हमारे बाबा ने बगिया बनाई,
चार बरगदों की छाँव सजाई।
हर रिश्ते को प्यार से सींचा,
ममता की खुशबू घर-घर आई।
अभी तो माली साथ हमारे,
खाद-पानी दिल से डाला।
प्यार की जड़ इतनी गहरी,
हर मौसम ने फूल संभाला।
न आए कभी पतझड़ इसमें,
रिश्तों का ये प्यार बना रहे।
बाबा की दी इस बगिया में,
हर आँगन यूँ ही हरा रहे।
DHAMAK