महाशक्ति – नवां अध्याय: कालचक्र की परछाई
अर्जुन और अनाया जैसे ही दिव्य द्वार के अंदर प्रवेश करते हैं, चारों ओर घना अंधकार छा जाता है। वे दोनों एक-दूसरे का हाथ मजबूती से थामे आगे बढ़ते हैं। यह जगह किसी दूसरी ही दुनिया की तरह लग रही थी—ना कोई दीवारें, ना छत, सिर्फ एक अनंत शून्य, जिसमें केवल एक ही चीज़ दिखाई दे रही थी—एक विशाल कालचक्र!
कालचक्र का रहस्य
उस दिव्य चक्र के चारों ओर कई प्रतीक बने हुए थे, और उसके केंद्र में एक धधकता हुआ प्रकाश घूम रहा था। अचानक एक गूंजती हुई आवाज़ आई—
"समय से बड़ा कोई शस्त्र नहीं, और न ही कोई बड़ा वरदान। क्या तुम इस शक्ति के योग्य हो?"
अर्जुन और अनाया ने एक-दूसरे को देखा। वे समझ गए कि यह उनकी अगली परीक्षा थी।
अर्जुन की परीक्षा: धैर्य बनाम क्रोध
अचानक, अर्जुन खुद को एक युद्धभूमि में पाता है। सामने वही लोग खड़े हैं, जिन्होंने उसके जीवन को कष्ट दिया था। उनमें से एक ने उसकी माँ का अपमान किया था, दूसरा उसके पिता की मृत्यु का कारण बना था। अर्जुन के भीतर क्रोध भड़क उठा।
"अब मैं इनसे बदला लूंगा!" उसने तलवार खींची।
लेकिन तभी पीछे से एक आवाज़ आई—
"क्या यही तुम्हारी शक्ति है? बदले की ज्वाला में जलना?"
अर्जुन रुका, उसकी साँसे तेज़ हो गईं। उसने महसूस किया कि यह कालचक्र उसे परीक्षा में डाल रहा है। अगर वह क्रोध के वशीभूत हो जाता, तो वह इस परीक्षा में असफल हो जाता।
उसने गहरी सांस ली, तलवार को नीचे किया और कहा—
"न्याय क्रोध से नहीं, बल्कि धर्म से होता है। मैं अधर्म का नाश करूंगा, लेकिन अपने क्रोध में नहीं जलूंगा।"
जैसे ही उसने यह कहा, युद्धभूमि गायब हो गई और वह वापस अनाया के पास आ गया।
अनाया की परीक्षा: मोह बनाम त्याग
अब अनाया के सामने एक अलग चुनौती थी। वह खुद को अपने बचपन में पाती है, जहाँ उसके माता-पिता जीवित हैं। वे उसे पुकार रहे हैं, उनकी आँखों में वही पुराना प्यार था।
"अनाया, हमारे पास वापस आ जाओ! यह सब छोड़ दो, तुम्हें यह युद्ध नहीं लड़ना चाहिए!"
अनाया की आँखें नम हो गईं। वह अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती थी, और उनका इस तरह से बुलाना उसे विचलित कर रहा था।
लेकिन तभी उसने महसूस किया कि यह केवल उसकी परीक्षा है। उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं थे। यह सिर्फ उसके मोह की परीक्षा थी।
उसने अपनी आँखें बंद कीं और कहा—
"मेरा प्रेम सच्चा है, लेकिन मेरा धर्म सबसे ऊपर है। मैं सत्य की राह से नहीं हटूंगी।"
जैसे ही उसने यह कहा, दृश्य बदल गया और वह अर्जुन के पास लौट आई।
कालचक्र का आशीर्वाद और नई चुनौती
अब दोनों कालचक्र के सामने खड़े थे। वह दिव्य प्रकाश अचानक शांत हो गया और एक पवित्र आवाज़ आई—
"तुम दोनों ने यह सिद्ध कर दिया कि तुम इस शक्ति के योग्य हो। परंतु याद रखो, शक्ति के साथ परीक्षा कभी समाप्त नहीं होती। आगे जो आने वाला है, वह अब तक की सबसे बड़ी चुनौती होगी।"
इतना कहते ही कालचक्र अचानक तेजी से घूमने लगा और उनके सामने एक और द्वार खुल गया।
अर्जुन और अनाया ने एक-दूसरे को देखा। वे जानते थे कि यह द्वार उनकी यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव साबित होने वाला था। लेकिन वे निडर थे, क्योंकि अब वे केवल योद्धा नहीं थे—वे महाशक्ति के रक्षक थे।
अब आगे क्या होगा? कौन-सी नई शक्ति अर्जुन और अनाया का इंतज़ार कर रही है? जानने के लिए पढ़ते रहिए—महाशक्ति!