मैं और मेरे अह्सास
नहीं तो और क्या है
मोहब्बत नहीं तो और क्या है बताओ तो जरा l
गहरी नीद से अपनेआप को जगाओ तो जरा ll
बड़ा उखड़ा विरान जीवन जी रहे हो सुनो तो l
यार दोस्तों से रंगीन महफिल सजाओ तो जरा ll
चार दिन जिन्दगी जीने आए है क़ायनात में l
जीवन शैली बदलने खुद को मनाओ तो जरा ll
सखी
डॉ दर्शिता बाबूभाई शाह