उन बेपरवाह सी ल़डकियों को देख कर कई बार लगता है.........
बेपरवाह होना कितना अच्छा होता है.......
ना लोगों की परवाह ना ही किसी से कोई उम्मीद बस खुद पर कुछ करने का एहसास.........
और एक दिन आता है जब उनको किसी के साथ बहुत सारे बंधनों में बाँध दिया जाता है.........
वो बेपरवाह सी कहीं दूर से अपने आप को याद करती रहती है..........
उन सब को पूछना चाहती है कि क्या बेपरवाह माँ बाप ही रख सकते हैं .........
क्या मेरी उलझी जिन्दगी को सुलझाने के लिए फिर बेटी के रूप में जन्म लेना होगा.........
क्या सब सही होकर भी गलत लगना जरूरी होता है.......
फिर बस इन्हीं सवालों से समझोते करते करते एक दिन सब सवालों को कहीं दूर जला कर जिंदगी में आगे बढ़ती है कुछ बेपरवाह सी बेटियाँ..........
Life of independent girl.........