सुनो दोस्तो एक दिन क्या हुआ
एक दिन की मैं सुनाऊं दास्ताँ
जब हम पांचवी में पढ़ते थे
स्कूल से घर आ रहे थे
रस्ते में दिखे दो गधे
सामने से चले आ रहे थे
भाई बोला कैसे गधे हैं ये
रास्ता रोके जा रहे थे
मैं बोली भाई गधे सुनते ही नहीं
शायद गधों के कान नहीं होते
गधे ने सुन ली मेरी बात
गधे तो बुरा मान गए
और सुनो लो कर लो बात
गधे ने हमें सबक सिखाने की सोची
चुपके से जाकर अपने दोस्तों को बुला लाए
फंस गए हम चौराहे पर
जिधर देखे उधर गधे
सोचे हम किधर जाएं
इधर जाएं उधर जाएं
गधे ने दुलत्ती मारी तो
सीधे स्वर्ग ना पहुंच जाएं
अब कैसे अपनी जान बचाएं
भाई गधे कर दो माफ
घर जाने का रास्ता कर दो साफ
किस्मत अच्छी थी, बात सच्ची थी
दया गधे को आई
थोड़ी सी दी जगह दिखाई
भागे घर को
हम दोनों बहन भाई
और इस तरह अपनी जान बचाई
कर ली तौबा, अब ना कहेंगे
गधे को ना दे सुनाई
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi
22/6/26