बुराइयाँ क्यों हावी हो जाती हैं?
बुराइयाँ क्यों हावी हो जाती हैं मन पर,
अच्छाइयों का क्यों दमन हो जाता है?
क्यों बुराइयाँ अच्छाइयों को दबाकर,
मन के भीतर अपना घर बना लेती हैं?
नहीं चाहते हुए भी बुराइयाँ
मन में क्यों उतर जाती हैं?
अच्छाइयाँ जानते हुए भी हम,
क्यों उन्हें पीछे छोड़ आते हैं?
जब मन भीतर से खोखला हो जाता है,
तो बुराइयों को सहारा क्यों बना लेता है?
जब आत्मा अच्छाई का मार्ग दिखाती है,
तो मन बुराई की ओर क्यों चला जाता है?
क्या बुराइयाँ सच में हम पर हावी होती हैं,
या हमारी कमजोरियाँ उन्हें शक्ति देती हैं?
क्या अच्छाइयाँ वास्तव में हार जाती हैं,
या हम ही उनका साथ छोड़ देते हैं?
शायद बुराई बाहर से नहीं आती,
वह हमारे भीतर की कमजोरी से जन्म लेती है;
और अच्छाई कभी समाप्त नहीं होती—
वह बस हमारे भीतर जागने की प्रतीक्षा करती है।