अखियां बरसे
गीत
दिन दिन तरसा
तन्हा रहा कई अरसों से
यह आंखें बरसी बरसी
सावन के बद्री बिन मौसम के
दोशी की तरह से जीते रहे
जीने की सजा ऐसी मिली हमको
हम आहे भी ना भरसके
हम तड़प तड़प के जीते रहे
जीने की सजा ऐसे मिली
हम दिल खोल कर रो भी ना सके
दिन दिन तरसे
अखियों से बैरागी बरसी
बरसी बिन मौसम के
दर्द अंदर है
होठों से आह भी ना निकलते
जो जख्मी है दिल
दिल दवा की चाहत भी ना कर सके
बस करते हैं
कुछ और देर ठहेर जाने की दुआ
मुर कर पीछे देखते हुए
कोई आए जख्मों पे मरहम लगा दे
यह सोचते हुए
अंदर रोता एक छोटा बच्चा खुद से ही
उलझ जा रहा
हां अंदर रोता एक छोटा बच्चा
खुद से ही उलझा जा रहा
अब उम्मीद नहीं कोई आकर रोके
कोई आकर टोके
या कोई बचा ले जाए उन्हें
उम्मीद से भरा निराशों से पला
खिच ले जाए उसे जिंदगी की डोर आगे की तरफ
खामोश होंठ लिए
ऐ तरसा मन खुद को वया ना कर सके
बस बरसे आंखें बरसे बन बद्री बिन मौसम के
हां आंखें बरसे ऐ बरसे
रहा चलते
चलते बैरागी बिना सहारे के
चाहत अधूरी है पर उम्मीद में धीमी रोशनी है
रोशनी देख पीछे देख देखें बैरागी राहों को
तरसे तरसे बिन अपने के
तन्हा रह रहकर कई अरसो से
अखियां बरसी बरसी
बन के बद्री बिन मौसम के