रिश्तों की डोरी फिर टूटी....
रिश्तों की डोरी फिर टूटी।
समझो अपनी किस्मत फूटी।।
सामाजिक प्राणी है मानव।
अपने परिवारों की खूटी।।
नेताओं की बात न पूछो।
धन दौलत जमकर है लूटी।।
दर्द विनाशक हैं सदियों से।
आयुर्वेद की जड़ी-बूटी।।
मानव रहा अकेले घर में।
आँगन कौदों-कुटकी कूटी।।
प्लेटफार्म पर मैं भी पहुँचा।
देख रहा था गाड़ी छूटी।।
मनोज कुमार शुक्ल मनोज