जुन और अनाया एक-दूसरे को देखकर समझ गए कि अब यह युद्ध टालना असंभव है।


क्या अर्जुन और अनाया इस महाशक्तिशाली असुर को हरा पाएंगे

? कालांतर की शक्ति कितनी भयंकर है? जानने के लिए पढ़ते रहिए—महाशक्ति!