📩 Dil Ka Notification #03
शीर्षक : पापा... कुछ नहीं कहते
पापा... कुछ नहीं कहते...
पर शाम को
उनके अस्त-व्यस्त कपड़े...
बहुत कुछ कह जाते हैं।
पापा... कुछ नहीं कहते...
पर उनके पुराने जूतों की
नई सिलाई...
बहुत कुछ कह जाती है।
पापा... कुछ नहीं कहते...
पर रात को
पूरे दिन की थकान...
उनकी नम-सी आँखें
बोल जाती हैं।
पापा... कुछ नहीं कहते...
पर मेरा नाम लेते ही
उनके सूखे होंठों की मुस्कान...
बहुत कुछ कह जाती है।
फिर समझ आया...
जो बिना कहे
अपनों के लिए सब सह जाता है...
शायद उसी खामोशी को...
पापा का प्यार कहते हैं।
धड़क ते रहिए ❣️
✍️ — जिगर अशोक पंड्या
--------------------
इसे पढ़कर पापा की याद आई होतो उन्हें जरूर याद कीजियेगा। क्या पता एक notification कोई नई पुरानी बात होठों पर मुस्कान ले आए।
{अगला notification :-
मेरा दोस्त बहुत busy रहता हे}