Hindi Quote in Blog by Narayan

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अधूरी आत्माओं का पुनर्जन्म~~~~❣️🥀

कहते हैं,

जो प्रेम अपने पूर्ण स्वरूप तक नहीं पहुँच पाता,

वह समाप्त नहीं होता।

वह मृत्यु के साथ जलता भी नहीं,

मणिकर्णिका की अग्नि भी उसे भस्म नहीं कर पाती।

भागीरथी बहा ले जाती है अस्थियाँ,

पर प्रेम की तड़प जल में नहीं घुलती।

वह रह जाती है—

आत्मा के किसी अतल कोने में, एक अधूरी पंक्ति की तरह।

शायद इसी कारण

कुछ आत्माएँ मोक्ष नहीं पातीं।

वे लौटती हैं।

बार-बार लौटती हैं।

कभी किसी अजनबी की आँखों में अपना पुराना घर खोजने,

कभी किसी अनजान आवाज़ में अपनी खोई हुई पुकार सुनने,

कभी किसी स्पर्श में सदियों पुरानी पहचान पाने।

शायद पुनर्जन्म

सिर्फ कर्मों का नहीं,

अधूरे प्रेमों का भी विधान है।

शायद इसी कारण

कुछ लोग पहली ही भेंट में अजनबी नहीं लगते।

उनके दुःख परिचित लगते हैं।

उनकी चुप्पी समझ में आती है।

उनकी आँखों में अपनी ही प्रतीक्षा दिखाई देती है।

जैसे दो बिछड़ी हुई आत्माएँ

समय के विशाल मेले में एक-दूसरे को पहचान रही हों।

कौन जाने,

जो आज तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर रोता है,

वह किसी पिछले जन्म में तुम्हारे लिए रोते-रोते मर गया हो।

कौन जाने,

जिसकी अनुपस्थिति आज भी चुभती है,

वह किसी और युग में तुम्हारी ही प्रतीक्षा करते-करते भागीरथी के जल में विलीन हुआ हो।

मृत्यु सब कुछ समाप्त नहीं करती।

कुछ प्रेम

चिता की अग्नि से भी अधिक दीर्घजीवी होते हैं।

वे राख बनकर नहीं,

प्रार्थना बनकर बचते हैं।

फिर जन्म लेते हैं।

फिर बिछड़ते हैं।

फिर खोजते हैं।

फिर मिलते हैं।

जब तक कि

सृष्टि की किसी अंतिम संध्या में,

दोनों आत्माएँ अपने समस्त विरह, समस्त प्रतीक्षा, समस्त जन्मों का ऋण चुका न दें।

और जब अंततः

उनकी अधूरी पंक्तियाँ पूरी हो जाती हैं,

जब उनका प्रेम प्रार्थना से भी आगे बढ़कर अस्तित्व बन जाता है,

तब भागीरथी मौन हो जाती है।

मणिकर्णिका की अग्नि आशीर्वाद बन जाती है।

काल अपने द्वार बंद कर देता है।

और वे दोनों आत्माएँ,

जिन्होंने युगों तक एक-दूसरे को खोजा था,

अब किसी जन्म की नहीं, किसी मृत्यु की नहीं,

अनंत की हो जाती हैं।

तभी शायद

मोक्ष घटित होता है।

और बैकुंठ के किसी शांत आकाश में,

जहाँ न विरह है, न पुनर्जन्म,

वे दोनों आत्माएँ

एक-दूसरे के पास बैठी रहती हैं,

ठीक वैसे ही,

जैसे सृष्टि के आरंभ में बैठी हों—

और प्रेम,

अंततः अपने घर पहुँच गया हो।॥ 🌺

Hindi Blog by Narayan : 112028042
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